समुद्र में खोए उन 49 के लिए दुआएं, रात-दिन जुटी नौसेना, काश! कुछ ऐसा चमत्कार हो जाए

नई दिल्ली

चक्रवाती तूफान तौकते की चपेट में आए अरब सागर में चलते जहाज बार्ज पी-305 में सवार 75 में से 26 लोगों की मौत हो चुकी है। बार्ज P305 के 49 क्रू मेंबर्स अभी भी लापता हैं। भारतीय नौसेना दिन-रात इन लोगों की तलाश में जुटी हुई है। नौसेना के साथ ही देश में लोगों को उम्मीद है कि समुद्र में खोए लोग जरूर मिलेंगे। जीने का जज्बा और हौसला हमेशा से लहरों की जिद पर भारी पड़ता रहा है। परिस्थितियां कितनी भी विपरित क्यों ना हो मनुष्य ने हर बार अपने जज्बे से कामयाबी की नई इबारतें लिखी हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि समुद्र में ये लापता लोग अपने हौसले से मौत को मात देकर अपने परिवार के पास लौटेंगे। लोग उनके सुरक्षित होने के लिए दुआएं कर रहे हैं।

ये पहली बार नहीं है कि समुद्र में इस तरह लोग लापता हुए हैं। इससे पहले भी कई मौके आए हैं जब समुद्र में 20 दिन, 30 दिन, 100 दिन यहां तक कि 438 दिन बाद भी लोग वापिस लौटे हैं। परिस्थितियों की विषमता को मात देते हुए लोगों ने यह साबित किया है कि अगर मन में जीने का जज्बा और हिम्मत हो तो जिंदगी को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। चमत्कार पहले भी हुए हैं और उम्मीद है कि इस बार ही ऐसा ही कोई चमत्कार होगा। जानते हैं समुंदर में लहरों के खिलाफ जज्बे और हौसले की कुछ कहानियों के बारे में…

​133 दिन समुद्र में भटकते रहे चीन के पून लिम
चीन के पून लिम के नाम सबसे अधिक दिनों तक समुद्र में रहने का रिकॉर्ड है। लिम एक राफ्ट के जरिये नवम्बर 1942 से अप्रैल 1943 तक समुद्र में भटकते रहे। लिम एक ब्रिटिश मर्चेंट शिप का हिस्सा था जो केपटाउन से चला था। इस शिप पर समुद्र में नाजी यू-बोट ने हमला कर दिया था। इसके दो घंटे तक लिम समुद्र में तैरते रहे। आखिरकार उन्हें एक लाइफ राफ्ट मिला। इस राफ्ट पर कुछ बिस्कुट, टॉर्च और ताजा पानी भी था। कुछ दिनों में जब ये सबकुछ खत्म हो गया था उन्होंने मछलियां खाकर दिन काटे। आखिकार अमेजन रिवर में उन्हें तीन ब्राजीली मछुआरों ने बचा लिया। वापस लौटने र किंग जॉर्ज VI ने उन्हें ब्रिटिश एम्पायर मेडल से सम्मानित किया। रॉयल नेवी ने उनकी कहानी को सर्वाइवल मैनुअल में शामिल किया।

​साथी की मौत के बाद भी नहीं छोड़ा हौसला
जोस साल्वाडोर अलवरेंगा समुद्र में एक साल से भी अधिक समय तक (438 दिन) लापता रहे। मेक्सिको तट के पास समुद्री तूफान में इनकी बोट उस समय लापता हो गई जब उसमें लगी मोटर अलग हो गई। जोस के साथ सिर्फ उनके साथी 22 वर्षीय एजेक्विल ही बचे। समुद्र में भटकने के चार महीने के भीतर साथी की मौत हो गई।साथी की मौत के बाद भी उन्होंने जिंदा रहने का हौसला नहीं छोड़ा। जोस मछलियां, पक्षी, शार्क खाकर और बारिश का पानी पीकर खुद को जिंदा रखने में कामयाब रहे। प्रशांत महासागर में भटकने के दौरान कई बार उनकी हिम्मत जवाब दे जा रही थी। जोस ने बताया कि जिंदा रहने की इच्छा ने ही उन्हें बचाए रखा

​कूल बॉक्स ने बचाई थी दो लोगों की जान
दिसंबर 2008 में समुद्र में गई एक छोटी थाई फिशिंग बोट लापता हो गई थी। इस बोट पर 20 लोग सवार थे। करीब 25 दिन बाद एक कस्टम्स प्लेन को ऑस्ट्रेलिया की जल सीमा में हॉर्न आइसलैंड के पास एक आइस बॉक्स तैरता दिखाई दिया था। इस आइस बॉक्स में बर्मा मूल के दो लोग मिले थे। इस दौरान इन लोगों ने चक्रवात शार्लोट का सामना किया। साथ ही समुद्र में शार्क के खतरों के बीच खुद को कूल आइस बॉक्स में सुरक्षित रखने में कामयाब हुए। आइस बॉक्स का प्रयोग आमतौर पर मछलियों को रखने के लिए किया जाता है।

76 दिन राफ्ट के सहारे समुद्र में बिताए
दिल में जीने का जज्बा और खुद के बोट निर्माण की क्षमता ने स्टीव कॉलहान को 76 दिनों तक समुद्र में जीवित रखा। स्टीव अपनी खुद की बनाया बोट लेकर ट्रांसअटलांटिक नौका यात्रा पर निकल गए। एक सप्ताह में ही उनका खुद का बनाया हुआ बोट डैमेज हो गया। बोट को नुकसान इतना हुआ कि वह रिपेयर करने लायक भी नहीं बची और डूब गई। इसके बाद उन्होंने इन्फ्लैटेबल लाइफ राफ्ट पर अगले 76 दिन समुद्र में बिताए। अपनी बोट के डूबने से पहले उन्होंने उस पर से कुछ सामान लेने में कामयाब हुए। इनमें से एक स्पीयर गन भी थी। इसके सहारे ही उन्होंने समुद्र में मछलियां पकड़ कर अपना गुजारा किया। आखिरकार वह फ्रांस के गुआडेलू तट पर पहुंचने में कामयाब हुए।

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