ब्लैक फंगस के बाद आया खतरनाक वाइट फंगस, COVID-19 की तरह करता है हमला

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में गिरावट आने से थोड़ी सी राहत की मिली ही थी कि अब देश के कई हिस्सों में ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस ने तेजी से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित और भी कई हिस्सों में ब्लैक फंगस तेरी से पैर पसार रहा है। इस इंफेक्शन से सरकार और जनता की चिंता को और बढ़ा दिया है और अब ये धीरे-धीरे एपीडेमिक का रूप भी ले सकता है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया गया है। ब्लैक फंगस की चिंता कम नहीं हुई थी कि अब वाइट फंगस के केस भी सामने आए हैं।

जी हां, वाइट फंगस के बाद अब कोविड रिकवरी के वक्त वाइट फंगस का खतरा भी मंडराने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार में तमाम लोग वाइट फंगस का शिकार हुए हैं। बताया जा रहा है कि वाइट फंगस ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। आइए, जानते हैं क्या है वाइट फंगस और कैसे करें इसके सिम्टम्स की पहचान…

​सावधानियां
ब्लैक फंगस में ब्लड शुगर लेवल को कम करना बगुत जरूरी है। डायबिटीज के मरीज हमेशा अपना शुगर लेवल चेक करते रहें। साथ ही स्टेरॉयड भी बिल्कुल न लें और अगर ज्यादा जरूरी है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। ये जानकारी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी दी है।

​यहां मिले वाइट फंगस के मामले
बिहार में वाइट फंगस के मामले सामने आए हैं और इनमें से एक फ्रंटलाइन डॉक्टर भी शामिल है जिसे Candidiasis के सिम्टम्स दिखे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वाइट फंगस ब्लैक से भी ज्यादा घातक हो सकता है।

पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (PMCH) में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह के मुताबिक, अब तक ऐसे चार मरीज मिले हैं, जिनमें कोविड-19 जैसे लक्षण थे, लेकिन असल में वे कोरोना पॉजिटिव नहीं बल्कि वाइट फंगस से संक्रमित थे।मरीजों के कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और RT-PCR टेस्ट निगेटिव थे। हालांकि, बिहार के अलावा दूसरे किसी राज्य में वाइट फंगल इंफेक्शन के कोई केस नहीं मिले हैं।

​वाइट फंगस पर एक्सपर्ट्स की राय
वाइट फंगस और कोविड-19 में अंतर करना बहुत मुश्किल है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, वाइट फंगल इंफेक्शन भी कोविड की तरह व्यक्ति के फेफड़ों पर अटैक करता है। वाइट फंगस से फेफड़ों के संक्रमण के सिम्टम्स HRCT टेस्ट करने पर कोरोना जैसे ही दिखते हैं।लिहाजा दोनों में अंतर कर पाना काफी मुश्किल है। एक्सपर्ट्स की मानें तो जिस तरह कोविड-19 के गंभीर मामलों में अतिरिक्त स्कैन की आवश्यकता होती है, उसी तरह वाइट फंगल संक्रमण का पता लगाने के लिए HRCT स्कैन के समान परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

​किन्हें वाइट फंगस का सबसे ज्यादा खतरा
वाइट फंगस होने के कारण भी वही हैं जो ब्लैक फंगस के हैं। जैसा कि ब्लैक फंगस भी उन्हीं लोगों को अपना शिकार बनाता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो और जो पहले से ही सेहत संबंधी समस्याएं झेल रहे हों। ऐसे में जो लोग एंटीबायोटिक या फिर स्टेरॉयड दवाएं का प्रयोग करते हैं, वे इसकी चपेट में आ सकते हैं।यानी डायबिटीज और कैंसर के मरीजों को ये जल्दी अपनी गिरफ्त में लेता है। क्योंकि वही लोग स्टेरॉयड केमिकल युक्त दवाएं लेते हैं। वाइट फंगस का उन मरीजों के लिए भी खतरा है जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, ये उनके फेफड़ों को यह संक्रमित कर सकता है।

​नवजात शिशु में दिख सकता है वाइट फंगस
वहीं, नवजात में वाइट फंगस डायपर कैंडिडासिस के रूप में चपेट में लेता है जिसमें ऑफ वाइट धब्बे दिखते हैं। छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है, तो वहीं महिलाओं में यह ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है।

​फेफड़ों के अलावा दूसरे अंगों को भी प्रभावित करता है
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि वाइट फंगस फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित करता है। इनमें आंत, पेट, गुर्दे, दिमाग, जननांग, मुंह और नाखून भी शामिल हैं।ब्लैक फंगस को उच्च मृत्यु दर (High mortality rate) के लिए जाना जाता है। वाइट फंगस कितना घातक है, इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि वाइट फंगस शरीर के अंगों में बहुत जल्दी से फैलता है।

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