ग्रामीण इलाके में कोरोना संक्रमण से अधिक लोगों के मरने की बड़ी वजह कहीं यह तो नहीं

नई दिल्ली

देश में कोरोना के मौजूदा संकट ने शहरी और ग्रामीण इलाके में हेल्थ केयर सुविधाओं की पोल खोल कर रख दी है। शहरों में जहां अस्पतालों पर काफी दबाव पड़ रहा है, निवासियों के पास कम से कम हेल्थ केयर और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं मौजूद है। यह बात देश के ग्रामीण इलाकों के लिए नहीं कही जा सकती। भारत में कोरोना संकट के मौजूदा दौर में ग्रामीण और शहरी इलाकों का अंतर साफ साफ देखने को मिल रहा है। ग्रामीण भारत में कोरोना संक्रमण से लोगों की मौत की भयावह तस्वीर के पीछे का सच यही है।

शहरों में केन्द्रित हैं हेल्थकेयर वर्कर
देश के विभिन्न राज्यों में हेल्थ केयर वर्कर  की संख्या अलग-अलग है, लेकिन यह मुख्य रूप से शहरी इलाकों में केंद्रित है। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्रायमरी हेल्थ सेंटरऔर सब सेंटर जैसे इलाके में हेल्थ केयर वर्कर बंटे हुए हैं। मेडिकल एजुकेशन एंड सपोर्ट मैन पावर पर बने एक ग्रुप की आज से 50 साल पहले की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं फिर भी बेहतर हालत में है। जैसे ही आप शहर छोड़ते हैं, आपको मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होती चली जाती है। देश के कई राज्यों में अब 50 साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।

बिहार में हेल्थकेयर वर्कर की सर्वाधिक कमी
देश के ग्रामीण इलाके में हेल्थ केयर वर्कर की कमी और लोगों की मौत के बढ़ते आंकड़ों के बीच सीधा संबंध है। साल 2019-20 के ग्रामीण हेल्थ स्टैटिसटिक्स के मुताबिक बिहार के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में एलोपैथिक डॉक्टर की 2384 वैकेंसी थी। डॉक्टर (Doctor) की वैकेंसी यह संख्या उत्तर प्रदेश में 819 और महाराष्ट्र में 739 थी। अगर बात सर्जन, ऑबस्ट्रेशियन और गायनी, फिजीशियन, पेडियाट्रिशियन आदि की करें तो यूपी के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर  में इनकी वैकेंसी 1355, ओड़िशा में 1169, मध्य प्रदेश में 986 और राजस्थान में 938 थी।

नर्स की भारी कमी
किसी भी हेल्थ केयर सिस्टम के बैकबोन के रूप में नर्स काम करती हैं। अगर पीएचसी (PHC) और सीएचसी (CHC) में नर्सिंग स्टाफ की कमी की बात करें तो उत्तर प्रदेश इस मामले में शीर्ष पर है। यहां 2349 नर्स की जरूरत है। बिहार में 2248 और राजस्थान में 2236 नर्स की वैकेंसी है। स्वास्थ्य राज्यों का विषय है, लेकिन हाल में भारत सरकार ने हेल्थ केयर वर्कर्स की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

केंद्र सरकार कर रही है मदद
भारत सरकार ने जून 2020 में राज्यों को 2206 स्पेशलिस्ट, 4685 मेडिकल ऑफिसर और 25,600 नर्स की भर्ती के लिए ₹15,000 करोड़ की अतिरिक्त मदद उपलब्ध कराई है। इसके साथ ही चिंता हेल्थ केयर (healthcare) सुविधा की गुणवत्ता को भी लेकर है। हेल्थ केयर सुविधाएं देने वाले संस्थान का गुणवत्ता के साथ कोई संबंध नहीं है। देश के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी हेल्थ केयर (PHC) निजी सेक्टर के भरोसे है। जब भी डॉक्टर (Doctor) की विजिट होती है तो फर्स्ट पॉइंट के रूप में उन्हें अकुशल हेल्थ केयर प्रोवाइडर मिलते हैं।

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