वह शिक्षामंत्री जिसने किताबों में ‘ग’ से ‘गणेश’ की जगह ‘ग’ से ‘गदहा’ कराया

भोपाल/जयपुर

आजादी के बाद ना जाने कितनी बार अलग-अलग राज्यों में सिलेबस की किताबों में प्रकाशित किसी नाम, शख्सियत की कहानी, तस्वीर, शब्द आदि को लेकर विवाद होते रहे हैं। अब ताजा मामला राजस्थान का है। यहां (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की क्लास एक की हिंदी की किताब में दी गई एक कविता पर विवाद हो गया है। कविता की लाइन ‘छह साल की छोकरी, भरकर लाई टोकरी, टोकरी में आम है, नहीं बताती दाम है। दिखा दिखाकर टोकरी हमें बुलाती छोकरी’को लेकर विवाद है। राजस्थान बाल आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए इस पर आपत्ति जताई है। साथ ही एनसीईआरटी को इसे हटाने के लिए परिषद को पत्र लिखा है। आयोग ने भी इसमें छोकरी सब्द को अनुचित शब्द मानते हुए संज्ञान लिया है। बाल आयोग के अनुसार यह शब्द अनुचित होने के साथ ही बाल श्रम की अभिव्यक्ति है।

किसने कराया ‘ग’ से ‘गदहा’
इस विवाद पर NCERT क्या फैसला लेती है यह तो देखना होगा लेकिन इस मौके पर आपको आजादी के बाद देश में शुरू हुए ऐसे ही पहले विवाद के बारे में बता रहे हैं। आजाद भारत में पहला मौका था जब किसी राज्य के शिक्षामंत्री ने पद संभालते ही बच्चों की किताबों में ‘ग’ से ‘गणेश’ की बजाय ‘ग’ से ‘गदहा’ प्रकाशित करवाया था। अब आप सोच रहे होंगे कि जब शुरुआत से ही बच्चों को ‘ग’ से गणेश पढ़ाया जा रहा था तो उसे ‘गदहा’ करने की क्या जरूरत थी। आइए जरा उस शिक्षामंत्री और ‘ग’ से ‘गणेश’ से ‘ग’ से ‘गदहा’ होने की पूरी कहानी जानते हैं।

मध्य प्रदेश में पहली बार हुआ ‘ग’ से गदहा
भारत के नौवें राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा को तो हम सभी जानते हैं। आजादी के बाद 1952 में वे कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर भोपाल के मुख्यमंत्री बनाए गए। हालांकि एक नंवबर 1956 को जब मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ तो इसी में भोपाल राज्य का विलय हो गया। इसके बाद बनी सरकारों में शंकर दयाल शर्मा को बतौर मंत्री शामिल किया गया। मध्य प्रदेश की सरकार में शंकर दयाल शर्मा को शिक्षामंत्री बनाया गया था। भोपाल के सीएम का पद संभालने के चलते शंकर दयाल का स्वभाव सेक्युलर था। क्योंकि भोपाल राज्य की अच्छी खासी आबादी मुस्लिमों की थी।

सेक्युलरिज्म दिखाने के लिए ‘ग’ से गदहा किया गया
बताया जाता है कि शंकर दयाल शर्मा अपनी शासन शैली में भी सेक्युलरिज्म दर्शाने की पूरी कोशिश करते थे। नए मध्य प्रदेश का शिक्षामंत्री बनते ही उन्होंने बच्चों की पाठ्य पुस्तक में ‘ग’ से गणेश शब्द हटवा दिया था। इसकी जगह उन्होंने ‘ग’ से गदहा करवा दिया था। कहा जाता है कि शंकर दयाल मानते थे कि सेक्युलर देश में बच्चे जब बचपन से ही पाठ्य पुस्तक में गणेश शब्द पढ़ेंगे तो उनका स्वभाव शायद सेक्युलर ना रहे। उस वक्त शंकर दयाल शर्मा के इस फैसले का हिंदूमहासभा और जनसंघ के लोगों ने काफी विरोध किया था, लेकिन कांग्रेस की मजबूत सरकार होने के चलते यह मुद्दा दब गया था।

अंग्रेजीजदां थे शंकर दयाल शर्मा
शंकर दयाल शर्मा काफी अच्छी अंग्रेजी बोलते थे। एक बार मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के दौरान उन्होंने इतनी ज्यादा अंग्रेजी बोली की सदन के सदस्यों को इसपर आपत्ति जतानी पड़ी। इसके बाद उन्होंने सदन में हिंदी के वाक्य कुछ इस प्रकार कहा-‘ हम अपने स्टूडेंट्स को जो स्पेशलाइज्ड एजुकेशन इम्पार्ट करना चाहते हैं उसके सब्जेक्ट्स फुल्ली अंडरस्टैंड किए बिना एक्सप्लेन कैसे किया जा सकता है।’ शंकर दयाल शर्मा की ऐसी हिंदी को सुनकर सदन के कई सदस्य परेशान रहते थे, क्योंकि उन्हें शिक्षामंत्री की कही बातें ज्यादातर समझ में नहीं आती थी।

इंदिरा गांधी के करीबी थे शंकर दयाल शर्मा
शंकर दयाल शर्मा के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी लाइफस्टाइल में अंग्रेजीजदां रखने के शौकीन थे। माना जाता है कि बतौर शिक्षामंत्री उनपर उठने वाले सवालों को देखते हुए साल 1967 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन सीएम द्वारका प्रसाद मिश्र ने उन्हें उद्योग मंत्री बनाया था। बाद में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनने का भी मौका मिला। इंदिरा गांधी के पक्के सपोर्टर माने जाने वाले शंकर दयाल शर्मा को केंद्र में मंत्री और फिर राष्ट्रपति पद को शुशोभित किया।

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