दिल्ली को तीसरी लहर से बचना है तो करना होगा ये काम, एक्सपर्ट ने दिए सुझाव

नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस की रफ्तार कमजोर होती जा रही है। रविवार को दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 946 नए मामले आए, जो 22 मार्च के बाद सबसे कम आंकड़ा है। वहीं 78 मरीजों की मौत हुईं। यह 12 अप्रैल के बाद मौत का सबसे कम आंकड़ा है। दिल्ली में पॉजटिविटी रेट घटकर 1.25 फीसदी हो गई है। दो महीने के डरावने समय जिसमें लाखों लोग संक्रमित हुए और हजारों की मौत हो गई, लोगों को लग रहा है कि महामारी अब घट रही है।

अधिक टेस्ट किए जाने की है जरूरत
हालांकि, हाल के अनुभव से पता चला है कि यह विशेष रूप से कोरोनावायरस अप्रत्याशित है। ऐसे में कोरोना टेस्ट को लेकर आत्मसंतुष्ट होने के बजाय, पहले से कहीं अधिक टेस्ट किए जाने की जरूरत है। इनमें विशेष रूप से बच्चों की टेस्टिंग शामिल है, जिनके लिए देश में अभी कोरोना वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

बच्चों की भी हो कोरोना जांच
कंसल्टेंट माइक्रोबायोलॉजिस्ट और डॉ डांग्स लैब्स के संस्थापक डॉ नवीन डांग ने अफसोस जताया कि संक्रमण में गिरावट के साथ, लोग फिर से संतुष्ट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही दूसरी लहर आने से ठीक पहले हुआ था। डांग ने संक्रमित व्यक्तियों के साथ कॉन्टेक्ट हिस्ट्री वाले लोगों और बच्चों के कोविड टेस्ट की वकालत की। उन्होंने कहा कि लोगों को लग रहा है कि मामले घट रहे हैं, इसलिए उन्हें टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं है। डॉ. डांग का कहना है कि मौजूदा वर्तमान लहर के पीक के दौरान लगाई गई सख्ती को अभी भी बनाए रखा जाना चाहिए।” उन्होंने सभी को टीकाकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

…तो शायद तीसरी लहर नहीं आ सकती
डॉ सुनीला गर्ग, कम्युनिटी मेडिसीन की डायरेक्टर-प्रोफेसर, मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज, और वैक्सीनेशन टास्क फोर्स की मेंबर, ने कहा कि अगर देश अपनी रणनीति में पहले से सजग रहे तो अपेक्षित तीसरी लहर नहीं आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह तैयारियों की बात है। प्रत्येक कोविड-पॉजिटिव व्यक्ति के एवरेज 30 कॉन्टेक्ट का टेस्ट किया जाना चाहिए, ”उसने कहा।

लोगों को टेस्ट कराने के लिए करना होगा प्रोत्साहित
सर गंगा राम अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनिल गोगिया ने भी टेस्टिंग को लेकर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि हमारे पास मामलों के बढ़ने को लेकर पूर्वानुमान लगाने का कोई तरीका होना चाहिए। साथ ही जरूरी मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके टेस्टिंग को तेज करना चाहिए।।” उन्होंने कहा कि टेस्ट की रिपोर्ट तेजी से या जल्द से जल्द आनी चाहिए। इसके अलावा टेस्ट कराने में हिचकने वाले लोगों को भी टेस्ट कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

कोरोना पीक तो टेस्टिंग में हुई कमी
दिल्ली के हेल्थ केयर सिस्टम के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण मौका है, जो संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक्सपर्ट तीसरी लहर का अंदेशा जता रहे हैं। दिल्ली में एक सरकारी अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया कि जब दिल्ली में कोरोना पीक पर था, तब टेस्टिंग में कमी देखने को मिली। इसकी वजह थी कि कोरोना की जांच करने वाले कर्मचारी ही खुद कोरोना संक्रमित हो गए थे। एक प्रमुख लैब जो रोजाना हजारों सैंपल की टेस्टिंग करती है, ने बताया कि उसके 40 परसेंट कर्मचारी कोरोना संक्रमण की चपेट में थे। इससे उनकी टेस्टिंग क्षमता पर प्रभाव पड़ा।

दिल्ली में कुछ इस तरह घटी टेस्टिंग
आंकड़े बताते हैं कि 11 अप्रैल को 1,14,288 कोविड टेस्ट किए गए। इसमें 76,954 आरटी-पीसीआर टेस्ट और 37,334 रैपिड एंटीजन टेस्ट शामिल थे। इसमें पॉजिटिविटी रेट 9.4% रही। 20 अप्रैल को, जब शहर ने नए मामलों में एक दिन में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, तब केवल 86,526 टेस्ट किए गए थे। इनमें 28,395 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 11 मई को 70,276 सैंपल प्रोसेस किए गए और 20 मई को सिर्फ 58,744 सैंपल लिए गए।

डेली केस 50 दिन में सबसे कम
देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 1,52,734 नए मामले सामने आए। ये पिछले 50 दिन में सबसे कम डेली केस हैं। नए मामलों के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 2,80,47,534 हुई। इस दौरान 3,128 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 3,29,100 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना से ठीक होने की दर बढ़कर 91.60% हो गई है। साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट 9.04% और दैनिक पॉजिटिविटी रेट 9.07% है जो लगातार 7 दिनों से 10% से कम है।

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