ना मोदी ना शाह…सिर्फ वसुंधरा राजे के पोस्टर के जरिए गरीबों को खाना, क्या हैं मायने?

जयपुर,

राजस्थान में कोरोना की स्थिति जरूर काबू में आती दिख रही है, लेकिन राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है. कांग्रेस को सत्ता गंवाने के बाद से ही राजस्थान बीजेपी अंदरूनी कलह की शिकार है.पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के समर्थक लगातार अपने नेता को आगे करने की कोशिश में दिख रहे हैं, वहीं दूसरा तबका अभी भी उनके नेतृत्व को नकार रहा है. ताजा मामला वसुंधरा रसोई को लेकर है जिसके जरिए कोरोना काल में गरीबों को खाना खिलाया जा रहा है. उन्हें फूड पैकेट बांटे जा रहे हैं.

राजस्थान में वसुंधरा गुट बनाम बीजेपी?
अब हैरानी की बात ये है कि इस वसुंधरा रसोई के जरिए फूड पैकेट तो बंट रहे हैं, लेकिन बड़ा राजनीतिक संदेश देने की भी कवायद है. वसुंधरा रसोई के जो पोस्टर तैयार किए गए हैं, उनमें सिर्फ वसुंधरा राजे की ही तस्वीर देखने को मिल रही है.

ना पीएम मोदी को जगह दी गई है और ना ही अमित शाह को. अब 2014 के बाद से ऐसा कम ही देखने को मिला है कि बीजेपी का कोई मिशन शुरू हो और उसमें पीएम के चेहरे का इस्तेमाल ना हो. लेकिन राजस्थान में अलग ही सियासत देखने को मिल रही है. यहां पर वसुंधरा राजे को सबसे बड़ा नेता दिखाने की कोशिश हो रही है.

पोस्टर में वसुंधरा, मोदी-शाह गायब
अब वसुंधरा राजे की छवि को चमकाने का काम जयपुर में सुरेश पटौदिया और विधायक कालीचरण सर्राफ़ जैसे नेता कर रहे हैं तो वहीं कोटा के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल भी अपने स्तर पर काम करने में लगे हुए हैं. सभी गरीबों में फूड पैकेट बांट रहे हैं और वसुंधरा राजे का प्रचार हो रहा है. वैसे दिलचस्प बात तो ये भी है कि राजस्थान में बीजेपी ने अपनी तरफ से पहले ही राहत कार्य चला रखा है.

लोगों की हर तरह की मदद भी की जा रही है, लेकिन वहां पर वसुंधरा समर्थक नदारद हैं. उन्होंने अभी तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई है. ऐसे में सवाल तो उठता है कि क्या राजस्थान में वसुंधरा राजे अपनी राजनीतिक दिशा बदलने की तैयारी कर रही हैं? अटकलें तमाम तरह की लगाई जा रही हैं, लेकिन बीजेपी नेता अभी के लिए इन्हें नकार रहे हैं.

दलील दी जा रही है कि राहत पहुंचाने का काम किसी भी मंच पर हो इसमें राजनीति नहीं देखनी चाहिए. लेकिन इन दलीलों के बीच जानकारी मिली है कि सभी जिलों में वसुंधरा समर्थकों के पास फ़ोन पहुंच रहे हैं कि वसुंधरा रसोई के नाम से गरीबों को खाना पहुंचाया जाए. अब अगर ऐसा हो रहा है, तो इस सियासत में अभी कई और नाटकीय मोड़ आने वाले हैं.

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