अपना दल(एस) को साधने में जुटी सपा, अनुप्रिया पटेल-अखिलेश आएंगे साथ?

लखनऊ ,

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी समीकरण और राजनीतिक गठजोड़ बनाए जाने लगे हैं. सत्ताधारी बीजेपी को मात देने के लिए समाजवादी पार्टी इस बार छोटे-छोटे दलों को मिलकर एक मजबूत गठबंधन मनाने में जुटी है. इस कड़ी में सपा की नजर अनुप्रिया पटेल के अपना दल (सोनेलाल) पर है, जिसे वह अपने गठबंधन का हिस्सा बनाने के लिए साधने की कोशिश में है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अनुप्रिया पटेल बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए का साथ छोड़कर अखिलेश यादव के साथ हाथ मिलाने को तैयार होंगी?

केंद्र की मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनुप्रिया पटेल को केंद्रीय कैबिनेट में जगह नहीं मिली जबकि पिछले कार्यकाल में वह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री रही थीं. वहीं, अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल जो अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के एमएलसी भी है, लेकिन उन्हें योगी सरकार के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है. केंद्र की मोदी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं जबकि यूपी सरकार के कार्यकाल में महज 8 महीने का समय बाकी है.

हालांकि, अपना दल (एस) शुरू से ही उम्मीद कर रही थी कि केंद्र या उत्तर प्रदेश में से कहीं भी मंत्रिमंडल में पति और पत्नी में से किसी एक या फिर दोनों को जगह जरूर मिलेगी. लेकिन, न तो केंद्र और न ही यूपी में दोनों में से किसी एक भी जगह नहीं मिली. ऐसे में अनुप्रिया पटेल की नाराजगी जाहिर है.

सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी अब अनुप्रिया पटेल की अपना दल (सोनेलाल) को भी अपने गठबंधन का हिस्सा बनाना चाहती है. लगातार सपा की तरफ से अनुप्रिया पटेल को साधने की कोशिश की जा रही है, लेकिन दोनों ही पार्टी अभी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं.

हालांकि, आधिकारिक तौर पर अनुप्रिया पटेल की पार्टी का मत यही है कि वह बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं. लेकिन, जैसे-जैसे 2022 के चुनाव की सियासी तपिश बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे पार्टी के भीतर भी बेचैनी बढ़ रही है. पूर्वांचल में अपना दल का सियासी असर कुर्मी वोटरों में है, जिसे देखते हुए सपा उसे अपने खेमे में मिलाना चाहती है.

अपना दल (एस) के एक बड़े नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर ने आजतक को बताया, ‘अगर यूं ही बीजेपी हमें हाशिए पर धकेलने की कोशिश करती रही तो हम भी पार्टी के वजूद को बचाने के लिए अपना नया रास्ता तलाश सकते हैं.’ मौके की सियासी नजाकत को देखते हुए अपना दल (एस) ने बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है.

अपना दल (एस) का वोट बैंक सपा से मुकाबले बसपा के ज्यादा करीब रहा है. सोनेलाल पटेल खुद भी बसपा के बड़े नेता थे बाद में उन्होंने अलग पार्टी बनाई थी. पिछले दिनों अनुप्रिया पटेल ने फिल्म अभिनेता रणदीप हुडा के बसपा प्रमुख मायावती पर की टिप्पणी के मामले में मायावती के समर्थन में ट्वीट किया था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से रणदीप हुड्डा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. हालांकि, इस ट्वीट का कोई सियासी कनेक्शन नहीं कहा जा सकता, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह पहला ऐसा ट्वीट है जो अनुप्रिया पटेल और बसपा के बीच की कड़ी को जोड़ता दिखाई देता है.

दरअसल, यूपी में ऐसी भी चर्चा चल रही है कि बसपा मायावती भी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा गठबंधन बना सकती है. हालांकि आधिकारिक तौर पर मायावती साफ कह चुकी हैं कि वह किसी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगी बल्कि अकेले चुनावी मैदान में उतरेंगी. इसके बावजूद राजनीति संभावनाओं का खेल है और कब कौन क्या सियासी कदम उठा ले यह कहा नहीं जा सकता है.

मिर्जापुर से सांसद और पार्टी का चेहरा अनुप्रिया पटेल की नजर अब उत्तर प्रदेश और केंद्र में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल पर है. ऐसे में अगर बीजेपी दोबारा से अनुप्रिया पटेल और उनकी पार्टी को तवज्जो देती है तब शायद इन अटकलों पर विराम लग जाए, लेकिन अगर मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं मिली और विपक्ष सूबे में मजबूत खेमेबंदी करता है तो अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना रास्ता देख सकती हैं.

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