गुजरात नहीं यूपी की है सबसे अधिक चिंता, कोरोना काल में बीजेपी अब ऐसे जुट गई डैमेज कंट्रोल में

नई दिल्ली

कोरोना की दूसरी लहर में एक ओर जहां मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष की ओर से केंद्र पर हमला भी तेज होता जा रहा था। कोरोना के बढ़ते केस के बाद जिस प्रकार से हॉस्पिटल में बेड न मिलने, ऑक्सिजन की कमी के चलते किसी अपने को खोने, दवाई के लिए दर दर भटकने के बाद लोग केंद्र और राज्य सरकारों की व्यवस्था को लेकर नाराज हुए। मोदी सरकार के 7 साल के कार्यकाल में पहली बार इस प्रकार की चुनौती सामने आई है। अगले साल यूपी समते कई राज्यों में चुनाव है और कहीं न कहीं बीजेपी को चिंता चुनावी राज्यों खासकर यूपी की है। यही वजह है कि बीजेपी डैमेज कंट्रोल में अब से ही जुट गई है।

यूपी समेत इन पांच राज्यों में चुनाव
अगले साल फरवरी – मार्च में यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव है और इसमें देश का सबसे बड़ा प्रदेश यूपी भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही नहीं पूरे बीजेपी के लिए यूपी का चुनाव कई मायनों में अहम है। जिन पांच राज्यों में चुनाव है उसमें यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल है। बीजेपी के लिए सबसे अहम है यूपी का चुनाव। सबसे अधिक सीटों के साथ यहां की जीत के अलग ही मायने हैं। चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले कोरोना से जो हालात पैदा हुए उसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय बीजेपी नेतृत्व भी गंभीर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक के बाद एक कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और कोरोना पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने की कोशिश भी जारी है।

दिल्ली में मंथन और यूपी में चला यह अभियान
यूपी पंचायत में औसत प्रदर्शन और बंगाल चुनाव में हार के बाद बीजेपी बेहद सतर्क हो गई है। पिछले दिनों संघ और बीजेपी के बड़े नेताओं की दिल्ली में बैठक हुई जिसमें यूपी के सियासी हालात और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। वहीं योगी सरकार शहर से लेकर गांवों तक कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए तेजी से कार्य कर रही है। गांव-गांव में निगरानी समितियों का गठन किया गया है और ग्राम प्रधान व निगरानी समिति के सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है।

कैबिनेट विस्तार की चर्चा और विधायकों को संदेश
बीते कई दिनों से यूपी में कैबिनेट विस्तार और बीजेपी संगठन में बदलाव की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। 2017 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पहली बार प्रदेश में इस तरह की चर्चा हो रही है। इस बीच पिछले दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष लखनऊ पहुंचे और मंत्रियों व पार्टी नेताओं के साथ एक-एक करके बैठक की। इसके बाद उन्होंने सीएम आवास में योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की।

पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने सरकार के मंत्रियों, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से कोरोना काल में किए काम का फीडबैक लिया। कोरोना काल में कई सारी दिक्कतों से जनता में नाराजगी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कहा कि मंत्री, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कोरोना पीड़ितों के घर जाएं, उनसे मिलें, विश्वास दिलाएं कि बीजेपी और सरकार उनके साथ खड़ी है, अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो तत्काल उसका समाधान किया जाए।

बिहार में नेताओं का दौरा तेज
कोरोना से जो हालात बिहार में पैदा हुए उसको लेकर बिहार की एनडीए सरकार पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बीजेपी सांसद से जुड़े एंबुलेंस का मामला हो या हॉस्पिटल की बदहाली। लोगों के सवाल और कोरोना के हालात के बीच अब राज्य के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों का दौरा शुरू कर दिए हैं। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अपने संसदीय क्षेत्र पटना पहुंचे। दूसरे सांसद और मंत्री भी अपने इलाकों में जा रहे हैं। कहीं न कहीं यह संदेश देने की कोशिश है कि कोरोना काल में भी हम जनता के साथ और उनके बीच ही हैं।

गुजरात नहीं इस चुनाव से मिलेगा जवाब
अगले ही साल नवंबर और दिसंबर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश का भी चुनाव है। फिलहाल बीजेपी इन दो राज्यों को बारे में नहीं सोच रही है उसका पूरा फोकस यूपी पर ही है। यूपी की हार- जीत का असर काफी अधिक होगा। बीजेपी यूपी का चुनाव जीत जाती है तो वो एक साथ कई सवालों का जवाब देने में कामयाब हो जाएगी। वहीं यदि पार्टी चुनाव हार जाती है तो विपक्षी दलों की ओर से हमला और तेज होगा और इसे लोगों का गुस्सा बताया जाएगा। इसके बाद के चुनावी राज्य और 2024 के लोकसभा चुनाव पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। यही कारण है कि बीजेपी अभी से ही डैमेज कंट्रोल में जुट गई है और पूरी कोशिश है कि यह संदेश कतई लोगों के बीच न जाए कि कोरोना से निपटने में योगी- मोदी विफल रहे।

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