बंगाल में क्या ये बड़े नेता भी छोड़ने वाले हैं बीजेपी, टीएमसी से आए नेता घर वापसी को बेकरार

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल में चुनाव के वक्त तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामा। लेकिन अब बीजेपी की हार के बाद इनमें से कई घर वापसी को बेकरार हैं। चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी के सीनियर नेता और मेघालय-त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने यह आशंका जताई भी थी, साथ ही बीजेपी के चार नेताओं पर कई आरोप जड़े थे। तथागत रॉय ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि मेरी आशंका सही साबित हुई है, मुझे लगता है कि तृणमूल से आए अधिकांश लोग वापस चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं जल्द ही दिल्ली आकर सीनियर लीडरशिप को उन नेताओं की अक्षमता की पूरी रिपोर्ट दूंगा जो चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

टीएमसी में वापस जा सकते हैं कई विधायक और सांसद
चुनाव में बीजेपी की हार के बाद से बीजेपी में उथल पुथल मची है। तृणमूल कांग्रेस से आए कई लोग अब वापस जाने की राह तलाश रहे हैं। पूर्व विधायक सोनाली गुहा, फुटबॉलर से पॉलिटिशियन बने दिपेदु विश्वास ने फिर से तृणमूल से शामिल होने की इच्छा जताई है। इनके अलावा भी कई नाम चल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी के करीब 8 जीते हुए विधायक और बीजेपी के कुछ सांसद भी तृणमूल में वापस आना चाहते हैं। इनमें मुकुल रॉय का नाम भी चर्चा में है।

जीत जाते तो ठीक, अब लग रहा गड़बड़
तृणमूल कांग्रेस से आए लोगों के वापस जाने के मसले पर बीजेपी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि लोकतंत्र में यह चलता रहता है। कुछ लोग आते हैं और फिर हारने के बाद चले जाते हैं। कुछ को अपनी सिक्योरिटी की भी चिंता है और वह राज्य में हिंसा की राजनीति से डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी बढ़ाने के लिए नए लोगों को पार्टी में लेना पड़ता है। वह जीत जाते तो ठीक था, जीत नहीं पाए तो उन्हें लग रहा है कि गड़बड़ हो गई। घोष ने कहा कि हमारी पार्टी अनुशासित और विचारधारा आधारित पार्टी है। ऐसे में कई लोगों को दिक्कत होती है।

दिल्ली आकर अब होगी बात
तथागत रॉय ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि जैसे ही हालात बनेंगे मैं दिल्ली आकर सीनियर लीडरशिप से मिलूंगा। उन्होंने कुछ वक्त पहले जब ट्वीट कर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, शिव प्रकाश और अरविंद मेनन पर कई आरोप लगाए थे। उसके बाद उन्हें दिल्ली तलब किया गया था। बीजेपी के विधानसभा में नंबर बढ़े दिख रहे हैं लेकिन असल में यह बढ़े नहीं हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 18 सीटें मिली थी, इससे 126 विधानसभा सीटें बनती हैं। लेकिन 126 सीट की बजाय सिर्फ 77 सीट पर ही जीत मिली

आपने जो सवाल चुनाव में हार के बाद उठाए, क्या वह चुनाव के दौरान भी पार्टी के भीतर उठाए गए थे? यह पूछने पर रॉय ने कहा कि मैंने पार्टी के भीतर भी बात की थी। उसके बाद ही मैंने पब्लिक डोमेन में लिखा। क्या आप अभी पार्टी में एक्टिव हैं? तथागत रॉय ने कहा कि अगर एक्टिव नहीं होता तो ट्वीट नहीं करता। अभी लॉकडाउन की वजह से यहां कोई एक्टिविटी नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में राज्य में जिन लोगों के हाथ में पार्टी की कमान थी वह असक्षम थे।

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