क्या फिर कोई हिमाकत करेगा चीन? पूर्वी लद्दाख के करीब ले आया 22 फाइटर जेट

नई दिल्ली

पूर्वी लद्दाख में पिछले एक साल से से ज्यादा वक्त से भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव जारी है। तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार हो रही कोशिशों के बीच चीन ने हाल ही में एलएसी के उस पार एक बड़ा हवाई सैन्य अभ्यास किया है। चीन की एयर फोर्स ने पूर्वी लद्दाख के उस पार एलएसी के काफी नजदीक एक बड़ा हवाई अभ्यास किया है।

रक्षा से जुड़े सूत्रों न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के उस पार चीन के 21-22 लड़ाकू विमानों ने अभ्यास किया है। इनमें मुख्य तौर पर J-11 फाइटर जेट्स शामिल थे जो रूसी लड़ाकू विमान Su-27 की नकल हैं। कुछ J-16 लड़ाकू विमान भी एक्सर्साइज में शामिल रहे।’ सूत्रों ने बताया कि हाल में हुए इस अभ्यास पर भारत ने काफी करीब से नजर रखा हुआ था।

चीन ने इस एक्सर्साइज को होटन, गार गुंसा और काशगर समेत कुछ एयरफील्ड्स से अंजाम दिया जिन्हें हाल ही में अपग्रेड किया गया है। पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद चीन ने एलएसी से सटे अपने सैन्य हवाई अड्डों को अपग्रेड किया है। सूत्रों के मुताबिक, किस हवाई अड्डे पर कितने लड़ाकू विमान मौजूद हैं, इसको छिपाने के लिए चीन ने कंक्रीट के स्ट्रक्चर खड़े किए हैं।

सूत्रों ने बताया कि अभ्यास के दौरान चीन के लड़ाकू विमान उसी के क्षेत्र में बने रहे। पिछले साल से भारतीय लड़ाकू विमानों की भी लद्दाख क्षेत्र में गतिविधिया काफी बढ़ी हुई हैं। उन्होंने बताया, ‘इस साल गर्मियों में चीनी सेना और एयर फोर्स की तैनाती के बाद इंडियन एयरफोर्स भी नियमित तौर पर मिग-29 लड़ाकू विमानों की टुकड़ी को तैनात करती रही है।’

इंडियन एयर फोर्स भी नियमित तौर पर अपने सबसे विध्वंसक राफेल लड़ाकू विमानों को लद्दाख के आसमान में उड़ा रही है। राफेल लड़ाकू विमानों से एयर फोर्स की ताकत काफी बढ़ गई है। अब तक भारत को 24 राफेल लड़ाकू विमान मिल चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि चीन ने भले ही पैंगोंग झील इलाके से अपने सैनिकों को पीछे हटाया है लेकिन उसने HQ-9 और HQ-16 जैसे अपने एयर डिफेंस सिस्टमों को नहीं हटाया है जो लंबी दूरी से ही किसी लड़ाकू विमान को टारगेट कर सकते हैं।

शिनजियांग और तिब्बत रीजन में होटन, गार गुंसा, काशगर, हॉपिंग, ढोंका जोंग, लिंझी और पंगट एयरबेस के जरिए किए गए चीन के इस हवाई युद्ध अभ्यास पर भारत ने करीबी नजर रखी थी।

पिछले साल अप्रैल-मई में सैन्य तनाव के शुरुआती दौर में इंडियन एयरफोर्स ने Su-30 और मिग-29 को फॉरवर्ड एयर बेसों पर तैनात किया था। इन लड़ाकू विमानों ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में चीनी विमानों की तरफ से एयर स्पेस के उल्लंघन की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी।

लद्दाख रीजन में इंडियन एयरफोर्स को चीनी एयर फोर्स पर बढ़त हासिल है क्योंकि चीन के लड़ाकू विमानों को काफी ऊंचाई वाले एयर बेस से उड़ान भरना पड़ता है जबकि भारतीय लड़ाकू विमान मैदानी इलाकों से उड़ान भरकर तुरंत ही पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच सकते हैं। इंडियन एयरफोर्स जरूरत पड़ने पर देशभर में कहीं भी तेजी से अपने एयरक्राफ्ट स्क्वॉड्रन को तैनात कर सकती है और उसका बहुत ही प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल कर सकती है।

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