कोरोना फैलाने में पटना देश में 13वें नंबर पर, नई रिसर्च में किया गया बड़ा दावा…

पटना

बिहार में कोरोना संक्रमण की रफ्तार भले ही सुस्त हो गई हो लेकिन संकट अभी टला नहीं है। यही वजह है कि लोगों को लगातार जरूरी सावधानी अपनाने की अपील की जा रही है। इस बीच कोविड-19 समेत अन्य संक्रामक बीमारियों को फैलाने के मामले में बिहार की राजधानी पटना 13वें स्थान पर है। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (IISER), पुणे की ओर से सामने आई स्टडी में इस बात का दावा किया गया है। IISER ने इस संबंध में एक मैप तैयार किया है, जिसमें अलग-अलग नेटवर्क के जरिए कोरोना समेत संक्रामक रोगों को फैलाने में शहरों की स्थिति का जिक्र किया गया है।

446 भारतीय शहरों को लेकर IISER पुणे ने तैयार किया मैप
शोधकर्ताओं की एक टीम ने 1 लाख से अधिक आबादी वाले 446 भारतीय शहरों को लेकर यह मैप (नक्शा) तैयार किया है। इसमें इन शहरों से कैसे संक्रामक रोगों का प्रसार हो रहा, इसे समझने की कोशिश की गई। इस नक्शे को तैयार करने के लिए संस्थान ने इन शहरों के बीच हवाई, रेल और सड़क जैसे परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल किया। इसमें उन्होंने पाया कि अच्छी तरह से जुड़े परिवहन केंद्रों के जरिए इन शहरों से संक्रमण दूसरे जगहों तक पहुंच सकता है।

बिहार के 26 शहर स्टडी में शामिल, देखिए क्या रही उनकी रैंकिंग
बिहार के 26 शहरों को इस स्टडी में शामिल किया गया, जिसमें टॉप 100 की लिस्ट में 5 नाम शामिल थे। इनमें हवेली खड़गपुर 61वें, गया 66वें, मुजफ्फरपुर 73वें, भागलपुर 81वें और आरा 87वें स्थान पर रहा। छपरा, बक्सर, दानापुर, हाजीपुर, बेगूसराय, दरभंगा, कटिहार और किशनगंज को 101 और 200 के बीच रैंक मिली। वहीं सीवान, सासाराम, डेहरी और जमालपुर को 201 और 300 के बीच रैंकिंग में जगह मिली। 301 और 400, बिहार के छह शहर बगहा, बेतिया, मोतिहारी, पूर्णिया, जहानाबाद और सहरसा हैं। जहां तक संक्रामक रोग फैलाने की बात है, मुंगेर को राज्य में सबसे कम संवेदनशील शहर के रूप में 425वां स्थान मिला है।

इन शहरों ने बनाई टॉप 10 में जगह
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, लखनऊ, झांसी, पुणे और जयपुर ने टॉप 10 पर कब्जा जमाया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बिहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि गरीबों के रिवर्स माइग्रेशन से प्रदेश में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बरकरार है। विशेषज्ञों ने कोविड की तीसरी लहर की भविष्यवाणी की है। समय आ गया है कि राज्य सरकार लोगों की जान बचाने के लिए वैक्सीनेशन अभियान को तेज करे।

‘IISER की स्टडी एक वार्निंग सिग्नल की तरह’
डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि IISER अध्ययन एक वार्निंग सिग्नल की तरह है। जिसमें सूबे के लिए संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने का समय आ गया है। सार्वजनिक परिवहन में अभी भी स्वच्छता का स्तर नहीं है। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए, परिवहन केंद्रों पर फेस मास्क के लिए मुफ्त वेंडिंग मशीन स्थापित की जानी चाहिए। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए जागरूकता भी जरूरी है।

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