कॉर्पोरेट टैक्स की चोरी रोकने की G7 देशों की यह पहल हो सकेगी कामयाब?

नई दिल्ली

दुनिया में अमीर देशों के समूह ग्रुप-7 ने कम टैक्स वाले देशों में निवेशकों के जोर मारने का चलन कम करने के लिए एक नई पहल की है। जी 7 (G7) देशों ने अब एक ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाने की घोषणा की है जिसमें कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax) की कम से कम दर 15% रखी जाएगी। इसकी वजह से होने वाला अधिक मुनाफा देश की शीर्ष 100 कंपनियों में बांटा जाएगा। दुनिया के अमीर देशों का समूह कॉरपोरेट टैक्स के ग्लोबल फ्रेमवर्क पर सहमत हो गया है। इस पहल का उद्देश्य बड़ी कंपनियों द्वारा कम टैक्स वाले देशों में शेल कंपनी बनाकर अपनी टैक्स देनदारी कम करने से रोकना है।

निवेश आकर्षित करने में मदद
दुनिया के कई देशों का यह मानना है कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उन्हें टैक्स की दरें कम रखने से फायदा होता है। यह कदम हालांकि दुनिया की दिग्गज कंपनियों के हिसाब से टैक्स बचाने में काफी मददगार साबित होता है। इस वजह से बड़ी कंपनियां कम टैक्स ले इन देशों में अपनी इकाई शुरू करती हैं। सरकारी कंपनियों के इस चलन को बहुत दिनों तक इग्नोर नहीं कर सकती। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के एक रिसर्च पेपर का अनुमान है कि दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां टैक्स बचाने के लिए 12 लाख करोड डॉलर से अधिक रकम का टैक्स हैवन वाले देशों में निवेश करती हैं।

ग्लोबल टैक्स फ्रेमवर्क पर जून में चर्चा
जून में दुनिया के 140 देशों की इस बारे में एक मीटिंग होने वाली है। नए ग्लोबल टैक्स फ्रेमवर्क पर इस मीटिंग में चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही जी-20 देशों के समूह में इस तरह के नियम बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। ऑर्गेनाइजेशन आफ इकोनामिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट या ओईसीडी (OECD) बहुत लंबे समय से इस बात की कोशिश करता रहा है कि दुनिया के सभी देशों में एक जैसा टैक्स रेजीम हो।

अरबों के कारोबार पर जीरो टैक्स
इसकी वजह यह है कि डिजिटल एज कंपनियां (Digital Age companies) किसी एक देश में अरबों रुपये का कारोबार करती हैं और वहां कोई टैक्स नहीं चुकाती। अब तक दुनिया के कई देशों में इसका विरोध होता रहा है। अमेरिका दुनिया की डिजिटल कंपनियों (Digital company) का गढ़ है और वह इस तरह के सुधारों का विरोध करता है। भारत समेत कई देशों ने डिजिटल एमएनसी () पर टैक्स लगाने का प्रावधान शुरू किया है।यह टैक्स देश में उनकी कमाई के हिसाब से लगाए जाने की शुरुआत की गई है, इसमें उनके मुनाफे का कोई योगदान नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने दी थी धमकी
अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को इस बारे में धमकी दी थी और कहा था कि अन्य देशों को भी इस तरह की कवायद का परिणाम भुगतना पड़ सकता है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाईडेन ग्लोबल टैक्स रिफॉर्म (Global Tax Reforms) पर सहमत हो गए हैं। इससे 100 बड़ी कंपनियों पर काबू पाने में मदद मिलेगी।

मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स लागू करना मुश्किल
दुनिया के कई देश अपने यहां निवेश आकर्षित करने के लिए टैक्स छूट (tax concession) देते रहते हैं। इस वजह से मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स (MCT) की 15% की दर को लागू करना वास्तव में मुश्किल हो सकता है। इस समस्या का सबसे आसान समाधान यह है कि टैक्स छूट (tax concession) के अलावा अल्टरनेटिव मिनिमम टैक्स 15 परसेंट लगा दिया जाए। कोई भी देश जो राजनीतिक या सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए सोशल इंसेंटिव देना चाहता है, वह अपने बजट के प्रावधानों से ऐसा कर सकता है। इसके लिए उसे कंपनियों को टैक्स में छूट (tax concession) देने की जरूरत नहीं है।

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