पेट्रोल की जगह इथेनॉल के इस्तेमाल से हर लीटर पर बचेंगे 20 रुपये: नितिन गडकरी

नई दिल्ली,

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें जहां आम आदमी की जेब काटने में लगी हुई हैं. वहीं इसके बढ़ते आयात के बोझ ने सरकार को भी परेशान किया हुआ है. ऐसे में गाड़ियों में इथेनॉल या अन्य वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कहते हुए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इसके उपयोग से हर लीटर ईंधन पर 20 रुपये तक की बचत होगी.

‘ब्राजील, कनाडा, अमेरिका में 100% इथेनॉल का इस्तेमाल’
केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी की एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्सिबल-फ्यूल इंजन बनाती हैं. ये ग्राहक को ईंधन के तौर पर 100% पेट्रोल से या 100% बायो-इथेनॉल का इस्तेमाल करने का विकल्प देता है.

भारत बढ़ा रहा अपना इथेनॉल उत्पादन
इथेनॉल का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल कैसे लागत प्रभावी हो सकता है, ये बात समझाते हुए गडकरी ने कहा कि देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच भारत अपना इथेनॉल उत्पादन भी बढ़ा रहा है. हाल में सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने की समयसीमा को 2030 से घटाकर 2025 कर दिया. अभी देश में प्रति लीटर पेट्रोल में 8.5% इथेनॉल मिलता है.

उल्लेखनीय है कि मुंबई और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों के साथ-साथ देश के कई इलाकों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक महंगा हो चुका है. इसकी वजह पिछले छह हफ्तों में ईंधन की कीमत बढ़ना है. राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और लद्दाख जैसे राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक है.

4-5 साल में दोगुना हो जाएगा आयात का खर्च
नितिन गडकरी ने कहा कि देश ने इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने पर इसलिए भी ध्यान दिया है क्योंकि ये ईंधन आयात की लागत को कम करता है. आयात के विकल्प के लिए नीति की जरूरत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभी भारत हर साल 8 लाख करोड़ रुपये का कच्च तेल आयात करता है. अगले 4-5 साल में ये बढ़कर दोगुना हो जाएगा. ये सरकार के लिए भी चिंता की बात है और इसका अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा.

वैश्विक कीमतों से ज्यादा फसलों का MSP
गडकरी ने कहा कि देश में कई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अधिक है. इसलिए सरकार ने गन्ना, खाद्यान्न और मक्का से इथेनॉल के उत्पादन की अनुमति दी है. इतना ही नहीं सरकार की कोशिश अगले 5 साल में इथेनॉल इकोनॉमी को 2 लाख करोड़ रुपये का बनाने की है.

इथेनॉल से हर लीटर पर 20 रुपये की बचत
गडकरी ने पेट्रोल की जगह इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही. पेट्रोल की कीमतें जहां 100 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो गई हैं. वहीं इथेनॉल की कीमत 60 से 62 रुपये लीटर है. जहां तक बात इथेनॉल की कैलोरिक वैल्यू की है तो एक लीटर इथेनॉल करीब-करीब 750-800 मिली लीटर पेट्रोल के बराबर होता है. इस तरह ये ईंधन पर हर लीटर होने वाले खर्च में 20 रुपये की बचत देगा.

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