UP बीजेपी के उपाध्‍यक्ष बने पूर्व IAS एके शर्मा, पीएम मोदी के हैं करीबी

लखनऊ,

यूपी चुनाव से पहले बीजेपी ने पूर्व IAS एके शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी दे दी है. उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया है. उनकी नियुक्ति हैरान करने वाली है, लेकिन बीजेपी इसे रणनीति का हिस्सा बता रही है. उनके अलावा अर्चना मिश्रा और अमित वाल्मीकि को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. दोनों को प्रदेश मंत्री बना दिया गया है.

चुनाव से ठीक पहले एक पूर्व IAS को इतनी बड़ी जिम्मेदारी का मिलना मायने रखता है. ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने अपने ऐसे फैसलों से हैरान किया हो. लेकिन अगर एके शर्मा को ये जिम्मेदारी दी गई है, मतलब साफ है कि बीजेपी कुछ सियासी समीकरण साधने के प्रयास में है. वैसे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्तर देव की तरफ से विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की गई है.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने प्रांशुदत्त द्विवेदी (फर्रूखाबाद) को युवा मोर्चा, श्रीमती गीताशाक्य राज्यसभा सांसद (औरैया) को महिला मोर्चा, कामेश्वर सिंह (गोरखपुर) को किसान मोर्चा, नरेन्द्र कश्यप पूर्व सांसद (गाजियाबाद) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष घोषित किया है. इसके अलावा कौशल किशोर सांसद को अनुसूचित जाति मोर्चा, संजय गोण्ड (गोरखपुर) को अनुसूचित जनजाति मोर्चा व कुंवर बासित अली (मेरठ) को अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है.

वीआरएस लेकर आए थे बीजेपी में
गुजरात कैडर में 1988 बैच के आईएएस रहे अरविंद कुमार शर्मा ने इस साल जनवरी में लखनऊ में बीजेपी जॉइन की थी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई। अरविंद कुमार शर्मा पीएम मोदी के नजदीकी लोगों में शुमार हैं। वह एकाएक वीआरएस लेकर यूपी में एमएलसी चुनाव के बीच बीजेपी से जुड़े थे। उन्‍हें बीजेपी ने विधान परिषद का सदस्‍य बनाया।

मऊ के हैं शर्मा, मोदी संग किया लंबा काम
मूल रूप से मऊ निवासी अरविंद गुजरात में मोदी के सीएम रहते 2001 से 2013 के बीच सीएम कार्यालय में रहे। जब मोदी सीएम रहे तो वह उनके साथ सीएमओ में रहे। नरेंद्र मोदी पीएम बने तो अपने साथ अरविंद कुमार शर्मा को पीएमओ लेकर आ गए। 2014 में वह पीएमओ में संयुक्त सचिव के पद पर रहे। उसके बाद प्रमोशन पाकर सचिव बने।

डेप्युटी सीएम बनाए जाने तक की चर्चा
शर्मा के बीजेपी जॉइन करने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि उन्‍हें यूपी का डेप्‍युटी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, अब विधानसभा चुनाव में एक साल ही बचा है। यूपी के सियासी गणित के लिहाज से अरविंद न जातीय समीकरण पर फिट हैं, न उनकी कोई राजनीतिक जमीन है।

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