अडाणी खिसक कर आए अमीरों की लिस्ट में नंबर-3 पर, जानें- कैसे पिछड़े

कुछ अर्सा पहले तक अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी एशिया के अमीरों की लिस्ट में दूसरे पायदान पर थे। कयास थे कि जल्दी वो रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ देंगे। अलबत्ता शेयरों में जारी गिरावट से अंबानी और अडाणी के बीच का फासला 1.25 लाख करोड़ रुपए तक का हो गया है। एक समय तेजी से तरक्की की राह पर चलते जा रहे अडाणी 2021 में अब तक सबसे ज्यादा रकम गंवाने वाले बिजनेसमैन बन गए हैं।

ग्रुप के शेयरों में गिरावट से गौतम अडाणी की नेटवर्थ भी तेजी से घटी है। अब वे एशिया के तीसरे सबसे अमीर कारोबारी हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनर्स इंडेक्स के मुताबिक फिलहाल उनकी कुल संपत्ति 5.01 लाख करोड़ रुपए है। जबकि लिस्ट में मुकेश अंबानी सबसे ऊपर हैं। उनकी कुल संपत्ति 6.26 लाख करोड़ रुपए है। एशिया के अमीरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर वाटर किंग झोंग शानशान हैं। उनकी नेटवर्थ 5.14 लाख करोड़ रुपये है। खास बात है कि एशिया के टॉप पांच अमीरों की लिस्ट में अंबानी,अणानी के अलावा बाकी सभी चीनी कारोबारी हैं। चौथे नंबर पर मा हुआतेंग हैं। उनकी नेटवर्थ 4.42 लाख करोड़ रुपये है जबकि अलीबाबा के संस्थापक जैक मा 3.58 लाख करोड़ की नेटवर्थ के साथ 5वें नंबर पर हैं।

बीता सप्ताह अडाणी ग्रुप के लिए काफी बुरा रहा। इस दौरान ग्रुप की कंपनियों की शेयर वैल्यू 1.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा गिर गई। 14 जून को मार्केट खुलने से पहले खबर आई कि अडाणी ग्रुप की कंपनियों में तीन ऐसे विदेशी निवेशकों का निवेश है, जिनकी डीटेल डिपॉजिटरीज के पास भी नहीं है। हफ्तेभर में अडाणी पावर, अडाणी ट्रांसमिशन, अडाणी टोटल के शेयर सोमवार से शुक्रवार के बीच हर दिन 5% तक टूटे। यानी लोअर सर्किट लगा। इसी तरह अडाणी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में भी 14,17 और 18 जून को लोअर सर्किट लगा और शेयरों में इन 3 दिन 5% की गिरावट रही। ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर ने इसको ‘पूरी तरह गलत बताया है।

जिन विदेशी कंपनियों को फर्जी माना जा रहा है, वे अलबुला इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड हैं। नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुताबिक अडाणी की कंपनियों में इन कंपनियों का कुल निवेश 43,500 करोड़ है, लेकिन इनके बारे में सेबी के पास जानकारी नहीं है। साथ ही इन पैसों के मालिक का भी पता नहीं है। इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत इन पर कार्रवाई की गई है। ग्रुप में शामिल 6 कंपनियों का कुल मार्केट कैप 11 जून को मार्केट बंद होने पर 9 लाख 42 हजार 895 करोड़ रुपए रहा, जो 19 जून को क्लोजिंग के बाद 1 लाख 52 हजार घटकर 7 लाख 90 हजार 278 करोड़ रुपए हो गया।

सारे घटनाक्रमों से गुप की साख पर बट्टा लगा है। अब अडाणी की कंपनियों के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होंगे। हाल ही में देश में 6 एयरपोर्ट को 50 साल तक चलाने के लिए अडाणी ने टेंडर हासिल किया था पर पिछले 14 महीनों से कोरोना की वजह से ये कारोबार ठप है। आने वाले दिनों में भी इसके उठने के आसार नहीं हैं, क्योंकि आवाजाही एक तरह से प्रतिबंधित है। अडाणी का ऑस्ट्रेलिया में कोल माइंस का प्रोजेक्ट फंसा हुआ है। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि भारतीय स्टेट बैंक इसे कर्ज भी नहीं दे रहा है।

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