राफेल के साथ ‘जंग’ लड़ रहे पाकिस्‍तानी लड़ाकू विमान, भारत के लिए खतरे की घंटी!

अंकारा

भारतीय वायुसेना के राफेल विमानों से टक्‍कर लेने के लिए पाकिस्‍तान ने अब कमर कसनी शुरू कर दी है। पाकिस्‍तान के जेएफ-17 लड़ाकू विमान इन दिनों तुर्की में राफेल फाइटर जेट के साथ ‘जंग’ लड़ रहे हैं। ये राफेल फाइटर जेट कतर की वायुसेना के हैं जिसे उसने फ्रांस से खरीदा है। ये राफेल विमान इन दिनों तुर्की में चल रहे एक हवाई अभ्‍यास में हिस्‍सा ले रहे हैं। यही नहीं पाकिस्‍तान की वायुसेना मिग-29 लड़ाकू विमान के साथ भी जंग का अभ्‍यास कर रही है जो भारतीय वायुसेना की जान हैं।

पाकिस्‍तान के आका तुर्की में इन दिनों Anatolian Eagle 2021 युद्धाभ्‍यास चल रहा है। इसमें कतर के 4 राफेल फाइटर जेट, अजरबैजान के दो मिग-29 और पाकिस्‍तान के 5 जेएफ-17 लड़ाकू विमान हिस्‍सा ले रहे हैं। इस दौरान पाकिस्‍तानी वायुसेना के पायलट राफेल और मिग-29 दोनों से ही जंग का अभ्‍यास कर रहे हैं। इससे उन्‍हें दोनों ही विमानों के बारे में काफी महत्‍वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इन दोनों ही विमानों को भारतीय वायुसेना इस्‍तेमाल कर रही है। ऐसे में पाकिस्‍तानी पायलट अब दोनों ही फाइटर जेट से जंग का तरीका सीख सकते हैं। माना जा रहा है कि तुर्की भी इस पाकिस्‍तानी प्रयास में मदद कर रहा है।

सभी पायलट बिल्‍कुल युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्‍यास कर रहे
तुर्की की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह युद्धाभ्‍यास तीन जुलाई तक चलेगा। तुर्की का दावा है कि इस युद्धाभ्‍यास का मकसद एक-दूसरे से सीखना है। साथ ही एक-दूसरे को जानकारी, युद्धकौशल और अनुभवों को बांटना है। सभी पायलट इस अभ्‍यास के दौरान बिल्‍कुल युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्‍यास कर रहे हैं। ताकि प्रशिक्षण के स्‍तर को बढ़ाया जा सके। इस अभ्‍यास में बांग्‍लादेश, बेलारूस, बुल्‍गारिया, जार्जिया, इराक, स्‍वीडन, कोसोवो, मलेशिया, ओमान, जॉर्डन और जापान को पर्यवेक्षक देश का दर्जा हासिल है।

इससे पहले पाकिस्तानी पायलट्स को लड़ाकू विमान राफेल की ट्रेनिंग देने वाली खबर सामने आई थी लेकिन फ्रांस सरकार की तरफ से इसे फर्जी करार दिया गया था। एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया जा रहा था कि फ्रांस में पाकिस्तानी पायलट्स को राफेल जेट उड़ाने की ट्रेनिंग दी गई है। दरअसल खाड़ी देश कतर ने भी फ्रांस से राफेल विमान खरीदे थे। खबर आई थी कि पाकिस्तान के एक्सचेंज पायलट्स, जो कतर की वायुसेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, उन्हें फ्रांस में इसे उड़ाने की ट्रेनिंग दी गई थी। इससे इस बात की चर्चा शुरू हुई कि पाकिस्तान के फाइटर पायलट्स भारत के पायलट्स से पहले उसे उड़ाना सीख चुके हैं।

राफेल बनाम जेएफ-17, किसमें कितना है दम
पाकिस्‍तान की वायुसेना में JF-17 थंडर ब्‍लॉक-3 फाइटर जेट शामिल किए गए हैं। पाकिस्‍तान ने चीन की मदद से देश में ही इन नए लड़ाकू विमानों का निर्माण किया है। पाकिस्‍तान ने कहा है कि ये विमान लंबी दूरी तक निगरानी रखने में सक्षम अत्‍याधुनिक रेडार सिस्‍टम और हवाई हमला करने की ताकत से लैस हैं। पाकिस्‍तानी एयरफोर्स के चीफ मुजाहिद अनवर खान ने दावा किया कि ये विमान भारतीय वायुसेना के पाकिस्‍तानी एयर स्‍पेस का उल्‍लंघन करने पर जवाबी कार्रवाई करके युद्ध में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं।

पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान डेवलप किया है। यह मल्‍टी रोल एयरक्राफ्ट है जो हवा से हवा और हवा से जमीन में मार कर सकता है। चीन ने इसमें कुछ नई चीजें जोड़ी हैं जिसके बाद इसकी क्षमता बढ़ गई है। इसमें PF-15 मिसाइलें यूज होने लगी हैं जिसमें इन्‍फ्रारेड सिस्‍टम भी लगा है। इस मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है और यह सबसे अडवांस्‍ड मिसाइल्‍स में से एक है। जब PF-15 मिसाइलें इसमें जोड़ी गई थीं तो अमेरिका ने भी विरोध किया था। राफेल में यूज होने वाली मिसाइल्‍स की रेंज इससे कम है।

घातक मिसाइलों और बमों से लैस है राफेल फाइटर जेट
राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है। राफेल की रेंज 3,700 किलोमीटर है, यह अपने साथ चार मिसाइल ले जा सकता है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और ऊंचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विंगस्‍पैन सिर्फ 10.90 मीटर है जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मैनुवरिंग में आसानी होती है। भारत में राफेल बियांड विजुअल रेंज मिसाइल्‍स से लैस है। यानी बिना टारगेट प्‍लेन को देखते ही उसे उड़ाया जा सकता है। राफेल में ऐक्टिव रडार सीकर लगा है जिससे किसी भी मौसम में जेट ऑपरेट करने की सुविधा मिलती है। स्कैल्प मिसाइल या स्ट्रॉम शैडो जैसी मिसाइलें किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 560 किमी होती है। राफेल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है।

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