उमर बोले- सबसे पहले विश्वास बहाली हो, 5 अगस्त को नहीं मानते, पूर्ण राज्य का दर्जा मिले

नई दिल्ली,

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर गुरुवार को बैठक हुई, जोकि साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक चली. बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे पहले विश्वास बहाली होनी चाहिए. हम 5 अगस्त को नहीं मानते हैं. साथ ही, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री संग हुई बैठक से बाहर आने के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”5 अगस्त, 2019 को जो कुछ भी हुआ, उसे हम स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन हम कानून नहीं तोड़ेंगे. हम इसे कानूनी तरीके से लड़ेंगे. हमने प्रधानमंत्री को समझाने की कोशिश की है कि राज्य और केंद्र के बीच विश्वास हिल गया है. केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा लोगों को पसंद नहीं है. वे चाहते हैं कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए. जेके कैडर को बहाल किया जाना चाहिए. परिसीमन ने बहुत संदेह पैदा किया है, इसलिए फिर से देखने की जरूरत है.”

पीएम आवास पर हुई इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के कई पू्र्व मुख्यमंत्रियों समेत महत्वपूर्ण नेता शामिल हुए. बैठक में आठ दलों के 14 नेताओं को आमंत्रित किया गया था. पीएम मोदी के साथ बैठक में शामिल होने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद, बीजेपी के जम्मू-कश्मीर में प्रमुख रवींद्र रैना, कविंद्र गुप्ता आदि हैं.

बैठक में कांग्रेस ने की क्या मांग?
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक के दौरान पांच मांगें कीं. बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी ने सरकार से पांच मांगें उठाई हैं.

1- जम्मू और कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए. आजाद ने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने संसद में उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था. हमने सरकार से कहा कि अब इसके लिए अनुकूल स्थिति है.
2- कांग्रेस ने सरकार से जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव कराने की भी मांग की.
3- गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने मांग की कि कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए. आजाद ने कहा, “यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है.”
4- कांग्रेस ने मांग की कि सरकार को उन सभी सामाजिक और राजनीतिक बंदियों को रिहा करना चाहिए, जिन्हें 5 अगस्त, 2019 या उसके आसपास गिरफ्तार किया गया था.
5- इसके अलावा, कांग्रेस ने सरकार से जम्मू-कश्मीर में भूमि अधिकारों और नौकरियों पर गारंटी सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की.

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