J&K पर सर्वदलीय बैठकः जो कभी मोदी के लिए हुआ करते थे “गैंग”, वही बने गेस्ट

नई दिल्ली

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद पहली बार गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दिल्ली आवास पर जम्मू-कश्मीर के शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ एक बैठक की। इस बैठक में राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कुल 14 नेता शरीक हुए। बैठक में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह और एनएसए अजीत डोभाल में शामिल रहे।

इस बैठक में शामिल जम्मू-कश्मीर के नेताओं को कभी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुपकार ‘गैंग’ करार दिया था। आज वही नेता पीएम के ‘गेस्ट’ हैं। इतना ही नहीं आर्टिकल 370 हटने के बाद गुपकार गठबंधन के नेताओं को कई महीनों के लिए नजरबंद भी किया गया था। इसको लेकर नवंबर 2020 में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट भी किया था। जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ये नेता देश की भावना के खिलाफ चलते रहे तो इनकी लुटिया डूबनी तय है।

शाह ने ट्विटर पर गुपकार गठबंधन को ‘गुपकार गैंग’ कहते हुए लिखा था “गुपकार गैंग वाले ग्लोबल हो रहे हैं और ये गैंग जम्मू-कश्मीर में गैर मुल्की ताकतों का दखल चाहता है। गुपकार गैंग भारत के तिरंगे का अपमान करता है। क्‍या सोनिया जी और राहुल गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्‍हें देश की जनता के सामने अपना स्‍टैंड साफ करना चाहिए।”

वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुपकार गठबंधन पर चीन का साथ देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि, “इनका एक निश्चित एजेंडा है कि अनुच्छेद 370 को हटाया जाना रद्द होना चाहिए और उसे फिर से लागू किया जाना चाहिए। फारूक अब्दुल्ला जैसे कुछ लोग तो इस सीमा तक चले गए कि उन्होंने कहा है कि अनुच्छेद 370 को दोबारा लागू करवाने के लिए चीन की भी सहायता लेनी पड़े तो हम लेंगे।”

गुपकार गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, पीपल्स कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, सीपीआई (एम), पीपल्स यूनाइटेड फ्रंट, पैंथर्स पार्टी और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस शामिल हैं। पीएम के साथ हुए इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर पाकिस्तान से बात करने की बात कही है।

महबूबा ने कहा, ‘संविधान ने हमें जो अधिकार दिया है, जो हमसे छीना गया है। उसके अलावा भी जम्मू-कश्मीर में एक मसला है। अगर जम्मू-कश्मीर में अमन लाना है तो उन्हें जम्मू-कश्मीर में बातचीत करनी चाहिए और मुद्दों के समाधान के लिए पाकिस्तान के साथ भी बातचीत करनी चाहिए।

सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के 14 राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ साढ़े तीन घंटे की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने इसमें शामिल नेताओं को कश्मीर में हर मौत की घटना पर अपना व्यक्तिगत दुख व्यक्त किया, चाहे वह निर्दोष नागरिक की हो, किसी कश्मीरी लड़के की जिसने बंदूक उठाई थी या सुरक्षा बलों के किसी सदस्य की।

मोदी ने बैठक के बाद कई ट्वीट करके कहा कि विचार-विमर्श एक विकसित और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर की दिशा में चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम था, जहां सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है। परिसीमन तेज गति से होना है ताकि वहां चुनाव हो सकें और जम्मू-कश्मीर को एक निर्वाचित सरकार मिले जो जम्मू-कश्मीर के विकास को मजबूती दे।’’

मोदी ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है कि लोग एक मेज पर बैठकर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि लोगों, खासकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक नेतृत्व देना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हों।’’

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