US में बड़ा दावा: कोविड से मरने वालों में 98 फीसदी ने नहीं ली थी वैक्सीन

न्यूयॉर्क,

अमेरिका में अब सिर्फ उन्हीं लोगों की मौत हो रही है जो वैक्सीन से नहीं लगवा पाए या नहीं लगवा रहे हैं. तेजी से चलाई गए वैक्सीनेशन कार्यक्रम का सकारात्मक नतीजा ये रहा कि प्रतिदिन मौत की संख्या 300 से नीचे आ चुकी है. अगर जल्द ही सारे एलिजिबल लोग वैक्सीन लगवा लें तो यह आंकड़ा जीरो तक पहुंच सकता है. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने अमेरिकी सरकार के डेटा का विश्लेषण कर यह जानकारी निकाली है.

एपी ने मई के डेटा का एनालिसिस किया. कोविड-19 से संक्रमित और अस्पताल में भर्ती 8.53 लाख लोगों में से सिर्फ 1200 लोग ही दोबारा संक्रमित हुए. जबकि इन सभी लोगों ने अस्पताल से निकलने के बाद वैक्सीनेशन करवा लिया था. यानी वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण का दर 0.1 फीसदी ही है. वहीं, मई महीने में कोविड-19 से मारे गए 18 हजार लोगों में से वैक्सीनेशन के बाद मरने वाले सिर्फ 150 लोग थे, यानी वैक्सीन से मौतों की संख्या कम हुई है. यह घटकर 0.8 फीसदी पर आ चुकी है.

एपी ने सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) से प्राप्त आकंड़ों का एनालिसिस किया है. यहां तक सीडीसी खुद पूर्ण रूप से वैक्सीन लगवा चुके लोगों के संक्रमण और मौतों का विश्लेषण नहीं कर पाई थी. क्योंकि उनका दावा था कि डेटा कम और सीमित है. वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमण और मौतों की संख्या 45 राज्यों में कम हुई है.

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के पूर्व सलाहकार एंडी स्लेविट ने कहा था कि अमेरिका में कोविड-19 से मरने वाले वाले 98 से 99 फीसदी लोग वो हैं, जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है. वहीं, सीडीसी की डायरेक्टर डॉ. रोशेल वॉलेन्सकी ने कहा कि वैक्सीन इतने प्रभावी हैं कि वो इस समय कोविड-19 से होने वाले किसी भी मौत को रोक सकते हैं. जिन लोगों की मौत हो चुकी है, वह अत्यधिक दुखद है लेकिन वैक्सीन लगवा लेते तो शायद ये न होता.

अमेरिका में इस साल मध्य जनवरी में कोविड-19 की वजह से प्रतिदिन 3400 मौतें हो रही थी. तब यह पीक पर था. जो वैक्सीनेशन ड्राइव की वजह से एक महीने में काफी नीचे गिर गया. सीडीसी के अनुसार 12 साल और उससे ऊपर के जितने में एलिजिबल लोग थे उसमें 63 फीसदी लोगों को वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है. 53 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. दुनिया में जहां एक तरफ वैक्सीन की कमी हो रही थी, वहीं अमेरिका में वैक्सीन की कमी कभी महसूस नहीं हुई.

व्योमिंग के चेयने के व्यवसायी 68 वर्षीय रॉस बैग्ने को फरवरी की शुरुआत में ही वैक्सीन लगवानी थी, लेकिन उन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई. नतीजा ये हुआ कि 4 जून को उनकी कोविड-19 संक्रमण से मौत हो गई. वो तीन हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती रहे. उनके फेफड़ों में पानी भर गया था. वो कुछ भी निगल नहीं पा रहे थे. अंत में उन्हें स्ट्रोक आया और वो ख्तम हो गए. उनकी बहन कैरेन (फोटो में) ने बताया कि रॉस कभी घर से बाहर नहीं निकले, उन्हें लगता था कि संक्रमण नहीं होगा. लेकिन हुआ. इसलिए अब कैरेन लोगों से अपील कर रही हैं कि लोग जल्द से जल्द वैक्सीन लगवा लें.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन लोगों को मरने से बचाया जा सकता है, वो वैक्सीन लेने से इंकार कर रहे हैं. सिएटल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में हेल्थ मेट्रिक्स साइंसेज के प्रोफेसर अली मोकदाद ने कहा कि सर्दियों के बाद देश में मौतों का आंकड़ा फिर बढ़ सकता है. ये प्रतिदिन 1000 हो सकता है. अरकंसास अमेरिका का सबसे वैक्सीनेशन वाला राज्य है. यहां पर सिर्फ 33 फीसदी लोग ही वैक्सीनेट हुए हैं. जिसकी वजह से संक्रमण, अस्पतालों में भर्ती और मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है.

सिएटल के किंग काउंटी में पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने पाया है कि पिछले 60 दिनों में कोरोना की वजह से सिर्फ 3 लोगों की मौत हुई है. इन लोगों ने पूरा वैक्सीनेशन करवा लिया था. लेकिन 62 ऐसे लोगों की मौत हुई है जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई थी. किंग काउंटी में वैक्सीनेशन आउटरीच प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. मार्क डेल बेकारो ने कहा कि जो लोग मारे गए हैं, वो किसी के रिश्तेदार, पिता, दादा और दोस्त थे. अगर इन लोगों ने वैक्सीन लगवाई होती तो मौत को टाला जा सकता था.

सेंट लुईस के डॉ. एलेक्स गार्जा कहते हैं कि यहां कोविड-19 से संक्रमित 90 फीसदी लोग अस्पतालों में भर्ती हुए. इन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी. इनमें से ज्यादातर ने वैक्सीन न लगवाने की गलती को माना. अब उसे लेकर ये लोग पछता रहे हैं. अस्पतालों में भर्ती बीमार लोग अब अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कह रहे हैं कि वो वैक्सीन लगवा लें. क्योंकि वैक्सीन लगवाने से संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मौत से बचा जा सकता है.

जॉर्ज वॉशिगंटन यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डेविड माइकल्स कहते हैं कि वैक्सीन नहीं लगवाने से होने वाली मौतों से अब लोग डर रहे हैं. इसलिए लोग तेजी से जाकर वैक्सीन लगवा रहे हैं. बहुत से लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए छुट्टियां दी जा रही हैं. ताकि वैक्सीन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स से उबर कर लोग वापस अपने काम पर सुरक्षित तरीके से जा सके.

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