भगोड़े आतंकी तहव्वुर राणा का भारत प्रत्यर्पण टला, अमेरिकी कोर्ट ने मांगे और कागजात

लॉस एंजिलिस

मुंबई हमले में वांछित आतंकवादी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर फैसला कुछ दिनों के लिए टल गया है। इस मामले पर सुनवाई कर रही लॉस एंजिलिस की फेडरल कोर्ट ने कुछ नए कागजातों की मांग की है। तबतक के लिए तहव्वुर राणा अमेरिका की हिरासत में रहेगा। लश्कर आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने ही तहव्वुर राणा के खिलाफ गवाही दी हुई है। जिसके बाद भारत के अनुरोध पर राणा को मुंबई आतंकवादी हमले में संलिप्तता के आरोप में लॉस एंजिलिस में 10 जून 2020 को फिर से गिरफ्तार किया गया था।

भारत ने किया है प्रत्यर्पण का अनुरोध
राणा मुंबई आतंकवादी हमले में कथित भूमिका के चलते वांछित है और भारत ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है। राणा लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का बचपन का दोस्त है। पाकिस्तानी मूल का 60 वर्षीय अमेरिकी नागरिक हेडली 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रचने में शामिल था। वह मामले में गवाह बन गया था और वर्तमान में हमले में अपनी भूमिका के लिए अमेरिका में 35 साल जेल की सजा काट रहा है।

कोर्ट ने 15 जुलाई तक मांगे दस्तावेज
मजिस्ट्रेट जज जैकलीन चुलजियान ने बृहस्पतिवार को बचाव पक्ष के वकील और अभियोजकों को 15 जुलाई तक अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने को आदेश दिया। राणा अभी संघीय हिरासत में ही रहेगा। राणा के वकील का कहना है कि उसके मुव्वकील को हेडली द्वारा आतंकवादी साजिश रचने की कोई जानकारी नहीं थी और वह मुंबई में व्यापार के लिए एक कार्यालय स्थापित करने में अपने दोस्त की मदद कर रहा था।

वकील ने हेडली पर लगाया झूठ बोलने का आरोप
राणा के वकील ने कहा कि हेडली कई मौकों पर अमेरिकी सरकार से झूठ बोलता रहा है और उसकी गवाही को विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए। हेडली ने अपने आतंकवादी मकसदों को पूरा करने के लिए राणा का इस्तेमाल किया, जिसकी राणा को कोई जानकारी नहीं दी।

सुनवाई के दौरान राणा की बेटियां भी कोर्ट पहुंचीं
राणा की दोनों बेटियां भी सुनवाई के दौरान अदालत पहुंची थी, लेकिन उन्होंने मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। राणा के वकीलों ने भी पत्रकारों से कोई बात नहीं की। वहीं, राणा यहां सफेद रंग का जंपसूट और काला चश्मा पहने नजर आए। उनके पैर बंधे हुए थे।

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