हर बार चौंकाते हैं PM मोदी, कैबिनेट विस्‍तार में कौन सा वह सरप्राइज नाम?

नई दिल्‍ली

दो साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को विदेश मंत्रालय का जिम्‍मा सौंपा था, तब काफी लोग हैरान हुए। हालांकि जिन्‍हें पता है कि मोदी किस तरह काम करते हैं, उनके लिए जयशंकर की नियुक्ति कोई अचरज वाली बात नहीं थी। मोदी लंबे अरसे से ब्‍यूरोक्रेट्स और टेक्‍नोक्रेट्स पर भरोसा करते आए हैं। मोदी का यह भरोसा जल्‍द होने वाले केंद्रीय कैबिनेट के विस्‍तार में भी नजर आ सकता है।

केंद्र सरकार में होगा ब्‍यूरोक्रेट्स का दबदबा!
फिलहाल जयशंकर के अलावा बिजली मंत्री आरके सिंह, नागरिक उड्डयन और शहरी विकास मंत्रालय संभाल रहे हरदीप सिंह पुरी ऐसे मंत्री हैं जो पहले ब्‍यूरोक्रेट रहे हैं। कैबिनेट विस्‍तार में ब्‍यूरोक्रेसी से जुड़े रहे कुछ और लोगों को शामिल क‍िया जा सकता है। पूर्व आईएएस अधिकारी अश्विनी वैष्‍णव के नाम की चर्चा है। ब्‍यूरोक्रेट्स को मंत्री बनाने का फायदा यह है कि उन्‍हें सिस्‍टम के बारे में सबकुछ पता होता है। मातहतों से कैसे काम करवाना है, अफसर बखूबी जानते हैं।

कौन हैं अश्विनी वैष्‍णव?
आईएएस अधिकारी रहे अश्विनी ने अमेरिका से एमबीए किया है। वह आईआईटी कानपुर से एमटेक पासआउट हैं। ऑल इंडियान लेवल पर स‍िविल सर्विस एग्‍जाम में उनकी 27वीं रैंक थी। ओडिशा के कई जिलों में तैनात रहने के दौरान उन्‍होंने शानदार काम क‍िया। अटल बिहार वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए कुछ समय अश्विनी पीएमओ में भी रहे। जब 2004 में एनडीए हार गया तो वैष्‍णय को वाजपेयी का निजी सचिव बनाया गया। फिलहाल वह ओडिशा से राज्‍यसभा सांसद हैं।

संवैधानिक सीमा के तहत, केंद्रीय कैबिनेट में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल 28 पद खाली हैं। छह मंत्रियों के पास दो से ज्‍यादा मंत्रालय हैं। सहकारिता को नया मंत्रालय बनाया गया है। कैबिनेट में डेढ़ दर्जन ओबीसी मंत्री हैं, जिनकी संख्‍या बढ़कर 25 तक जा सकती है।

युवा जोश और अनुभव का तैयार होगा कॉकटेल
यूं तो मोदी की चाल को भांपना आसान नहीं, मगर संकेत यही हैं कि मंत्रिपरिषद विस्‍तार में युवा और अनुभवी नेताओं का एक मिश्रण होगा। अपने-अपने राज्‍य में कमान संभाल चुके पूर्व मुख्‍यमंत्रियों, राज्‍यों में लंबे समय तक मंत्री रहे नेताओं को मौका मिल सकता है। युवाओं का प्रतिनिधित्‍व बढ़ने के पूरे आसार हैं ताकि कैबिनेट की औसत आयु और कम हो सके।

कैबिनेट विस्‍तार से जातीय, क्षेत्रीय समीकरण सधेंगे
नए मंत्रिपरिषद में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। चूंकि अगले साल उत्‍तर प्रदेश समेत पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में उन्‍हें महत्‍व मिल सकता है। उत्‍तर प्रदेश से चार से पांच मंत्री बनना तय माना जा रहा है। बिहार से भी तीन नए केंद्रीय मंत्री आ सकते हैं। कैबिनेट विस्‍तार में अन्‍य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सबसे ज्‍यादा सदस्‍य हो सकते हैं। OBC जातियों का उत्‍तर प्रदेश की राजनीति पर खासा प्रभाव है। अनुसूचित जाति और जनजातियों से भी मंत्री बनेंगे।

मोदी को सोशल मीडिया पर मिल रहे सुझाव
केंद्रीय कैबिनेट में कौन-कौन हो और किसके पास कौन सा मंत्रालय रहे, इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी हलचल है। बहुत से लोग पीएम मोदी को अपने सुझाव दे रहे हैं। प्रकाश जावड़ेकर, निर्मला सीतारमण को लेकर मीम्‍स बन रहे हैं। उनके मंत्रालय का जिम्‍मा लेकर किसी और को दिए जाने की मांग हो रही है। बहुत सारे लोग पीयूष गोयल को वित्‍त मंत्रालय का जिम्‍मा देने को कह रहे हैं।

किन नामों की हो रही चर्चा
असम के पूर्व मुख्‍यमंत्री सर्वानंद सोनोवाला, मध्‍य प्रदेश के ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, महाराष्‍ट्र से नारायण राणे, उत्‍तर प्रदेश से अनुप्रिया पटेल, लद्दाख से सांसद जामयांग नामग्‍याल का केंद्र में मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा बैजयंत जय पांडा, कैलाश विजयवर्गीय, आरसीपी सिंह, वरुण गांधी, भूपेंद्र यादव, दिनेश त्रिवेदी, पशुपति पारस, राजीव सिंह ‘लल्‍लन’, स्‍वतंत्र देव सिंह समेत कई नाम चर्चा में हैं।

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