डायरी में लिख लो…. और सच हो गई मोदी की मनसुख पर वो भविष्यवाणी

नई दिल्ली

कोरोना संकट ने हर्षवर्धन की स्वास्थ्य मंत्री पद से छुट्टी कर दी। उनकी जगह पर अब मनसुख भाई मंडाविया को यह अहम जिम्मेदारी दी गई है। अब उनके कंधे पर कोरोना की तीसरी लहर को रोकने या उसके आने की सूरत में स्थितियां दूसरी लहर की तरह न बिगड़ें, इसकी जिम्मेदारी है। वह मोदी सरकार के उन 7 मंत्रियों में शामिल हैं जिनको प्रमोट किया गया है। 49 साल के मनसुख मंडाविया के बारे में आज से 9 साल पहले नरेंद्र मोदी ने एक भविष्यवाणी की थी, जो बिल्कुल सही साबित हुई है।

2012 में मोदी ने डंके की चोट पर की थी भविष्यवाणी
दरअसल, मनसुख मंडाविया को 2012 में पहली बार राज्य सभा भेजा गया था। तब उनके सम्मान में सूरत में हुए एक कार्यक्रम में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनको मंडाविया में बहुत संभावनाएं दिख रही हैं, उनका भविष्य उज्ज्वल है। खास बात यह है कि मंडाविया के बारे में मोदी इतने आत्मविश्वास के साथ भविष्यवाणी करते दिख रहे हैं कि लोगों से अपनी बात को डायरी में नोट करके रखने की भी बात कर रहे हैं।

‘डायरी में लिख लो…मनसुख भाई का भविष्य बहुत उज्ज्वल’
ट्विटर पर रवि घियर नाम के एक यूजर ने मोदी की उस भविष्यवाणी का एक क्लिप शेयर किया है। उसमें वह गुजराती में कहते दिख रहे हैं, ‘आपको शायद लग रहा होगा,अपने मनसुख भाई राज्यसभा में गए, सम्मान है, चलिए हो आए। मित्रो यह घटना इतनी छोटी नहीं है,आज की तारीख और 9:35 को मैं यह बोल रहा हूं जिसको डायरी में लिखना हो वह लिख ले। मित्रो मैं स्पष्ट देख रहा हूं मनसुख भाई का भविष्य कितना उज्ज्वल है,वह मुझे साफ दिख रहा है। उनमें रही शक्तियां आनेवाले कल को कैसे संवारने वाली है उसका मुझे पूरा भरोसा है दोस्तों। मुझे विश्वास है मैं सच्चा साबित होऊंगा।’

मंडाविया का बढ़ता सियासी कद
मनसुख भाई मंडाविया 2002 में पहली बार विधायक बने। तब उनकी उम्र महज 28 साल थी और वह सबसे कम उम्र के विधायक थे। 2012 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। 2018 में उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा गया। 2019 में पीएम मोदी ने उन्हें अपने मंत्रिपरिषद में शामिल किया। उन्हें बंदरगाह, पोत और जलमार्ग परिवहन मंत्रालय के साथ ही रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान उन्होंने अपने काम से एक अलग छाप छोड़ी। खासकर रसायन एवं उर्वरक मंत्री के तौर पर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की। इसका उन्हें इनाम मिला और अब राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोट हुए हैं। इतना ही नहीं, कोरोना संकट के इस दौर में प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

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