यूपी ब्लॉक प्रमुख चुनाव: पिता की शव यात्रा पर जा रहा BDC किडनैप, अंतिम संस्कार के लिए 7 घंटे इंतजार

संत कबीर नगर ,

उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों की तरह संत कबीर नगर जिले में भी ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर घमासान मचा हुआ है. राजनीतिक पार्टियों का उत्पात इस कदर हावी है कि एक बुजुर्ग पिता की शव यात्रा पर जा रहे बीडीसी पुत्र को सत्ता पक्ष के कुछ कार्यकर्ताओं ने रास्ते से अगवा कर लिया. बुजुर्ग पिता का शव अंतिम संस्कार के लिए घाट पर घंटों पुत्र की राह देखता रहा.

दरअसल, पूरा मामला संत कबीर नगर के महुली थाना क्षेत्र के ठाठर गांव का है. जहां पर अजय नामक बीडीसी के पिता की मौत हो गई थी. पिता के दाह संस्कार के लिए वह बिरहड़ घाट जा रहा था. इसी दौरान सत्ता पक्ष के कुछ लोगों ने शव यात्रा के दौरान बीडीसी अजय को मारपीट कर उठा ले गए, जिसकी तहरीर परिजनों ने धनघटा थाने को दी.पुलिस के आश्वासन के बाद परिजन शव को घाट पर ले गए, लेकिन शव अंतिम संस्कार के लिए अपहृत बेटे का घंटों इंतजार करता रहा.

पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी. परिजनों का आरोप है कि बीडीसी अजय को पहले एक पार्टी द्वारा वाराणसी ले जाया गया था, लेकिन जब पिता की मौत हुई तो उस पार्टी के लोगों ने बीडीसी अजय को दाह संस्कार में सम्मिलित होने के लिए उसके घर पहुंचा दिया. लेकिन शव यात्रा घर से निकल रही थी कि उसे रास्ते में सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं ने मारपीट कर उठा लिया.

घंटों तक इंतजार करता रहा शव
अब सबकी नजर इस पर थी कि बुजुर्ग पिता की अर्थी के दाह संस्कार में उसका बेटा सम्मिलित हो पाता है या फिर पुलिस की छानबीन में ही रह जाता है. हालांकि करीब 6-7 घंटे तक बंदी रहने के बाद अजय वापस लौट आया और शाम को अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सका.

धनघटा के पुलिस क्षेत्राधिकारी अंशुमान ने कहा कि थाना महुली अंतर्गत यह मामला प्रकाश में आया है. एक बीडीसी प्रत्याशी को कुछ लोग कहीं लेकर चले गए हैं. हम लोग जांच कर रहे हैं जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

मृतक के परिजन इस घटना से बेहद खफा हैं. अजय के चाचा ने कहा कि हमारा नाम चंद्रभान है. हमारे भाई मनिराम का देहांत हो गया. उनका लड़का अजय और संजय दो भाई हैं. दोनों लोग बाहर रहते हैं. अजय ने बीडीसी में जीत हासिल की. उसको केडी यादव वाराणसी लेकर गए थे, लेकिन जब रात एक बजे अजय के पिता की मौत हो गई तो उन्होंने वहां से भेज दिया.

चंद्रभान ने बताया कि वह घर लौट आया. हम लोग लाश को लेकर जा रहे थे. रास्ते में रामवृक्ष यादव और उनके भाई छांगुर यादव कुछ आदमियों को लेकर आया और उसको अपहरण कर लिया. हम लोग लाश लेकर बड़हल घाट पर आए. बाद में हम लाश लेकर धनघटा थाने पर पहुंचे तो दारोगा बोले कि तुम लोग घाट पर पहुंच जाओ मैं लेकर आता हूं.

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