पीएम मोदी ने बनाया सहकारिता मंत्रालय और शाह को दे दी जिम्मेदारी, जानते हैं क्यों?

नई दिल्ली

मोदी कैबिनेट के विस्तार के बाद चर्चा हो रही है एक खास सहकारिता मंत्रालय ministry of cooperation की। यह मंत्रालय नया बना और इसकी कमान दी गई है देश के गृह मंत्री अमित शाह को। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको यह जिम्मेदारी बहुत सोच- समझकर दी है। सहकारिता सेक्टर में काम करने का अमित शाह के पास पुराना अनुभव है और इस क्षेत्र के लिए वो कोई अजनबी नहीं हैं। एक वक्त सहकारिता क्षेत्र में गुजरात में किए गए उनके कार्यों को आज भी याद किया जाता है।

इसलिए शाह को मिली जिम्मेदारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लिए यह एक ऐसा क्षेत्र जिसने उन्हें राजनीतिक रणनीति तैयार करने में अहम सबक सिखाया है। ग्रामीण इलाकों के साथ संबंध स्थापित करने की उनकी शक्ति और राजनीतिक क्षमता का फायदा इस मंत्रालय को मिलेगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चीनी सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण, अमित शाह के पास राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए मौके होंगे।

ऐसे शुरू हुआ जुड़ाव
सहकारी क्षेत्र के साथ उनका जुड़ाव तब शुरू हुआ जब अमित शाह को अहमदाबाद जिला सहकारी (एडीसी) बैंक के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। नब्बे के दशक के मध्य में उन्होंने 36 साल की उम्र में इसका चुनाव जीता। गुजरात बीजेपी प्रवक्ता और चार्टर्ड एकाउंटेंट यमल व्यास ने बताया कि गुजरात में शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को उबारने में अमित शाह का गजब का योगदान था। यमल व्यास ने बताया कि एक साल से भी कम समय में, अमित भाई ने अटलजी (वाजपेयी) और तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को बैंक को बचाने के लिए पर्याप्त नीतिगत बदलावों के लिए मनाने के लिए दिल्ली की लगभग सौ यात्राएं की।

कांग्रेस के गढ़ में बनाई बढ़त
2002 में मंत्री बनने के बाद जब उन्होंने एडीसी बैंक का प्रभार अजय पटेल को सौंप दिया, तो शाह ने धीरे-धीरे अन्य जिला सहकारी बैंकों में काम किया, जिनकी अध्यक्षता आम तौर पर कांग्रेस के नेता करते थे और इन वर्षों में, उनमें से अधिकांश में भाजपा का वर्चस्व स्थापित किया। नाम न छापने की शर्त पर, गुजरात के एक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता ने बताया कि शाह को सहकारी समितियों के राजनीतिक महत्व का एहसास जल्द ही उन्हें राज्य के डेयरी क्षेत्र में ले गया।यहां भी उनके प्रयासों से सहकारी समितियों पर भाजपा उम्मीदवारों की पकड़ मजबूत हो गई। गुजरात के एक भाजपा पदाधिकारी ने स्वीकार किया,डेयरी सहकारी समितियों में पार्टी के प्रवेश से उत्तरी गुजरात जैसे क्षेत्रों में गंभीर चुनावी लाभ हुए, जो परंपरागत रूप से कांग्रेस के गढ़ थे।

यूपी में आजमाया यही फॉर्मूला
गुजरात के अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल अमित शाह ने यूपी में किया। 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले, इन क्षेत्रों जो सीख उन्हें मिली शाह ने यूपी में उसका बखूबी इस्तेमाल किया। सूत्रों के अनुसार शाह ने उत्तर प्रदेश में जो तकनीक अपनाई, वह ठीक वैसी ही है, जैसी उन्होंने सहकारी क्षेत्र के लिए की थी। पहले, वह अपने लक्ष्य की पहचान करते हैं और फिर सबकुछ उसके पीछे। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि गुजरात में सहकारी क्षेत्र पर शाह की पकड़ के साथ-साथ इस क्षेत्र को संभालने में उनका कौशल गुजरात जैसे पश्चिमी राज्यों के साथ-साथ पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा के काम आएगा, जहां चुनाव होने हैं।

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