देश में क्‍या जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने का समय आ गया? जानें क्या चाहते हैं लोग

नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की तैयारी में है। इस बीच ज्‍यादातर लोगों का मानना है कि यूपी ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने का समय आ गया है। आईएएनएस-सीवोटर लाइव ट्रैकर में शामिल ज्‍यादातर उत्तरदाताओं ने यह प्रतिक्रिया जाहिर की है।

सर्वे में यह पूछे जाने पर कि क्या आपको लगता है कि पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने का समय आ गया है, इस पर 52.14 फीसदी लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया। वहीं, 38.03 फीसदी ने कहा कि पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे कानूनों को केवल अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में ही पेश किया जाना चाहिए। यह सर्वे 1,225 लोगों के बीच किया गया।

गडकरी पर लोगों को भरोसा
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतें लोगों को परेशान कर रही हैं। उन्होंने ईंधन की कीमत को 60-65 रुपये प्रति लीटर तक लाने का एक फॉर्मूला दिया है। गडकरी ने कहा है कि इथेनॉल के अधिक उपयोग से पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी से राहत मिलेगी। इसके बाद 49.6 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि गडकरी को पेट्रोलियम मंत्रालय का प्रभार भी दिया जाना चाहिए। वहीं, 34.5 फीसदी ने कहा कि नए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह मंत्रालय के मामलों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से संभालेंगे।

मुफ्त बिजली क्‍या बनेगी चुनावी जीत का फॉर्मूला?
अलग-अलग राज्यों में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जहां आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया है। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। इस पर सर्वे में 50.29 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि मुफ्त बिजली का वादा चुनाव के लिए जीत का फॉर्मूला बन रहा है। जबकि 35.28 फीसदी ने कहा कि नहीं, एक पार्टी सिर्फ मुफ्त बिजली के वादे से चुनाव नहीं जीत सकती।

मुफ्त बिजली के पक्ष में नहीं आधे लोग
इसके अलावा सर्वे में शामिल कम से कम 50.92 फीसदी लोगों ने कहा कि मुफ्त बिजली प्रदान करने से राज्यों का राजस्व प्रभावित होता है, जो जनता को प्रदान की जाने वाली अन्य आवश्यक सेवाओं को प्रभावित करता है।

किसान बनाएं राजनीतिक मंच
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता गुरनाम सिंह चढूनी के आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज कर दिया है। मगर, इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर कुल 54.3 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि किसानों को एक राजनीतिक मंच शुरू करना चाहिए और पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए, ताकि किसान समुदाय के अधिकारों को लेकर लड़ाई को आगे बढ़ाया जा सके। वहीं, 35.4 फीसदी लोगों ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने से किसानों के मुद्दों का समाधान नहीं होगा।

हरियाणा में स्‍कूल खुलने से लोग नाखुश
हरियाणा सरकार ने कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्रों के लिए 16 जुलाई से स्कूल खोलने का फैसला किया है। जबकि कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी टला नहीं है। इस मुद्दे पर जब यह सवाल किया गया कि क्या आपको लगता है कि ऐसी स्थिति में स्कूल अभी खोले जाने चाहिए, इस पर 47.1 फीसदी लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया। वहीं, 44.02 फीसदी लोगों ने कहा कि स्कूल फिर से खोले जाने चाहिए।

कांग्रेस नेतृत्‍व कलह सुलझाने में फेल
कांग्रेस की पंजाब और हरियाणा इकाई के बाद अब पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाई में भी अंदरूनी कलह को देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर सवाल करने पर 48.33 फीसदी लोगों ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व पार्टी की राज्य इकाइयों में अंदरूनी कलह को सुलझाने में लगातार विफल हो रहा है।

सी-वोटर न्यूजट्रैकर सर्वे क्‍या है?
भारत में सी-वोटर न्यूजट्रैकर सर्वे नेशनल रिप्रेजेंटेटिव वाले रैंडम प्रोबेबिलिटी सैंपलिंग पर आधारित है। इसमें विश्वस्तर पर मानकीकृत आरडीडी सीएटीआई पद्धति का इस्‍तेमाल किया जाता है। यह सभी राज्यों में सभी भौगोलिक और जनसांख्यिकीय क्षेत्रों को कवर करता है। सर्वे सभी सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में बालिग (18 प्लस) उत्तरदाताओं के साक्षात्कार पर आधारित है। प्रत्येक रिपोर्ट में सैंपल साइज और फील्ड कार्य तिथियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।

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