दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को दी अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी, जानें क्या है मामला

नई दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र महंगी दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के मद्देनजर क्राउड फंडिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन करने में नाकाम रहता है, तो जानबूझकर आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। उच्च न्यायालय ने कहा कि डिजिटल क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म को 31 मार्च तक संचालित करने के 28 जनवरी के विशिष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक ऐसा नहीं किया गया है।अडिशनल सोलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने जस्टिस रेखा पल्ली को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि यह प्लेटफॉर्म काम कर रहा है या नहीं।

केंद्र सरकार के अधिवक्ता से इस बारे में निर्देश मांगे जाने का आदेश देते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘यह अदालत जानबूझ कर आदेश के गैर-अनुपालन के लिए कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।’ अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे कहना पड़ेगा कि आप अदालत की अवमानना कर रहे हैं ।’

डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) और म्युकोपॉलीसेकराइडोसिस 2 अथवा एमपीएस-2 जैसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर अदालत सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र को उन्हें निर्बाध और मुफ्त इलाज देने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई थी क्योंकि यह चिकित्सा बहुत महंगी है।

इस साल 28 जनवरी को जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने अपने फैसले में केंद्र सरकार को दुर्लभ बीमारियों के इलाज एवं दवाओं के लिए डिजिटल क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म शुरू करने का निर्देश दिया था।अदालत ने यह भी कहा था कि वह 31 मार्च तक नीति को अंतिम रूप देने और डिजिटल प्लेटफॉर्म को चालू करने का निर्देश जारी कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एक हलफनामा दायर कर कहा गया था कि दोनों कामों को 31 मार्च तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है।

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