तालिबान अफगान एयर फोर्स के पायलटों को चुन चुन कर क्यों मार रहा?

काबुल/वॉशिंगटन,

अफगान एयर फोर्स के मेजर दस्तगीर ज़मारे ऑफ ड्यूटी पायलटों की हत्याओं से इतने भयभीत थे कि उन्होंने अपना घर बेचकर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के सुरक्षित इलाके में रहने का फैसला किया. आम तौर पर रियल एस्टेट एजेंट घर की तलाश में आए अपने क्लाइंट का खुशी-खुशी स्वागत करते हैं. लेकिन दस्तगीर ज़मारे के साथ इसका उलट हुआ. वह आशियाने की तलाश में रियल एस्टेट एजेंट के पास पहुंचे, लेकिन जैसे ही पता चला कि जमारे वायु सेना के पायलट हैं, एजेंट फौरन अपने घर के अंदर गया और लौटकर बिना कुछ कहे उनके सिर में गोली मार दी.

जमारे की अपने 14 साल के बेटे के सामने मौत हो गई, जो उनके साथ ही एजेंट के पास गया था. बेटा बच गया, लेकिन परिजनों का कहना है कि वह अब बहुत कम बोलता है. उनके बहनोई समीउल्लाह दारमन ने रॉयटर्स को बताया, ‘ज़मारे केवल इसलिए गए क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से एजेंट को जानते थे और सोच रहे थे कि उसके पास जाना सुरक्षित है. हमें नहीं पता था कि वह कभी वापस नहीं आएंगे.’

ज़मारे इकलौते ऑफ ड्यूटी पायलट नहीं हैं जो तालिबान की गोलियों का निशाना बने. अफगान सरकार के दो सीनियर अफसरों ने बताया कि हाल के महीनों में ज़मारे सहित सात पायलटों की इसी तरह हत्या कर दी गई. तालिबान जानबूझकर अफगान एयर फोर्स के पायलटों को निशाना बना रहे हैं. अमेरिकी और अफगान अफसरों का मानना है कि तालिबान अफगान एयर फोर्स के पायलटों को इसलिए मार रहा है क्योंकि उन्हें अमेरिकी और नाटो बलों ने सैन्य ट्रेनिंग मुहैया कराई है. तालिबान के पास अफगान वायुसेना का मुकाबला करने की ताकत नहीं है और इसीलिए वह अफगान पायलटों को निशाना बना रहा है.

तालिबान अपने ऊपर आसमान से होने वाले खतरों को कम करने के लिए पायलटों की हत्याओं को अंजाम दे रहा है. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तालिबान अफगानिस्तान पर कब्जा करने में जुटा है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि अगर यही हालात रहे तो राष्ट्रपति अशरफ गनी सरकार के लिए अपना अस्तित्व बचाए रखना मुश्किल होगा.

रॉयटर्स ने परिवार के सदस्यों के माध्यम से मारे गए सात में से दो पायलटों की पहचान की पुष्टि की. यह अन्य पांच के नामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका जिन्हें निशाना बनाया गया था. रॉयटर्स के सवालों के जवाब में, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने पुष्टि की कि समूह ने ज़मारे को मार डाला था. तालिबान ने अफगान एयर फोर्स के पायलटों की हत्या और उनके खात्मे का अभियान शुरू किया है क्योंकि ये पायलट उन पर बमबारी करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि 2021 के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में तालिबान के हमलों में 229 नागरिक मारे गए जबकि इसी दौरान अफगान वायु सेना की वजह से 41 लोगों की मौत हो गई.

अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान के हमले में कितने पायलट मारे गए हैं, उनकी संख्या का खुलासा नहीं किया है. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में सवालों के जवाब नहीं दिए. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का कहना है कि वो कई अफगान पायलटों की हत्याओं की घटना से अवगत था, लेकिन उसने अमेरिकी खुफिया और जांच पर टिप्पणी से इनकार कर दिया.

मौजूदा और पूर्व अफगान व अमेरिकी अफसरों का कहना है कि हाल के दिनों में पायलटों को निशाना बनाया जा रहा है. क्योंकि वे तालिबान के खिलाफ बड़े हमलों को अंजाम देने के साथ साथ जमीन पर लड़ रहे अफगान मिलिट्री के जवानों को सुरक्षा कवर भी देते हैं. पायलटों की ट्रेनिंग में वर्षों लग जाते हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है. पायलटों की हत्याओं से अफगान सरकार को काफी नुकसान हुआ है जो देश की रक्षा के लिए बड़ा झटका है.

2016 से 2017 तक अफगान वायु सेना के लिए ट्रेनिंग की कमान संभालने वाले सेवानिवृत्त अमेरिकी ब्रिगेडियर जनरल डेविड हिक्स ने कहा कि गोलीबारी और दुर्घटनाओं का हमेशा जोखिम रहता है. लेकिन ये पायलट अक्सर तालिबान की गोलियों का निशाना बनते हैं. हिक्स का कहना है कि अफगानिस्तान में पायलटों की जान तब और ज्यादा जोखिम में रहती है जब वे ड्यूटी पर नहीं होते हैं.

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