BJP का कोई मंत्री बगैर सुरक्षा चला जाए सिंघु बॉर्डर तो पता लग जाएगा- मनीष तिवारी

नई दिल्ली

कांग्रेस नेता मनीष कुमार ने बीजेपी के नेताओं को बिना सुरक्षा के सिंघु बॉर्डर जाने की चुनौती देते हुए कहा कि एक बार एनडीए या फिर बीजेपी नेता बिना सुरक्षा के किसानों से मुलाकात करें तो उन्हें समझ आ जाएगा कि किसानों का आंदोलन प्रोत्साहित है या फिर स्वभाविक। मनीष तिवारी ने यब बात आजतक के कार्यक्रम सीधी बात में कही है। गौरतलब है कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसान पिछले कई महीनों से दिल्ली के बॉर्डरों पर बैठे हुए हैं। सरकार किसानों को बातचीत का न्योता दे रही है लेकिन किसानों ने साफ कर लिया है कि वह किसी भी शर्त के साथ बात नहीं करेंगे। सरकार भी साफ कर चुकी है कि इधर कांग्रेस इस मामले को लेकर मोदी सरकार का घेराव कर रही है। कांग्रेस नेता मनीष कुमार ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि अगर कानून अच्छे हैं तो इतने दिनों से किसान सड़कों पर क्यों बैठे हैं।

किसानों के आंदोलन चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के आंदोलन के साथ है। सरकार के रवैये से स्थिति बिगड़ सकती है। क्योंकि जम्मू कश्मीर का आतंरिक तनाव पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मसले को समझना चाहिए कि पंजाब एक सरहद का सूबा है। जहां स्थितियां बेहद संवेदनशील है। केंद्र की सरकार पिछले 7-8 महीनों से आग से खेलने का काम कर रही है।

मनीष तिवारी के इस तर्क पर प्रभु चावला ने सवाल दागते हुए पूछा कि क्या आप किसान आंदोलन के पीछे खलिस्तानी मूवमेंट एक्टिव होने की शंका जता रहे हैं। इसके जवाब में पूर्व मंत्री ने कहा कि 1972 के बाद से ही पंजाब की शांति और अमन को भंग करने के लिए पाकिस्तान व अन्य दूसरी बाहरी शक्तियां कोशिश करती रही है। जब भी सामाजिक तनाव की स्थिति होती हैं तो इसका फायदा उठाने के लिए राष्ट्रविरोधी शक्तियां एक्टिव हो जाती हैं जो भारत को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

मनीष तिवारी ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले नवंबर से लेकर अब तक कितने ड्रोन पाकिस्तान से भारत में भेजे गए हैं। किस तरह के हथियार पाकिस्तान से पंजाब में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि यह हथियार पंजाब की अमन व शांति बढ़ाने के लिए नहीं आ रहे हैं। इसलिए पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सांसद केंद्र सरकार से विनती कर रहे हैं कि पंजाब की परिस्थितियों तो पहचानिए और इसकी शांति को भंग मत होने दीजिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। आखिरी बार जनवरी में दोनों के बीच कानून को लेकर चर्चा हुई थी। सरकार ने नए कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव दिया था जिसे किसानों ने अस्वीकार कर दिया था। इधर कृषि मंत्री भी साफ कर चुके हैं कि कानूनों के प्रावधान पर चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन कानून रद्द नहीं किए जाएंगे।

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