तालिबान ने पाकिस्तान को दिया करारा झटका, बोला- TTP आतंकियों पर हमारा काबू नहीं

इस्लामाबाद

तालिबान के सहारे पाकिस्तान में शांति का ख्वाब देख रहे इमरान खान सरकार को तगड़ा झटका लगा है। तालिबान के एक धड़े तहरीक-ए-तालिबान अफगानिस्तान (टीटीए) ने पाकिस्तान सरकार से साफ शब्दों में कहा है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इमरान सरकार को टीटीपी के साथ खुद ही बातचीत करनी होगी। अबतक इमरान सरकार तालिबान के जरिए पाकिस्तान में सक्रिय आतंकियों को खदेड़ने का ख्वाब देख रही थी।

टीटीपी के हमलों से उड़ी पाकिस्तान की नींद
बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2014 में पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब ने टीटीपी की कमर तोड़कर रख दी थी। तब इसके आतंकी पाकिस्तान से भागकर अफगानिस्तान चले गए थे। अब पिछले कुछ साल से ये आतंकवादी वापस पाकिस्तान लौट आए हैं और लगातार हमले कर सेना और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई राज्यों में टीटीपी के हमलों के कारण पाकिस्तानी सरकार और सेना की नींद उड़ी हुई है।

इमरान का गृह राज्य टीटीपी का ठिकाना
पाकिस्तान सरकार ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को 2008 में ब्लैकलिस्ट किया था। टीटीपी ने पिछले 10 साल में पाकिस्तान में कई बड़े हमले किए हैं। इस आतंकवादी संगठन का सबसे बड़ा गढ़ इमरान खान का गृह राज्य खैबर पख्तूनख्वा है। हाल में ही टीटीपी के आतंकियों ने खैबर पख्तूनख्वा में चीन के इंजीनियरों की बस पर हमला कर 13 लोगों को मार दिया था। इतना ही नहीं, इस हमले से एक दिन पहले इसी राज्य में पाकिस्तानी सेना पर हमला कर उनके एक कैप्टन और एक जवान की हत्या कर दी थी।

टीटीए ने इमरान सरकार को दी यह सलाह
तहरीक-ए-तालिबान अफगानिस्तान (टीटीए) से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस आतंकी संगठन ने पाकिस्तान सरकार से दो टूक कहा है कि वे टीटीपी आतंकवादियों को अफगानिस्तान से निष्कासित नहीं कर सकते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के ऊपर आतंकवादी हमला करने के लिए अफगानी जमीन के इस्तेमाल को रोकने में भी असमर्थता जताई है। टीटीए ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वे खुद टीटीपी के साथ शांति को लेकर बातचीत करे।

अफगानिस्तान के बिगड़ते हालात से पाकिस्तान डरा
पाकिस्तान को डर है कि अगर अफगानिस्तान में हिंसा चरम पर पहुंचती है तो लगभग 650000 से 750000 शरणार्थी उनकी देशों में आएंगे। ऐसे में इन शरणार्थियों में शामिल होकर टीटीपी समेत कई आतंकवादी संगठन के लड़ाके पाकिस्तान में घुसपैठ कर सकते हैं। इसी कारण पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान से लगी सीमा की चौकसी भी बढ़ा दी है। हालांकि, कम संसाधनों के कारण दोनों देशों के बीच कई ऐसे इलाके हैं, जहां निगरानी का बेहद अभाव है।

About bheldn

Check Also

अफगानिस्तान में किडनी बेच भूख मिटा रहे लोग, गरीबी से हालात भयावह

नई दिल्ली अफगानिस्तान की दिन-प्रतिदिन खराब होती आर्थिक हालत से यहां आम लोगों की जिंदगी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *