कारगिल जंग: पाक कर्नल का आया फोन- सर, इज्‍जत की बात है हम लौट रहे हैं बस..

नई दिल्‍ली

भारतीय सेना ने अपने शौर्य से देशवासियों का मान हमेशा बढ़ाया है। उसने दुश्‍मन की हर चाल नाकाम की है। जब कभी भी देश पर किसी ने बुरी नजर डाली तो उसने ईंट से ईंट बजा दी। पाकिस्‍तान इसका उदाहरण है। 1971 में हमारी सेना के आगे घुटने टेकने वाले पाकिस्‍तान को कारगिल युद्ध में भी अपने धोखे की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। भारतीय सेना ने न केवल चालबाज पाकिस्‍तान को अपने पराक्रम से रूबरू कराया, बल्कि यह भी दिखाया कि हम नै‍तिकता और विनम्रता को युद्ध में भी नहीं भूलते।

जी हां, कारगिल युद्ध की ऐसी ही कुछ यादें ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) एमपीएस बाजवा ने शेयर की हैं। उन्‍होंने बताया है कि 22 साल पुराने इस युद्ध में हमने कैसे पाकिस्‍तान के दांत खट्टे किए। 26 जुलाई के दिन ही कारगिल में भारतीय सेना ने अपनी सभी पोस्‍टों पर दोबारा कब्‍जा कर लिया था। इन पर धोखे से पाकिस्‍तानी सेना जम गई थी। बाजवा 26 जून से कारगिल वॉर पर ट्वीट करके उस दौरान जो कुछ घटा उसके बारे में बताते आ रहे हैं। उन्‍होंने 95 पार्ट में इस जंग की कहानी सुनाई है।

उन्‍होंने बताया कि धोखे से पाकिस्‍तानी सेना ने टाइगर हिल पर कब्‍जा कर लिया था। कई दिनों के संघर्ष के बाद आखिरकार 4 जुलाई 1999 को भारतीय सेना टाइगर हिल को दोबारा अपने कब्‍जे में लेने में सफल हुई। इस दौरान सैनिकों को कई शहादतें देनी पड़ीं। 12 जुलाई से 18 जुलाई 1999 तक ‘शांति’ का ऐलान किया गया। इसका मकसद पाकिस्‍तान को अपनी सेना को वापस बुलाने का समय देना था। लेकिन, पता चला कि 19 फ्रंटियर फोर्स ‘जुलु स्‍पर’ कॉम्‍प्‍लेक्‍स पर कब्‍जा किए हुए है। 22 जुलाई को उनकी ब्रिगेड (192 माउंटेन ब्रिगेड) से जुलु स्पर को अपने कब्‍जे में लेने के लिए कहा गया। यह लक्ष्‍य भी सफलता से पूरा किया गया।

कारगिल युद्ध के आखिरी दिनों को याद करते हुए बाजवा ने लिखा कि पाकिस्‍तान से एक कॉल आया। उन्‍हें बताया गया कि दुश्‍मन के 19 फ्रंटियर फोर्स के कर्नल मुस्‍तफा उनसे बात करना चाहते हैं। मैसेज था ‘पाकिस्‍तान फॉर इंडिया’। बाजवा ने मुस्‍तफा से बात शुरू की।

बाजवा ने मुस्‍तफा से पूछा वह क्‍या चाहते हैं। मुस्‍तफा ने कहा, ‘मैं सबसे पहले आपको बधाई देना चाहता हूं कि आपकी सेना ने बड़ी बहादुरी से लड़ा।’ इस पर बाजवा ने धन्‍यवाद कहा और कॉल का मकसद पूछा।

मुस्‍तफा ने बताया, ‘सर, हमारी 13 डेड बॉडीज और संभवत: एक जीवित सैनिक आपके पास है। मेरी गुजारिश है कि आप उन्‍हें लौटा दें। यह मेरी इज्‍जत का सवाल है।’ इस पर बाजवा ने कहा कि कर्नल मुस्‍तफा अभी तो हमें आप पर एक और हमला करना है।

इस पर मुस्‍तफा ने कहा, ‘सर, आपको इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। हम अपने आप लौट रहे हैं।’ बाजवा चौंक गए और मुस्‍तफा से पूछा कि उनका वह कैसे यकीन करें। मुस्‍तफा ने तुरंत जवाब दिया, ‘सर, मैं ‘पठान हूं’। बाजवा ने इसके जवाब में कहा, ‘ठीक है, मैं भी सरदार हूं।’

बाजवा ने मुस्‍तफा से कहा कि हम पाकिस्‍तान के झंडे में लपेटकर उनके शव पूरी इज्‍जत के साथ लौटाएंगे। वे अब शत्रु नहीं, सिर्फ सैनिक हैं। मुस्‍तफा ने सहमति जताई और सभी शव लौटा दिए गए। वादे के मुताबिक वे भी लौट गए। इस तरह कारगिल युद्ध खत्‍म हुआ।

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