दिल्‍ली में स्‍कूल खोलने की तैयारी, केजरीवाल सरकार ने बच्‍चों के बीच शुरू क‍िया सर्वे

नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर लगातार कमजोर पड़ रही है और अब कहा जा सकता है कि हालात नियंत्रण में हैं। तो क्या प्रदेश में स्कूल-कॉलेज खोल दिए जाने चाहिए? सरकार यह सवाल छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और प्राध्यापकों से पूछ रही है। सरकार का मानना है कि स्कूल-कॉलेज को खोलने या बंद रखने का फैसला लेने से पहले पैरेंट्स, स्टूडेंट्स, टीचर्स, प्रिंसपिल्स आदि से राय लेना जरूरी है, इसलिए शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक ईमेल आईडी जारी की है।

इस मेल आईडी पर भेजें अपनी राय
सिसोदिया ने अपने संदेश में कहा, ‘क्या दिल्ली को अपने स्कूल और कॉलेज खोल देने चाहिए? अगर आप दिल्ली के किसी स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी या उनके अभिभावक, शिक्षक या प्रिंसिपल हैं तो अपनी राय मुझे [email protected] पर भेजें।’

कुछ राज्यों में खुल गए स्कूल-कॉलेज
ध्यान रहे कि कुछ राज्यों ने इस महीने अपने स्कूल-कॉलेज खोल दिए जबकि कुछ राज्य अगले हफ्ते की शुरुआत में विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेजों में बुलाने की योजना बना रखी है। ऐसे में दिल्ली सरकार की यह कवायद से पता चलता है कि सरकार अपनी तरफ से स्कूल खोलने को तैयार है। अगर बाकी पक्षों ने भी सहमति दे दी तो दिल्ली में भी जल्द ही स्कूल-कॉलेज खुल जाएंगे। इससे पहले बीते सोमवार सो ही दिल्ली मेट्रो में 100% सीटों पर यात्रा की अनुमति दे दी गई और बसों में भी यात्रियों की संख्या बढ़ाई गई है।

एक्सपर्ट्स की राय
चूंकि बच्चों में कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने की ज्यादा क्षमता होने की पुष्टि हुई है, इस कारण एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि पहले छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाएं। फिर चरणबद्ध तरीकों से बड़े बच्चों को क्लास में बुलाया जाए और आखिर में कॉलेज और दूसरे उच्च शैक्षिक संस्थान भी खोल दिए जाएं। हालांकि, ज्यादातर राज्य इस सुझाव पर चलने को तैयार नहीं दिखते हैं। कुछ राज्यों ने तो बोर्ड एग्जाम के नजरिए से पहले 10वीं और 12वीं के क्लास ही खोल दिए हैं। दूसरी बात जहां स्कूल-कॉलेज खुल भी गए हैं, वहां विद्यार्थियों में क्लास जाने को लेकर अब भी हिचक महसूस की जा रही है।

दिल्ली में भी बंटी आ सकती है राय
दिल्ली सरकार ने यूं तो स्पष्ट नहीं पूछा है कि किस क्लास तक स्कूल खोले जाएं या सभी कक्षाएं खोल दी जाएं, लेकिन संभावना है कि अभिभावकों की राय बंट जाएगी। छात्रों, शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की सोच भी अलग-अलग होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली में एक साथ सारे क्लास के बच्चों को बुलाया जाएगा या फिर चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोलने का फैसला होगा? बहरहाल, यह सवाल सबकी राय आने के बाद ही लिया जाएगा।

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