दामाद की मौत पर क्या सास भी मुआवजे की हकदार? सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

नई दिल्ली

अपने दामाद के साथ रहने वाली सास भी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लीगल प्रतिनिधि हो सकती हैं और वह मुआवजे के लिए याचिका दायर करने की हकदार भी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसए नजीर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि भारतीय समाज में यह असामान्य नहीं है कि अपनी बेटी और दामाद के साथ सास रह रही हों।

बुजुर्ग होने पर वह अपनी बेटी के घर रहती हैं। वह अपने दामाद पर निर्भर भी रहती हैं। मृतक की सास कानूनी वारिस नहीं भी हो सकती हैं लेकिन दामाद पर निर्भर सास अपने दामाद की मौत के मामले में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा की दावेदार हो सकती हैं। मौजूदा मामले में मृतक की पत्नी ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें हाई कोर्ट ने मृतक की सास को लीगल प्रतिनिधि नहीं माना और मुआवजे की राशि घटा दी थी।

मोटर व्हीकल क्लेम ट्रिब्यूनल ने 74 लाख 50 हजार मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था लेकिन हाई कोर्ट ने उसे घटाकर 48 लाख 39 हजार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट का कहना है कि मुआवजा फेयर और वाजिब होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट लीगल प्रतिनिधि को परिभाषित नहीं किया है और आमतौर पर प्रतिनिधि का मतलब होता है कि जो लीगल प्रतिनिधि हो और जिसे मुआवजे की रकम मिलती है।

आमतौर पर कानूनी वारिस इसके दायरे में आते हैं। कानूनी वारिस लीगल प्रतिनिधि हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि लीगल प्रतिनिधि शब्द ज्यादा व्यापक है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इसकी व्याख्या व्यापक है। और यह सिर्फ दंपत्ति, पैरेंट्स और बच्चों तक सीमित नहीं हो सकता है।

About bheldn

Check Also

दिल्ली में जल्द खुलने वाले हैं स्कूल, पैरेंट्स की डिमांड पर सिसोदिया ने दे दिया इशारा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कोरोना की रफ्तार अब धीमी होती जा रही है। विशेषज्ञों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *