लालू यादव पर सॉफ्ट क्यों दिख रही बीजेपी? पटना आने के बाद नहीं हुआ कोई सीधा अटैक

पटना

लालू यादव पिछले दो दिनों से पटना में हैं। बिहार उपचुनाव में बुधवार को प्रचार करने भी जा रहे हैं। बीजेपी और लालू के रिश्ते किसी से छिपी नहीं है। मगर कांग्रेस और आरजेडी में ज्यादा जुबानी जंग चल रही है। जबकि ये दोनों पार्टियां एनडीए विरोधी गठबंधन में हैं। बीजेपी नेता तो लालूजी के अच्छे सेहत की शुभकामना दे रहे हैं।

बीजेपी नेताओं ने लालू को लेकर अबतक क्या कहा?
कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास पर दिए लालू यादव के विवादित बयान पर बिहार बीजेपी के नेता चुप हैं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल से लेकर सुशील मोदी तक लालू यादव पर सीधा हमला करने से परहेज कर रहे हैं। संजय जायसवाल ने कहा कि ‘ये सब दिखावा है, ये एक-दूसरे पर इसलिए आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं ताकि ये एनडीए का वोट काट सकें। असल में दोनों पार्टियों की एक खास रणनीति है। ये आमने-सामने इसलिए हैं क्योंकि कांग्रेस, बीजेपी का आधार वोट काटकर एनडीए को नुकसान पहुंचा सके।’

वहीं, राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने भी कांग्रेस और आरजेडी में मिलीभगत का आरोप लगाया। सुशील मोदी तो लालू यादव से ज्यादा कांग्रेस पर बरसे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कितनी भी गाली दी जाए, वो अपना अस्तित्व बचाने के लिए अपमान का घूंट पीकर भी आरजेडी का साथ नहीं छोड़ेगी। जबकि, बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि लालू जी के आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वो काफी बुजुर्ग हो चुके हैं। मैं यही कामना करता हूं कि स्वस्थ और दीर्घायु रहें।

लालू पर चुप्पी बीजेपी की रणनीति का हिस्सा?
दरअसल बिहार में जो लालू यादव की पार्टी को वोट नहीं दे सकते, वो एनडीए को वोट देते हैं। बीजेपी नहीं चाहती कि लालू के वापसी की ज्यादा चर्चा हो। नहीं तो वोटों का ध्रुवीकरण होगा। लालू के कोर वोटर एकजुट होंगे। राज्य में भले ही एनडीए गठबंधन की सरकार चल रही है मगर महागठबंधन और एनडीए की सीटों का फर्क ज्यादा नहीं रहा। एनडीए को 125 और महागठबंधन को 110 सीटें मिली थी।

2020 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जनता के सामने लालू के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले को जोरशोर से उठाया था। इसके बावजूद 75 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी। यही वजह है कि सत्ताधारी गठबंधन लालू यादव को चर्चाओं से बाहर रखने की कोशिश में लगी है।

बीजेपी को लेकर लालू यादव भी बरत रहे सावधानी
बिहार में लालू यादव से छिटकने के बाद नीतीश कुमार बीजेपी के पाले में चले गए। इस खेल में लालू परिवार सत्ता से बाहर हो गया। राज्य में मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार हैं लेकिन उन्होंने अपने साझीदार को बदल लिया। जबकि 2015 में लालू यादव से मिलकर उन्होंने चुनाव लड़ा था।केंद्र में बीजेपी की सरकार है। लालू परिवार से जुड़ा केस केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास है। चारा घोटाले में सजायाफ्ता आरजेडी सुप्रीमो और भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंसा लालू परिवार बीजेपी को लेकर सावधानी बरत रहा है। करीब चार साल बाद लालू यादव को जमानत मिली और फिलहाल पटना में हैं।

दो सीटों पर (कुशेश्वरस्थान और तारापुर) जहां पर उपचुनाव हो रहा है, वहां सीधे तौर पर बीजेपी का कैंडिडेट नहीं हैं। राज्य में अगर बीजेपी और जेडीयू गठबंधन में किसी तरह की कोई खटपट होती है तो इसका सीधा फायदा राष्ट्रीय जनता दल को होगा। यही वजह है कि वो बीजेपी को लेकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।आरजेडी सुप्रीमो के टारगेट पर नीतीश कुमार हैं। उन्होंने कहा कि ‘नीतीश कुमार का गुणगान किया जा रहा है। बीजेपी और पीएम मोदी को सब पता है। हर कोई नारा लगा रहा है कि नीतीश कुमार जैसा प्रधानमंत्री होना चाहिए। उन्हें पीएम मटेरियल बताया जा रहा है। ये अहंकार और लालच है।’

कांग्रेस और आरजेडी में क्यों हो रही खटपट?
कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर बीजेपी के सहयोग से पहली बार लालू यादव ने सीएम की कुर्सी संभाली थी। फिर भारतीय जनता पार्टी से खटपट होने पर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। इसके बाद तो लालू यादव ने बिहार कांग्रेस को अपनी गोद में बैठा लिया। जैसे चाहा, वैसे नचाया। कहा जाता है कि लालू यादव ने अपने चहेते को राज्य कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनवाते रहे। ताकि तोलमोल में कोई दिक्कत न हो। करीब तीस साल से कांग्रेस और आरजेडी साथ है।

कांग्रेस के सीनियर नेता सदानंद सिंह के निधन के बाद लालू यादव का बिहार कांग्रेस पर से पकड़ ढीली पड़ गई। लालू यादव के नहीं चाहते हुए भी कांग्रेस ने जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल कराया। उन्होंने पटना पहुंचते ही सबसे पहले लालू यादव से तीस साल का हिसाब मांग दिया। इससे पहले कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने आरजेडी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया।

जो कांग्रेस नेता लालू यादव के सामने मुंह नहीं खोलते थे वो हैसियत और गठबंधन तोड़ने की बात करने लगे। आरजेडी सुप्रीमो को कांग्रेस का ‘एंग्री यंग मैन’ वाला अवतार पसंद नहीं आया। उन्होंने पटना पहुंचने से पहले ही भक्त चरण दास को ‘भकचोन्हर दास’ बता दिया। पटना पहुंचने के दूसरे दिन कह दिया कि कांग्रेस के छुटभैया नेता अनाप-शनाप बोलते रहते हैं। दरअसल 2020 विधानसभा चुनाव में कुशेश्वरस्थान सीट कांग्रेस के खाते में थी, जबकि तारापुर आरजेडी के पास। मगर उपचुनाव में आरजेडी ने दोनों जगहों से उम्मीदवार उतार दिया है। यहीं से कांग्रेस और आरजेडी में मामला खटक गया।

About bheldn

Check Also

चीनी सेना ने अरुणाचल के युवक को किया अगवा, सांसद ने ट्विटर पर लगाई मदद की गुहार!

अपर सियांग चीनी सेना ने मंगलवार को एक भारतीय नागरिक को अगवा कर लिया। अरुणाचल …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *