जकरबर्ग ने कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया, पर ‘फेसबुक’ आपके पास ही रहेगा, जानिए क्यों

नई दिल्ली

फेसबुक इंक अपना नाम बदलकर मेटा रख रही है। सोशल नेटवर्क के तौर पर स्थापित अपनी पहचान को अलग रूप देने के लिए और वर्चुअल रिएलिटी पर केन्द्रित उभरते कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट को दर्शाने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने गुरुवार को वर्चुअली आयोजित किए गए फेसबुक के कनेक्ट सम्मेलन में एक प्रेजेंटेशन में कहा, ‘आज हम सोशल मीडिया कंपनी के रूप में जाने जाते हैं लेकिन हमारा डीएनए उस कंपनी का है, जो लोगों को जोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी बनाती है। मेटावर्स, सोशल नेटवर्किंग की तरह ही अगला फ्रंटियर है। अब से, हम मेटावर्स-फर्स्ट होने जा रहे हैं, फेसबुक-फर्स्ट नहीं।’

बता दें कि मार्क जकरबर्ग ने पेरेंट कंपनी का नाम बदलकर मेटा किया है। फेसबुक इंक के अंडर आने वाले फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के नाम वही बने रहेंगे, जो हैं। जकरबर्ग का कहना है कि कंपनी का नाम बदले जाने के बाद भी हमारा मिशन वही रहेगा, जो है यानी लोगों को साथ लाना। हमारे ऐप्स औ उनके ब्रांड नहीं बदल रहे हैं।

मेटावर्स पर लगा रही दांव
फेसबुक का नाम परिवर्तन एक नए कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म ‘मेटावर्स’  पर अपने भविष्य को दांव पर लगाने के कंपनी के इरादे का अब तक का सबसे निश्चित संकेत है। फेसबुक की दृष्टि में, लोग वर्चुअल वातावरण में प्रवेश करके इकट्ठा होंगे और कम्युनिकेट करेंगे, चाहे वे बोर्डरूम में सहकर्मियों के साथ बात कर रहे हों या दुनिया के दूर-दराज के कोनों में दोस्तों के साथ घूम रहे हों।

1 दिसंबर से नए टिकर के साथ कारोबार करेगा स्टॉक
कंपनी ने कहा कि उसका स्टॉक एक दिसंबर से एक नए टिकर, एमवीआरएस के तहत कारोबार शुरू करेगा। जुकरबर्ग ने गुरुवार को एक लेटर में कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले दशक में मेटावर्स 1 अरब लोगों तक पहुंच जाएगा, सैकड़ों अरब डॉलर के डिजिटल कॉमर्स की मेजबानी करेगा और लाखों क्रिएटर्स व डेवलपर्स के लिए नौकरियों का सपोर्ट देगा।

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