क्या अखिलेश यादव पचा पाएंगे ओम प्रकाश राजभर और मुख्तार अंसारी की दोस्ती?

लखनऊ

बात है साल 2016 की। समाजवादी पार्टी (एसपी) खेमे में तकरार तेज हो चुकी थी। अखिलेश यादव ने मुख्तार अंसारी  की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय यह कहकर रद्द कर दिया था कि माफियाओं के लिए उनके दल में जगह नहीं है। खींचतान बढ़ी तो अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव अलग-अलग हो गए। सपा की कलह ने पार्टी को हार में झोंक दिया। 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं। अब प्राथमिकताएं बदल रही हैं। यूपी चुनाव के लिए सपा का गठबंधन सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के साथ हुआ है। एसबीएसपी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर हैं। ओम प्रकाश ने मुख्तार अंसारी से जो प्रेम दिखाया है, उस पर सवाल यह है कि अब अखिलेश को यह सबकुछ पच कैसे रहा है।

ओम प्रकाश राजभर ने कहा, ‘मेरा उनके (मुख्तार अंसारी) साथ पिछले 19 वर्षों से राजनीतिक रिश्ता है। बीजेपी उन्हें माफिया कहती है लेकिन यूपी सरकार में एक-तिहाई अपराधी हैं। वह (मुख्तार) अपनी क्षमता पर चुनाव जीत सकते हैं। वह जिस सीट से भी चुनाव लड़ना चाहेंगे, मैं उन्हें निजी तौर पर समर्थन दूंगा।’ यह भी बता दें कि मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी की भी पिछले दिनों समाजवादी पार्टी में एंट्री हुई थी। इस पर शिवपाल यादव ने सवाल खड़े किए थे। शिवपाल यादव ने कहा था कि माफियाओं की पार्टी में एंट्री नहीं होनी चाहिए।

चेकिंग हुई तो नाराज हुए ओम प्रकाश राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने मंगलवार को बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से मुलाकात की थी। इसके बाद वापस लौटते समय पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर की गाड़ी की चेकिंग हुई। इस बात से ओम प्रकाश राजभर नाराज हो गए।

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