‘प्रभु राम का जन्‍म निषाद परिवार में हुआ’ ओवैसी का तंज- DNA एक्सपर्ट भागवत बताएं

लखनऊ/हैदराबाद

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी इस बार यूपी चुनावों में भी दमखम दिखा रहे हैं। चुनाव से पहले कई जिलों में रैलियां और जनसभाएं कर ओवैसी योगी सरकार पर जमकर प्रहार कर रहे हैं। अब उन्‍होंने बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी के अध्‍यक्ष संजय निषाद के एक विवादित बयान को लपक लिया है। एक दिन पहले संजय निषाद ने कहा था कि भगवान राम का जन्म निषाद परिवार में हुआ था। वह राजा दशरथ नहीं बल्कि पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने वाले श्रृंगी ऋषि के बेटे थे। ओवैसी ने इस बयान के बहाने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को घेर लिया है।

सोमवार को असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसा- ‘आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत डीएनए के विशेषज्ञ हैं। उनको निषाद पार्टी प्रमुख के कथित बयान को स्पष्ट करना चाहिए। बीजेपी और आरएसएस के प्रमुख नेताओं को इस पर बोलना चाहिए।’ गौरतलब है कि कुछ महीने पहले मोहन भागवत ने कहा था कि हिंदू- मुस्लिम एकता की बातें भ्रामक हैं क्योंकि यह दोनों अलग नहीं बल्कि एक हैं। सभी भारतीयों का डीएनए एक है, चाहें वो किसी भी धर्म के क्यों न हो। यह सिद्ध हो चुका है कि हम 40 हजार साल से एक ही पूर्वज के वंशज हैं। भारत में लोगों का डीएनए एक जैसा है।

डीएनए बयान पर ओवैसी ने किया था पलटवार
मोहन भागवत के डीएनए बयान पर ओवैसी ने उन पर पलटवार किया था। ओवैसी ने कहा था- ‘हमारा डीएनए टेस्‍ट करवा लें, हम तैयार हैं, लेकिन आप सभी को भी करवाना होगा। ये भी नौबत अब आ गई है। ये लोग भारत के संविधान को नहीं मानेंगे, लेकिन डीएनए टेस्‍ट करवाएंगे। आरएसएस वाले इतिहास में कमजोर होते हैं।’

‘संघ के पास जीरो ब्रेन, मुसलमानों से नफरत 100%’
एआईएमआईएम चीफ पहले भी कई मौकों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत पर हमला बोल चुके हैं। भागवत ने देश में बढ़ती मुस्लिम आबादी पर अपनी चिंता जताई थी। उन्‍होंने कहा था कि भारत को पाकिस्‍तान बनाने की कोशिशों के तहत 1930 से मुस्लिम आबादी को बढ़ाने का संगठित प्रयास किया गया। इस पर ओवैसी ने कहा था कि अगर हमारा डीएनए एक ही है तो हम गिनती क्यों कर रहे हैं ? भारतीय मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर में 1950 से 2011 के बीच सबसे तेज गिरावट देखी गई है। संघ के पास जीरो ब्रेन है, 100% मुसलमानों से नफरत है।

क्‍या कहा था संजय निषाद ने?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज में संजय निषाद ने कहा था कि जब राजा दशरथ को संतान नहीं हो रही थी, तब उन्होंने श्रृंगी ऋषि से यज्ञ करवाया था। कहा जाता है कि श्रृंगी ऋषि की तरफ से दिए गए खीर को खाने के बाद दशरथ की तीनों रानियों के बेटे पैदा हुए थे, जबकि हकीकत ये है कि खीर खाने से कोई भी महिला गर्भवती नहीं हो सकती। संजय निषाद के अनुसार, उस वक्त के इतिहासकारों ने भी सच नहीं लिखा था।

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