बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगवाएं या नहीं? जानिए दुविधा में क्यों फंसे हुए हैं मां-बाप

नई दिल्ली

जल्दी ही देश में बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। इसके बावजूद कई माता-पिता ऐसे हैं जो अभी भी अपने बच्चों को कोरोना टीका लगवाने को लेकर दुविधा में हैं। कई पैरंट्स सोच रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन लगवाने से पहले इंतजार कर लेना चाहिए। कई माता-पिता बच्चों की कोरोना वैक्सीन से जुड़े कम रिसर्च डेटा उपलब्ध होने की बात कह रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस बारे में कई माता-पिता से बात की। जानते हैं बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगवाने को लेकर क्या है माता-पिता की राय।

इस साल अगस्त में, भारतीय दवा नियामक ने 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए Zydus Cadila की वैक्सीन जायकोव-डी के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दी थी। हालांकि, यह अभी तक यह हमारे वैक्सीनेशन कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बना है। दूसरी तरफ अमेरिका में, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 5-11 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए वैक्सीन को मंजूरी दी है।

‘अभी वैक्सीन के लिए हां कहना मुश्किल’
पेशे से वकील और क्लास वन में पढ़ने वाली बच्ची की मां तान्या अग्रवाल ने बताया कि कई डॉक्टरों ने कहा है कि बड़े लोगों के विपरीत, छोटे बच्चों में गंभीर कोरोना का खतरा कम होता है। तान्या ने कहा कि बच्चों में कोरोना का प्रोफाइल, छोटे ट्रायल साइज और लॉन्ग टर्म सेफ्टी की कमी को देखते हुए बच्चों को लिए कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए हां कहना अभी मुश्किल है।

दो लहर तो बीत गई, बच्चों में खतरा कम
एक अन्य पैरंट मोहित गोयल ने बच्चों से जुड़े विश्वसनीय रिसर्च डेटा की कमी का जिक्र किया। मोहित गोयल का एक बच्चा दसवीं और दूसरा नर्सरी क्लास में पढ़ता है। गोयल का कहना है कि बच्चों पर वैक्सीन के साइड इफेक्ट से जुड़े विश्वनीय डेटा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कोरोना की दो लहर बीत चुकी है। ऐसे में बच्चों में कोरोना के मामले अभी बहुत कम दिखाई दिए हैं।

‘आश्वसत करे सरकार तो मैं हूं तैयार’
हालांकि, रोहिणी में रहने वाले सत्य प्रकाश ने कहा कि बच्चों से जुड़े पर्याप्त आंकड़े सामने आने पर वह वैक्सीन लगवाएंगे। दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्य प्रकाश ने कहा कि सरकार को रॉ रिसर्च डेटा, ऑब्जर्वेशन और निष्कर्ष पब्लिश करने दें। उन्होंने कहा कि यदि मुझे आश्वस्त किया जाए कि यह वैक्सीन मेरे बच्चों के लिए सुरक्षित है, तो मैं तैयार हूं।

बड़ों को वैक्सीन लगवाने में भी रिस्क था
एक अन्य पैरंट रवि खत्री भी अपने बच्चों का टीकाकरण करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उन्हें लगा कि ज्यादातर लोगों ने सोच समझकर रिस्क लेकर ही वैक्सीन लगवाई है। उन्होंने कहा कि जहां तक साइड-इफेक्ट्स का सवाल है, वयस्कों वैक्सीन में भी ऐसा ही था। मैं साइड-इफेक्ट्स को सोच समझकर रिस्क लेने को लेने के लिए तैयार हूं।

हमने भी तो लिया है तो बच्चों की जिंदगी खतरे में क्यों डालें
यहां तक कि वसंत कुंज के स्कूलों में पढ़ रही दो बेटियों के माता-पिता सुमित कुमार ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा, “हम सभी का वैक्सीनेशन हुआ है, तो हम अपने बच्चों की जिंदगी को खतरे में क्यों डालें! एक बार जब उनका वैक्सीनेशन हो जाए, तो हम उन्हें बिना किसी डर के स्कूल भेज सकते हैं।

कुछ समय अभी इंतजार करना चाहेंगे
एक अन्य माता-पिता, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे ने कहा कि कई अन्य लोगों की तरह वे भी इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी भी बच्चों के टीकाकरण के संबंध में स्टडी चल रही हैं। बच्चों में बड़े लोगों की तुलना में बेहतर इम्युनिटी है। ऐसे में हम अपने बच्चों का वैक्सीनेशन कराने से पहले कुछ और समय तक इंतजार करेंगे।

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