मुलायम के ‘सपा में आ जाओ’ पर होने लगी खिंचाई तो कुमार विश्‍वास का चुटीला जवाब

लखनऊ

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि डॉ. कुमार विश्वास को नेताजी मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, यह ऑफर सपा संरक्षक की ओर से डायरेक्ट नहीं था लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर विश्वास की ‘खिंचाई’ शुरू हो गई है। ट्विटर पर एक यूजर ने इस घटना से संबंधित वीडियो डाला तो कवि ने जवाब देते हुए कहा कि वह अब ‘राजनीति के पार’ हैं। ‘राजनीति के पार’ प्रफेसर रामगोपाल यादव की उस किताब का नाम है, जिसके विमोचन कार्यक्रम में कुमार मौजूद थे और जहां उन्हें यह ऑफर मिला।

मामला मंगलवार का है। समाजवादी पार्टी नेता प्रफेसर रामगोपाल यादव की किताब ‘राजनीतिक के पार’ का विमोचन कार्यक्रम था। मंच पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अलावा कवि कुमार विश्वास, आरजेडी सांसद मनोज झा और समाजवादी चिंतक डॉ. उदय प्रताप सिंह मौजूद थे। इस दौरान कुमार विश्वास को समाजवादी पार्टी जॉइन करने का खुला ऑफर मिला। यह था तो मुलायम सिंह यादव की ओर से लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर कुमार से यह बात नहीं कही।

सपा में शामिल होने का ऑफर
कार्यक्रम में कुमार विश्वास के संबोधन के बाद माइक संभालने वाले डॉ. उदय प्रताप सिंह ने यह प्रस्ताव रखा था। सिंह ने कहा, ‘कुमार विश्वास इतने बड़े कवि हैं। अभी नेता जी हमसे कान में कह रहे थे कि अगर ये कही नहीं हैं तो इनको समाजवादी पार्टी में क्यों नहीं बुला लेते।’ सिंह के इतना कहते ही महफिल में ठहाके गूंजने लगे। कुमार विश्वास और अखिलेश यादव भी सिंह की इस बात पर हंस पड़े। तकरीबन 34 सेकेंड का यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है।

ट्वीट पर दिया जवाब
पत्रकार अभिनव पांडेय ने इस वीडियो को अपने हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि मौका तो रामगोपाल यादव की किताब के विमोचन का था लेकिन महफिल कुमार विश्वास लूट ले गए। खुले मंच से खुला ऑफर.. इधर चले आओ। डॉ. कुमार विश्वास इस ट्वीट में टैग किए गए थे सो उन्होंने इस पर जवाब भी दिया। उन्होंने वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा, ‘मेरे प्यारे, जिस पुस्तक का मैंने विमोचन किया उसका शीर्षक ‘राजनीति के पार’ स्वयं में ही सूचना है।’

विश्वास ने आगे कहा कि प्रफेसर रामगोपाल जी के पचहत्तर-उत्सव में तो कांग्रेस, वामपंथ, दक्षिणपंथ से लेकर नए नौनिहाल दलों तक के नेता सम्मिलित थे। बस मैं और रामगोपाल यादव जी की किताब ही ‘राजनीति के पार’ थे।’ विश्वास ने शायद इशारों-इशारों में यह बताने की कोशिश की है कि वह राजनीति के पार आ चुके हैं और किसी भी पार्टी में उनके शामिल होने की संभावना नहीं है। बता दें कि कुमार विश्वास दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं। बाद में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मतभेद होने के बाद उन्होंने पार्टी और राजनीति में अपनी सक्रियता शून्य कर दी है।

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