मर्यादा भंग करके मुझे ही पाठ पढ़ाते हो… 12 विपक्षी सदस्यों के निलंबन पर हंगामे से भड़के सभापति

नई दिल्ली

राज्यसभा के 12 विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस नहीं होगा। सभापति वेंकैया नायडू ने निलंबन वापसी की विपक्ष की मांग पर यह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि सांसद अपने किए पर पश्चाताप होने की बजाय, उसे न्यायोचित ठहराने पर तुले हैं। ऐसे में उनका निलंबन वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता है। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही राज्यसभा के 12 सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई है। उन सांसदों ने पिछले सत्र में किसान आंदोलन एवं अन्य मुद्दों के बहाने सदन में जमकर हो-हंगामा किया था और खूब अफरा-तफरी मचाई थी।

खड़गे ने दिया नियमों का हवाला
आज राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कुछ नियमों का हवाला देकर विपक्षी सांसदों के निलंबन को असंसदीय करार दिया। संसद सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा के 12 सदस्य पूरे सत्र से निलंबित कर दिए गए थे। इनमें कांग्रेस के 6, शिवसेना और टीएमसी के 2-2 जबकि सीपीएम और सीपीआई के 1-1 सांसद शामिल हैं।

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो खड़गे ने नियमों का हवाला देकर कहा कि सांसदों के निलंबन का कोई आधार नहीं है, इसलिए उनके निलंबन का फैसला वापस लिया जाना चाहिए। खड़गे ने सभी 12 विपक्षी सांसदों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति सभापति से मांगी। फिर सभापति ने विपक्ष से कहा कि निलंबन की कार्रवाई उनकी नहीं, बल्कि सदन की थी।

सभापति का जवाब
सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि राज्यसभा अनवरत चलने वाला सदन है। इसका कार्यकाल कभी खत्म नहीं होता है। उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा के सभापति को संसदीय कानून की धाराओं 256, 259, 266 समेत अन्य धाराओं के तहत अधिकार मिला है कि वो कार्रवाई कर सकता है और सदन भी कार्रवाई कर सकती है। कल की कार्रवाी सभापति की नहीं, बल्कि सदन की थी। सदन में इस संबंध में प्रस्ताव लाया गया जिसके आधार पर कार्रवाई हुई है।’

नायडू बोले- …मुझे ही पाठ पढ़ाते हो
10 अगस्त को इन सदस्यों ने सदन की मर्यादा भंग की। सभापति ने कहा, ‘आपने सदन को गुमराह करने की कोशिश की, आपने अफरा-तफरी मचाई, आपने सदन में हो-हंगामा किया, आसन पर कागज फेंका, कुछ तो टेबल पर चढ़ गए और मुझे ही पाठ पढ़ा रहे हैं। यह सही तरीका नहीं है। प्रस्ताव पास हो गया है, कार्रवाई हो चुकी है और यह अंतिम फैसला है।’ उन्होंने कहा कि सांसद अपने अर्मयादित व्यवहार पर पश्चाताप करने के बजाय वो इसे उचित ठहरा रहे हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि विपक्ष की मांग पर विचार किया जाना चाहिए। सभापति ने कहा कि सांसदों का निलंबन वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

पूरे सत्र से निलंबित हुए ये 12 सांसद
फुलो देवी नेताम, छाया वर्मा, आर बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन और अखिलेश प्रताप सिंह (कांग्रेस), प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई (शिवसेना), शांता छेत्री और डोला सेन (टीएमसी), एलमरम करीम (सीपीएम) और विनय विश्वम (सीपीआई)।

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