देवस्थानम बोर्ड भंग, साधु-संतों की मांग के आगे झुकी उत्तराखंड की धामी सरकार

देहरादून

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का बड़ा ऐलान किया है। दो साल पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अस्तित्व में आया था। तीर्थ पुरोहितों के लगातार विरोध और कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के इसे चुनावी मुद्दा बनाने से बीजेपी पर दबाव था। सीएम धामी ने कहा कि मामले में उच्च स्तरीय रिपोर्ट पर विचार करते हुए उन्होंने अधिनियम वापस लेने का फैसला लिया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘पिछले दिनों देवस्थानम बोर्ड को लेकर विभिन्न प्रकार के सामाजिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज के लोगों और विभिन्न प्रकार के जनप्रतिनिधियों से बात की है और सभी के सुझाव आए हैं।’

कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर वापस लिया अधिनियम
उन्होंने आगे कहा, ‘मनोहर कांत ध्यानी जी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई थी। उस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट दी है। जिस पर हमने विचार करते हुए निर्णय लिया है कि हम इस अधिनियम को वापस ले रहे हैं। आगे चल कर हम सभी से बात करते जो भी उत्तराखंड राज्य के हित में होगा उस पर कार्रवाई करेंगे।’

गौरतलब है कि उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने सोमवार को चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर मंत्रिमंडल की उपसमिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। उससे एक दिन पहले ही उच्चाधिकार समिति ने इसी विषय पर अपनी अंतिम रिपोर्ट धामी को सौंपी थी। उच्चाधिकार समिति को उत्तराखंड चार धाम प्रबंधन अधिनियम , 2019 पर गौर करने के लिए राज्य सरकार ने गठित किया था।

त्रिवेंद्र रावत सरकार ने पारित किया था अधिनियम
देवस्थानम अधिनियम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था। इसके तहत चार धामों सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन किया गया था। तब श्राइन बोर्ड की तर्ज पर त्रिवेंद्र सरकार ने देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला किया था। हालांकि चारों हिमालयी धामों-बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित लगातार देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे थे। पुरोहितों का मानना है कि बोर्ड का गठन उनके अधिकारों का हनन है।

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ-पुरोहितों ने नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे का विरोध भी किया था. हालांकि, धामी समझाने के बाद पुरोहित मान गए थे. कुछ दिन पहले ही जब प्रधानमंत्री मोदी ने जब तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया था तो उसके बाद उत्तराखंड सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत ने भी कहा था कि जिस तरह कृषि कानूनों पर प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाया है, उसी तरह प्रदेश सरकार भी देवस्थानम बोर्ड को लेकर अडिग नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि अगर ये लगेगा कि ये बोर्ड चारधाम, मठ-मंदिरों और आमजनों के हित में नहीं है तो सरकार इसे वापस लेने पर विचार कर सकती है.

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हमेशा इसके समर्थन में रहे हैं. उन्होंने दावा किया था कि देवस्थानम बोर्ड से देश ही नहीं, बल्कि विश्व के तमाम हिंदु आस्थावानों को इसका फायदा होगा. उन्होंने दावा करते हुए ये भी कहा था कि इस बोर्ड का सभी मंदिरों के पुरोहित समर्थन कर रहे हैं, बस कुछ लोग ही हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं.

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