UAPA को प्रसाद की तरह बांट रही है एक राज्य सरकार! आखिर कहना क्या चाहती हैं स्वरा भास्कर

नई दिल्ली

फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर गाहे-बगाहे ऐसे बयान देती रहती हैं जिनसे वो चर्चा के केंद्र में आ जाती हैं। स्वरा का विरोध करने वाले उन पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाते हैं। स्वरा ने बुधवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने यूएपीए की चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक राज्य की सरकार विरोध में आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति पर यूएपीए और राजद्रोह विरोधी कानून के तहत मुकदमा कर रही है। इस पर लोग कहने लगे हैं कि स्वरा तो बिल्ली को ही दूध की रखवाली का जिम्मा देना चाहती हैं।

नाम लिए बिना यूपी सरकार पर आरोप
स्वरा के बयान पर सोशल मीडिया में उठ रही आवाज की चर्चा बाद में करेंगे, पहले यह जान लेते हैं कि आखिर फिल्म अभिनेत्री ने कहा क्या है। स्वरा ने ममता से कुछ लोगों का परिचय यह कहते हुए करवाया कि इन लोगों ने अपना करियर, अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर विरोध की आवाज बुलंद रखी है। उन्होंने मुनव्वर फारुकी समेत कार्यक्रम में मौजूद कुछ और लोगों को ममता के सामने बारी-बारी से खड़ा करवाया और बताया कि कैसे उन्हें उनकी विचारधारा के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। स्वरा ने कहा, ‘आज हम ऐसी स्थिति में फंसे हैं जहां एक और बेलगाम भीड़ है और दूसरी तरफ हम जैसे परफॉर्मर्स। सत्ताधारी दल और उससे जुड़े संगठन इस भीड़ के जरिए हम पर अत्याचार करते हैं और पुलिस भी इन सबसे नजरें फेर लेती है।’

स्वरा ने ममता से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की भी शिकायत की। उन्होंने कहा, ‘एक राज्य की सरकार तो अपनी असीम ताकत का इस्तेमाल कर रही है। वह यूएपीए और राजद्रोह के मुकदमों को भगवान के प्रसाद की तरह बांट रही है, जिस भगवान की पूजना हम पसंद नहीं करते।’ उन्होंने उत्तर प्रदेश या योगी आदित्यनाथ का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था। स्वरा ने यह सब बोलने के दौरान खुद स्वीकार किया कि वो भावुक हो गई हैं।

सोशल मीडिया पर स्वरा से पूछे जाने लगे सवाल
अब सोशल मीडिया यूजर्स स्वरा भास्कर को याद करवा रहे हैं कि वो जिनके सामने गुहार लगा रही हैं, उन्होंने खुद कई लोगों को बेमतलब प्रताड़ित किया। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के प्रफेसर आनंद रंगनाथन ने लिखा, ‘क्या यह मजाक है? या फिर आप भूल गईं कि आपके अपने कॉमरेड शंकर दास को ममता सरकार ने पिटवाया और यूएपीए का मुकदमा लादकर जेल में डाल दिया। आपको कॉमरेड डॉ. रातुल याद हैं जिन्हें ममता सरकार ने यूएपीएफ के अंदर जेल में डाला और प्रताड़ित किया? कॉमरेड शर्मिष्ठा चौधरी भी याद हैं जिन्हें ममता सरकार ने भंगार आंदोलन के वक्त यूएपीए के तहत जेल भेजा? याद कीजिए कि आप उस आंदोलन का समर्थन कर रही थीं।’

एक यूजर ने लिखा, स्वरा भूल गईं कि दीदी (ममता बनर्जी) ने एक बीजेपी कार्यकर्ता को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार करवाया था क्योंकि उन्होंने फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की मेट गाला कॉस्ट्यूम में ममता का चेहरा लगा फोटो बनाया नहीं था, बल्कि शेयर किया था। उन्होंने पूछा, ‘इन कॉमेडियन को कोलकाता बुलाकर दीदी पर व्यंग्य क्यों नहीं करवाते? क्या वो (ममता) उन पर (कॉमेडियन पर) बड़ा दिल दिखाएंगी?’ एक अन्य यूजर ने बताया कि कैसे जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रफेसर अंबिकेश मोहपात्रा को ममता का मीम ईमेल पर फॉरवर्ड करने के लिए थर्ड डिग्री टॉर्चर से गुजरना पड़ा। ममता का वह मीम सत्यजीत राय की एक फिल्म पर आधारित था।

स्वरा पर प्रॉपगैंडा फैलाने का आरोप
स्वरा की उनके बयानों के लिए अक्सर फजीहत होती है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर आयोजित एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में दावा कर दिया था कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) में ऐसे-ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनसे देश की बहुत बड़ी आबादी यह साबित ही नहीं कर पाएगी कि वो भारत की नागरिक है। इस पर जब न्यूज एंकर ने पूछा कि वो प्रावधान कहां है और उन्हें कहां से उपलब्ध हुए हैं तो स्वरा बगलें झांकने लगीं। दरअसल, एनआरसी के लिए कानून अब तक बने ही नहीं हैं। स्वरा ने जब एनआरसी के ‘डरावने प्रावधानों’ का दावा किया था तब कानून लाए जाने की सिर्फ चर्चा हो रही थी।

कानूनों के दुरुपयोग का आरोप कहां नहीं लगता?
जहां तक बात यूएपीए और राजद्रोह जैसे कानूनों के दुरुपयोग की है तो दुनिया का कोई ऐसा देश और कोई ऐसा कानून नहीं है जहां किसी कानून के दुरुपयोग का आरोप नहीं लगता हो। कहीं कम और कहीं पर ज्यादा, लेकिन सरकारों पर विरोधियों को साधने के लिए कानूनों और एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप तो लगते रहते हैं। तो क्या बिना कानून के किसी देश की शासन व्यवस्था चल सकती है? जहां तक भारत की बात है तो आजादी के बाद से अब तक, कानूनों के दुरुपयोग के आरोपों से शायद ही कोई सरकार अछूती रही हो। पिछली यूपीए सरकार के वक्त ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘पिंजड़े में बंद तोता’ कहा था। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर आरोप सही ही हो। कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर अपने अधिकारों के दायरे में रहते हुए आरोपियों के मानवाधिकारों का ख्याल भी रखना पड़ता है। एजेंसियों पर कई बार यह दायरा लांघने का आरोप लगता है। कई बार अजेंडे के तहत एजेंसियों और सरकारों पर आरोप लगाए जाते हैं।

स्वरा को संवैधानिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं?
स्वरा ने कहा कि योगी सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक राज्य की सरकार शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल कर रही है। अगर उन्हें ऐसा लगता है तो इसके लिए संवैधानिक व्यवस्था है। सरकार हो या कोई एजेंसी या फिर कोई और, हमारे संविधान ने जनता के अधिकारों के हनन का अधिकार किसी को नहीं दिया है। और, यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद संतुलित व्यवस्था बना रखी है। जिन्हें भी लगता है कि कोई सरकार या एजेंसी किसी कानून का दुरुपयोग कर रही है, उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। अगर कोई सरकार या एजेंसी अदालत की ओर से बार-बार दोषी ठहराई जाए तो उस पर कार्रवाई भी हो सकती है।

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