भारत में कहां से आया ओमिक्रॉन? विदेश गए बिना संक्रमित हो गया मरीज नं-2

बेंगलुरु

स्वास्थ्य विभाग और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिक (बीबीएमपी) के अधिकारी इस बात से अनजान हैं कि मरीज नंबर दो कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट से कैसे संक्रमित हुआ। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ के सुधाकर ने पुष्टि की है कि दक्षिण अफ्रीका से यात्रा करने वाले मरीज नंबर एक के विपरीत, मरीज नंबर दो एक स्थानीय निवासी है। उसका अंतरराष्ट्रीय यात्रा का कोई इतिहास नहीं है।

बीबीएमपी द्वारा दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, कर्नाटक में 66 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी के रूप में ओमिक्रॉन का पहला मामला दर्ज किया गया था, जो 20 नवंबर को बेंगलुरु पहुंचे थे। उसी दिन वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। उन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया। बीबीएमपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके सीधे संपर्क में आए 24 और माध्यमिक संपर्कों में आए 240 लोगों में से कोई भी कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया गया। बीबीएमपी कमिश्नर गौरव गुप्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि मरीज नंबर दो का दक्षिण अफ्रीकी नागरिक से कोई संपर्क नहीं था।

मरीज नंबर दो की रिपोर्ट में कहा गया है कि वह बेंगलुरु के रहने वाले हैं। वह 44 साल के हैं। हेल्थ केयर वर्कर के तौर पर काम करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री सुधाकर ने आगे पुष्टि की कि वह शहर के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर हैं। उन्हें 21 नवंबर को बुखार और शरीर में दर्द हुआ और अगले दिन उनका टेस्ट पॉजिटिव आया। चूंकि उनका सीटी मान कम था (जो एक उच्च वायरल लोड को इंगित करता है), उनका नमूना जीनोमिक सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया।

यह पूछे जाने पर कि विदेश यात्रा किए बिना या दक्षिण अफ्रीकी नागरिक के संपर्क में आए मरीज नंबर दो ओमिक्रॉन से कैसे संक्रमित हुआ, स्वास्थ्य मंत्री डी सुधाकर ने कहा, “रोगी किसी यात्रा इतिहास वाले व्यक्ति के संपर्क में आया होगा। हम अभी भी इसे ट्रैक कर रहे हैं।” बीबीएमपी आयुक्त गौरव गुप्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि मरीज 22 से 24 नवंबर के बीच होम आइसोलेशन में था और 25 नवंबर को उसे अस्पताल में एडमिट कर दिया गया था। हालांकि, उन्हें 27 नवंबर को छुट्टी दे दी गई।मरीज नंबर दो में 13 प्राथमिक संपर्क और 205 माध्यमिक संपर्क थे। जिनमें से तीन प्राथमिक संपर्कों और दो माध्यमिक संपर्कों ने कोविड के लिए सकारात्मक परीक्षण किया है। वे इस समय एक सरकारी अस्पताल में हैं और उनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं दिख रहे हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर बात करने वाले स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग या बीबीएमपी के पास वैरिएंट के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि इस सवाल का जवाब कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में मिल सकता है। वह सत्यापित करेगा कि क्या मरीज के किसी संपर्क ने विदेश यात्रा की है।”हालांकि, बीबीएमपी (स्वास्थ्य) के विशेष आयुक्त के वी त्रिलोक चंद्रा ने एचटी को बताया कि मरीज नंबर दो के पांच संपर्कों का कोई यात्रा इतिहास नहीं है। चंद्रा ने कहा, “अभी तक हम नहीं जानते कि वह (मरीज नंबर दो) ओमिक्रॉन से कैसे संक्रमित हुए।”

कर्नाटक की तकनीकी सलाहकार समिति के एक सदस्य ने कहा कि यह संभव है कि प्रतिबंध लगाने से पहले ओमिक्रॉन संक्रमित मरीज राज्य में प्रवेश कर गया हो। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा, “फिलहाल यह अनुमान है। इसको लेकर एक निश्चित उत्तर देना मुश्किल होगा। चूंकि सभी रोगियों और उनके संपर्कों का यात्रा का कोई इतिहास नहीं है, हम यह भी मान सकते हैं कि यह वैरिएंट जल्दी आ गया होगा। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह वैरिएंट घातक है। इसलिए, हमें इस वैरिएंट को संभालने पर ध्यान देना चाहिए।”

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