हाईकोर्ट ने लगाई भेल प्रशासन को फटकार, सीनियर डीजीएम के तबादले पर पुन: करे विचार

सीनियर डीजीएम के तबादले के मामले में कोर्ट का अहम फैसला

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भेल में कुछ समय से भेल कर्मियों को अफसरों के तबादले काफी चर्चाओं में हैं। चाहे किसी की कोई भी परेशानी हो उसे नजरअंदाज कर कठोर तबादला नीति के तहत इंटर यूनिट तबादले किये जा रहे हैं इसी को लेकर एक भेल के अफसर का तबादला उसके पिता की आकस्मिक मौत, पत्नि की राज्य सरकार में नौकरी और खुद कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद भी भेल प्रशासन ने कठोर रवैया अपनाते हुए उसके बार-बार निवेदन करने के बाद बजाय तबादला आदेश निरस्त करने के 1500 किमी दूर तमिलनाडू में भेल की रानीपेट यूनिट कर दिया गया। उसने यह मामला हाईकोर्ट में दायर किया था।

इस पर माननीय उच्च न्यायलय प्र्रिंसीपल बेंच जबलपुर के माननीय न्यायमूर्ति श्रीमान सुश्रुत अरविन्द धर्माधिकारी ने भेल में कार्यरत सीनियर डीजीएम सेमसन पीटर द्वारा भेल की स्थानान्तरण नीति के विरूद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश पारित किया है। श्री पीटर की याचिका पर पैरवी करते हुए अधिवक्ता वेद प्रकाश नेमा, अम्रतांश नेमा, सारांश ठाकुर एवं विभा पाठक ने तर्क दिया की भेल प्रशासन ने याचिकाकर्ता का स्थानान्तरण भेल भोपाल से भेल रानीपेेट, तमिलनाडु 1500 किलोमीटर दूर बिना उनके अभ्यावेदन पर विचार किये कर दिया गया जो विधि तर्क संगत नहीं है। भेल प्रशासन ने याचिकाकर्ता पर प्रशासनिक दबाव बनाते हुए उन्हें स्थानान्तरण स्थानान्तरित कार्यक्षेत्र पर उपस्थित होने मजबूर किया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने माननीय न्यायालय को इस विषय से भी अवगत कराया की केंद्र सरकार की नीति अनुरूप याचिकाकर्ता की पत्नी जो स्वयं राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं इस स्थिति में उनके स्थानान्तरण पर पुन: विचार किया जाना चाहिए, जो भेल प्रशासन ने नहीं किया। याचिकाकर्ता के पिता की आकस्मिक मत्ृयु और याचिकाकर्ता का स्वयं कोविड-19 से ग्रसित हो जाने के बाद भी भेल प्रशासन का कठोर रुख कायम रहा और उनके अभ्यावेदन पर कोई विचार नहीं किया गया। यहां तक की भारत सरकार के हैवी इंडस्ट्रीज विभाग द्वारा भी याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विचार करने हेतु 3 बार सूचित किया गया किन्तु प्रशासन ने विभागीय आदेश को भी दरकिनार कर दिए।

माननीय उच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविन्द धर्माधिकारी ने प्रशासन के कठोर रवैये को संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता द्वारा पेेश किये गए अभ्यावेदन पर तथ्यों और स्थानान्तरण नीति को दृष्टिगत रखते हुए शीघ्रअतिशीघ्र निर्णय लेने का आदेश पारित किया और याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं द्वारा भेल की स्थानान्तरण नीति के विरूद्ध किये गए स्थानान्तरण और विधि अनुरूप कार्यवाही न करने को लेकर आड़े हाथों लिया जिस पर न्यायालय ने विधिसंगत कार्यवाही करने हेतु आदेश पारित कर राहत पहुंचाई है। गौरतलब है की न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी की यदि उनके द्वारा पेश अभ्यावेदन पर भेल प्रशासन समय सीमा के अंतर्गत सकारात्मक न्यायसंगत निर्णय नहीं लेता तो, वह पुन: न्यायलय में याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं।

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