जय श्री राम, वंदे मातरम, जय शिवाजी… महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजे इन नारों मायने क्‍या हैं?

मुंबई

महाराष्ट्र विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र रविवार से शुरू हुआ। पहले दिन व‍िधानसभा अध्‍यक्ष के ल‍िए हुए चुनाव हुआ जिसमें बीजेपी उम्‍मीदवार राहुल नार्वेकर की जीत हुई। राहुल को कुल 164 वोट म‍िले। जैसे ही राहुल के जीत की घोषणा हुई, सदन में जय श्री राम के नारे गूंज उठे। इसके अलावा जय भवानी, जय शिवाजी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम जैसे नारे काफी देर तक लगते रहे। इन्हीं नारों के बीच महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। सदन में इन नारों के बड़े सियासी मायने हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष चुनाव में श‍िवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार राजन साल्‍वी को सिर्फ 107 वोट मिले। महाराष्ट्र व‍िधानसभा अध्‍यक्ष चुनाव में समाजवादी पार्टी ने क‍िसी को वोट नहीं द‍िया। राहुल नार्वेकर की जीत का ऐलान होते ही जय श्री राम के नारे से गूंज उठे।

हिंदुवादी सरकार सत्ता में!
एकनाथ शिंदे अपने विधायकों के गुट के साथ शनिवार को गोवा से मुंबई पहुंचे, जहां शिवसेना के बागी विधायक असम से लौटने के बाद डेरा डाले हुए थे। रविवार को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए और राहुल नार्वेकर को शिवसेना के बागी विधायकों ने वोट किया। सदन में जय श्री राम, जय भवानी, वंदे मातरम के नारे का सियासी मायने महाराष्ट्र की सत्ता का हिंदुवादी होना है। जिस हिंदुत्व को छोड़ने का आरोप शिवसेना पर लगा था।

चुनाव के बाद श‍िदे ने कहा क‍ि मैं खुद मंत्री था, कई अन्य मंत्रियों ने भी सरकार छोड़ी। बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की विचारधारा के प्रति समर्पित मेरे जैसे आम कार्यकर्ता के लिए यह बहुत बड़ी बात थी।विधानसभा में बोलते हुए सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर आधारित बीजेपी-शिवसेना की सरकार ने काम संभाल लिया है। आज तक हमने विपक्ष से सरकार की तरफ आते लोगों को देखा था मगर इस बार सरकार के लोग विपक्ष की तरफ चले गए।’

शिवसेना पर लगा हिंदुत्व का झंडा छोड़ने का आरोप
बाल साहेब ठाकरे की शिवसेना हिंदुत्व के लिए जानी जाती है। हिंदुत्व की पहचान वाली दूसरी पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाती थी। इस बार विधासभा चुनाव में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तो बीजेपी ने शिवसेना पर बाल साहेब ठाकरे के हिंदुत्व को दांव पर रखने का आरोप लगाया। इसके बाद से लगातार उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व का झंडा छोड़ने का आरोप लगता रहा।

साधुओं की मॉब लिंचिंग से लेकर नवनीत राणा प्रकरण तक…
बीते दिनों लगातार ऐसी घटनाएं हुईं जिसके बाद शिवसेना पर हिंदू विरोधी होने के आरोप लगे। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र में साधुओं की मॉब लिचिंग के पास से बड़े पैमाने पर हुए। बीते दिनों राज ठाकरे ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग की। औरंगाबाद सांसद नवनीत राणा ने मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया तो घटनाक्रम बढ़ता गया और उन्हें उनके पति रवि राणा के साथ जेल भेज दिया गया। एक के बाद एक घटनाएं ऐसी हुईं जिसने शिवसेना से हिंदुवादी होने का तमगा छीन लिया।

संजय राउत करते रहे बयानबाजी
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत लगातार यह कहते रहे कि शिवसेना को किसी से हिंदुत्व सीखने की जरूरत नहीं है। वह और उनकी पार्टी बयानबाजी करते रहे लेकिन घटनाक्रम उनके खिलाफ होता गया। शिवसेना पर हिंदू विरोधी होने का आखिरी दांव उनकी ही पार्टी के विधायक एकनाथ शिंदे ने खेला। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ने सत्ता के लालच में बाल साहेब ठाकरे के उद्देश्य को दांव पर रख दिया। अब विधानसभा में अध्यक्ष चुने जाने के बाद जय श्री राम, जय भवानी, जय शिवाजी, वंदेमातरम और भारत माता की जय जैसे नारे लगाकर बीजेपी ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि महाराष्ट्र में हिंदुत्व वाली सरकार फिर सत्ता में वापस आ गई है।

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