बिना अफसर को बताए विदेश से अब 10 लाख रुपये तक भेज सकते हैं रिश्तेदार

नई दिल्ली,

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े कुछ नियमों में संशोधन करते हुए भारतीयों को विदेश में रह रहे अपने रिश्तेदारों से साल में 10 लाख रुपये तक मंगवाने की अनुमति दे दी है. इसके लिए उन्हें अब अधिकारियों को सूचना भी नहीं देनी होगी.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम (FCRA) से संबंधित कुछ नियमों में संशोधन किया है, जिससे भारत में रहने वाले उन तमाम परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके सदस्य विदेश में रहते हैं और हर साल आर्थिक मदद भेजते रहते हैं. नए नियम के तहत अब विदेश में रहने वाले रिश्तेदार सालभर में घरवालों/ रिश्तेदारों को 10 लाख रुपए तक मदद भेज सकते हैं. इसके लिए उन्हें भारतीय अधिकारियों को सूचना देने की जरूरत नहीं रहेगी. पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी.

10 लाख से ज्यादा होने पर 90 दिन पहले सूचना देना जरूरी
एक अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि राशि 10 लाख से ज्यादा है तो 30 दिन की बजाय 90 दिन पहले सूचना देनी होगी. बता दें कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2022 को गृह मंत्रालय ने शुक्रवार रात एक गजट अधिसूचना के जरिए अधिसूचित किया है. अधिसूचना में कहा गया है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 के नियम 6 में -‘एक लाख रुपए’ शब्दों के स्थान पर ‘दस लाख रुपए’ और ‘तीस दिन’ की जगह ‘तीन माह’ शब्द रखे जाएंगे. नियम-6 रिश्तेदारों से विदेशी धन प्राप्त करने की सूचना से संबंधित है.

नियम 9 में भी किया गया है बदलाव
इसमें पहले कहा गया था कि कोई व्यक्ति किसी वित्त वर्ष में अपने रिश्तेदार से एक लाख रुपये से ज्यादा या समान राशि चंदे के रूप में प्राप्त करता था तो उसे इस तरह की राशि प्राप्त करने के 30 दिन के अंदर केंद्र सरकार को सूचना देनी होती थी. इसी तरह, नियम 9 में बदलाव किया गया है. जो विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन और पूर्व अनुमति प्राप्त करने की अर्जी से संबद्ध है. संशोधित नियमों में व्यक्तियों और संगठनों या गैर सरकारी संगठनों (NGO) को बैंक खाते के बारे में गृह मंत्रालय को सूचित करने के लिए 45 दिन का समय दिया है. जिनका उपयोग ऐसी निधियों के उपयोग के लिए किया जाना है. यह समय सीमा 30 दिन पहले थी.

अब एनजीओ को हर तिमाही घोषणा नहीं करनी पड़ेगी
केंद्र सरकार ने नियम 13 में प्रावधान ‘बी’ भी विलोपित कर दिया है जो दानदाता, प्राप्त राशि और प्राप्त करने की तारीख आदि समेत विदेशी चंदा की अपने वेबसाइट पर हर तिमाही घोषणा करने से संबद्ध है. अब FCRA के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने पर एक अप्रैल को शुरू होने वाले प्रत्येक वित्त वर्ष के प्रथम दिन, वित्त वर्ष समाप्त होने के 9 महीने के अंदर, अपनी वेबसाइट पर या केंद्र द्वारा निर्दिष्ट वेबसाइट पर खाते का विवरण देने की मौजूदा प्रक्रिया का पालन करना होगा. NGO या किसी व्यक्ति के विदेशी चंदा प्राप्त करने के मामले में इस तरह के अंशदान की घोषणा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रति तिमाही करने का प्रावधान भी खत्म कर दिया गया है.

इसके अलावा, अब FCRA के तहत विदेशी धन प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए आय और व्यय विवरण, प्राप्ति और भुगतान खाते और बैलेंस शीट समेत विदेशी योगदान की प्राप्तियों और उपयोग पर खातों के विवरण रखने के मौजूदा प्रावधान का पालन करना होगा. बैंक खाते, नाम, पता, टारगेट या संगठन के प्रमुख सदस्यों को विदेशी धन प्राप्त करने के मामले में गृह मंत्रालय ने पिछले 15 दिनों के बजाय अब 45 दिनों का समय दिया है.

नियमों को बनाया गया है सख्त
गृह मंत्रालय ने नवंबर 2020 में FCRA नियमों को सख्त बना दिया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि गैर सरकारी संगठन जो सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं, लेकिन बंद, हड़ताल या सड़क जाम जैसी सक्रिय राजनीति या दलगत राजनीतिक कार्रवाई में शामिल या हिस्सा लेते हैं तो उन्हें राजनीतिक प्रकृति का माना जाएगा. इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले संगठनों में किसान संगठन, छात्र, श्रमिक संगठन और जाति-आधारित संगठन शामिल हैं.

संशोधित एफसीआरए में सरकार ने लोक सेवकों को विदेशी धन प्राप्त करने से रोक दिया और गैर सरकारी संगठनों के प्रत्येक पदाधिकारी के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है. नया कानून यह भी कहता है कि विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठन प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए इस तरह के 20 प्रतिशत से अधिक धन का उपयोग नहीं कर पाएंगे. 2020 से पहले यह सीमा 50 फीसदी थी. कानून के अनुसार, फंड प्राप्त करने वाले सभी एनजीओ को एफसीआर के तहत पंजीकरण कराना होता है.

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