चीन के कर्ज में कैसे फंसता गया पाकिस्तान? अब गिलगित-बाल्टिस्तान लीज पर देगा!

नई दिल्ली,

2008 में श्रीलंका के हम्बनटोटा में एक बंदरगाह बनाने का काम शुरू हुआ. श्रीलंका ये बंदरगाह चीन की मदद से बना रहा था. इसके लिए चीन से भारी कर्ज लिया गया. 2017 आते-आते चीन के कर्ज में दबे श्रीलंका की हालत बिगड़ गई. इसके बाद श्रीलंका ने हम्बनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज के लिए चीन को दे दिया. बदले में श्रीलंका को 1.1 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने में छूट मिली. ये महज एक उदाहरण है, जो बताता है चीन कैसे पहले किसी छोटे देश को कर्ज के जाल में फंसाता है और फिर उसके इलाकों को हड़पना शुरू कर देता है.

पांच साल पहले चीन ने जो श्रीलंका में किया था, अब वैसा ही कुछ पाकिस्तान के साथ होने जा रहा है. जैसे चीन ने कर्ज देकर श्रीलंका का हम्बनटोटा बंदरगाह हड़प लिया था, वैसे ही अब गिलगित-बाल्टिस्तान भी हड़प सकता है. ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान अपना कर्ज उतारने के लिए चीन को गिलगित-बाल्टिस्तान लीज पर दे सकता है.

कराकोरम नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष मुमतान नागरी ने अल अरबिया पोस्ट को कुछ दिन पहले बताया था कि पाकिस्तान अपना कर्ज उतारने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन को लीज पर दे सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि अलग-थलग पड़ा गिलगित-बाल्टिस्तान आने वाले समय में जंग का मैदान बन सकता है.

ऐसा कितना कर्ज है पाकिस्तान पर?
पाकिस्तान के इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, मार्च 2022 तक उस पर 88 अरब डॉलर का कर्ज है. इसमें से 14.5 अरब डॉलर का कर्ज अकेले चीन का है. हालांकि, ये कर्ज और कहीं ज्यादा भी हो सकता है, क्योंकि पिछले साल IMF ने पाकिस्तान पर चीन का 25 अरब डॉलर का कर्ज होने का अनुमान लगाया था.

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान पर चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज (SAFE) का भी 7 अरब डॉलर का कर्ज है. इसके अलावा चीन के तीन बैंक- बैंक ऑफ चाइना, ICBC और चाइना डेवलपमेंट बैंक का भी कर्ज है. पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर आ गया है. उसका विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम होता जा रहा है. मई 2022 तक पाकिस्तान के पास 9.6 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा है, जबकि अप्रैल 2022 तक 10.75 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था.

IMF से जब बात नहीं बनी, तो पाकिस्तान ने चीन के आगे हाथ फैला दिए. चीन ने अब उसे 2.3 अरब डॉलर का कर्ज देने का वादा किया है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ट्वीट कर बताया था कि ये कर्ज कुछ ही दिनों में मिल जाएगा.

पाकिस्तान पर किसका कितना कर्ज?
पेरिस क्लब 9.7 अरब डॉलर
चीन 14.5 अरब डॉलर
SAFE (चीन) 7 अरब डॉलर
एशियन डेवलपमेंट बैंक 14.20 अरब डॉलर
वर्ल्ड बैंक 18.14 अरब डॉलर
कमर्शियल बैंक 8.7 अरब डॉलर

चीन के जाल में फंसता जा रहा है पाकिस्तान
– चीन अपने कर्ज पर जमकर ब्याज भी वसूलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान को जो कर्ज दिया है, उस पर 4.5% से 6% तक का ब्याज भी वसूल रहा है. जबकि, कर्ज देने वाली अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां एशियन डेवलपमेंट बैंक, IMF और वर्ल्ड बैंक 3% से कम ब्याज लेती हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 2021-22 में पाकिस्तान ने चीन के 4.5 अरब डॉलर के कर्ज पर 150 मिलियन डॉलर का ब्याज दिया था. इससे पहले 2019-20 में 3 अरब डॉलर के कर्ज पर 120 मिलियन डॉलर का ब्याज चुकाया था.

– चीन पहले कर्ज तो दे देता है, फिर उसकी वसूली के लिए दबाव बनाता है. इसी साल अप्रैल में चीनी कंपनी ने पाकिस्तान से नवंबर 2023 तक उसका 5.6 करोड़ डॉलर का बकाया चुकाने को बोला है. इस कंपनी ने लाहौर ऑरेंज लाइन प्रोजेक्ट में मदद की थी. चीन ने पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, लेकिन कर्ज न चुका पाने की वजह से कई का काम रोक भी दिया है. पिछले साल दासू डैम में आतंकी हमला हुआ था. इसमें चीन के 36 इंजीनियरों की मौत हो गई थी. चीन ने पाकिस्तान से 38 मिलियन डॉलर का मुआवजा मांगा था. आखिरकार 11.6 मिलियन डॉलर पर बात बनी और तब जाकर दासू डैम प्रोजेक्ट का काम दोबारा शुरू हुआ.

तो क्या गिलगित-बाल्टिस्तान हड़प लेगा चीन?
– पहली बात तो ये कि गिलगित-बाल्टिस्तान, पाकिस्तान का है नहीं, वो दोनों भारत के हैं. गिलगित-बाल्टिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर में हैं. 1948 से पाकिस्तान का यहां अवैध कब्जा है. गिलगित-बल्टिस्तान कश्मीर के सबसे उत्तरी भाग में चीन की सीमा से लगा हुआ है.

– अब खबरें आ रहीं हैं कि पाकिस्तान अपना कर्ज उतारने के लिए चीन को गिलगित-बाल्टिस्तान लीज पर दे सकता है. हालांकि, पाकिस्तान अगर ऐसा करता है, तो इससे उसके लिए और परेशानी खड़ी हो सकती है. इससे अमेरिका चिढ़ सकता है और IMF 3 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज देने से मना कर सकता है. सिर्फ IMF ही नहीं, बल्कि वर्ल्ड बैंक जैसी ग्लोबल एजेंसियां भी पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर सकतीं हैं.

– इतना ही नहीं, पाकिस्तानी सरकार अगर ऐसा करती है, तो उसे यहां विद्रोह का सामना भी करना पड़ सकता है. कराकोरम नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष मुमताज नागरी ने यहां लोगों से कहा है कि वो ISI से न डरें और जेल जाने के लिए तैयार रहें. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान की आबादी बहुत कम है. यहां स्थिति बहुत खराब है और लोग पलायन कर रहे हैं ताकि उन्हें काम मिल सके. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली कुल आत्महत्याओं में से 9% यहीं पर होती है.

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