अफ्रीका पर ‘कब्‍जे’ की तैयारी में चीनी ड्रैगन! जिम्‍बॉब्‍वे की नई संसद पर खर्च किए 14 करोड़ डॉलर

हरारे

जिम्‍बॉब्‍वे में नई संसद बनकर तैयार है और अगले कुछ दिनों में इसे देश को सौंप दिया जाएगा। माउंट हैंपडन में बनी इस संसद को तैयार किया है चीन ने और इस पर उसने 140 मिलियन डॉलर खर्च कर डाले हैं। चीन का मकसद इस बिल्डिंग के जरिए इस क्षेत्र में अपना प्रभाव कायम करना है। जिम्‍बॉब्‍वे, सदर्न अफ्रीका का वो हिस्‍सा है जहां पर चीन के सबसे ज्‍यादा प्रोजेक्‍ट चल रहा है। ये जगह उसका सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर और सबसे ज्‍यादा कर्ज दिया गया है। माउंट हैंपडन, राजधानी हरारे से 18 किलोमीटर दूर है और इस संसद को नए शहर की शुरुआत माना जा रहा है।

​दोस्‍ती की मिसाल
इस बिल्डिंग को तैयार करने में 500 चीनी टेक्निशियंस और 1200 स्‍थानीय मजदूरों को लगाया गया था। शंघाई कंस्‍ट्रक्‍शन ग्रुप के मैनेजर लीबो साइ ने कहा है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि नई संसद जिम्‍बॉब्‍वे के लिए एक मील का पत्‍थर है और यहां तक पूरे सदर्न अफ्रीका में ऐसा कुछ नहीं देखने को मिलेगा। इसके अलावा ये बिल्डिंग चीन और जिम्‍बॉब्‍वे की दोस्‍ती में भी नई इबारत लिखेगी जो साल दर साल मजबूत होती जा रही है। सरकार का मानना है कि हरारे में भीड़ बहुत बढ़ गई है और अब यहां पर सरकारी कामकाज मुश्किल है।

​होगी नई राजधानी!
ये नई संसद 33,000 स्क्‍वॉयर मीटर में फैली है और दो मुख्‍य इमारतें भी इसका हिस्‍सा हैं। इसके अलावा छह मंजिला ऑफिस बिल्डिंग और चार मंजिला पार्लियामेंट बिल्डिंग भी इसमें शामिल है। जिम्‍बॉब्‍वे की योजना अब न्‍यायपालिका और सरकारी ऑफिसेज को हरारे से माउंट हैंपडन में शिफ्ट करने की है। साथ ही सरकार की कुछ प्रशासनिक यूनिट्स को भी यहीं पर लाया जाएगा। एक स्‍टेटहाउस और आधिकारिक निवासों के अलावा हाउस स्‍पीकर और सीनेट के प्रेसीडेंट के घर भी यहां पर होंगे।

​चीन पर लगे आरोप
ये नया शहर ही देश के रिजर्व बैंक, होटल्‍स और शॉपिंग मॉल्‍स की जगह बनेगा। जिम्‍बॉब्‍वे में चीन के दूतावास की तरफ से चीनी टेक्निशियंस और जिम्‍बॉब्‍वे के मजदूरों को थैंक्‍यू कहा गया है। जिम्‍बॉब्‍वे में आलोचकों ने अब चीन की तरफ से तैयार इस बिल्डिंग पर चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि चीन से मदद लेकर राष्‍ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला जा रहा है। इसके साथ ही उन्‍होंने इथियोपिया में स्थित अफ्रीकन यूनिटी (AU) के हेडक्‍वार्ट्स में चीन की जासूसी का आरोप लगाया है। हालांकि चीन ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है।

​जाल में फंसता अफ्रीका
चीन के जाल में अफ्रीका पर फंसता जा रहा है। पूर्वी अफ्रीका के जिबूती में चीन का नौसेना बेस है तो वहीं अफ्रीका के अलग-अलग देशों में प्रोजेक्‍ट के नाम पर कई बिलियन डॉलर का कर्ज दे डाला है। साल 2020 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक अंगोला वो देश है जिसे चीन ने सबसे ज्‍यादा करीब 25 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है। वहीं इथियोपिया को 13.5 बिलियन डॉलर, जाम्बिया को 7.4 बिलियन डॉलर, कांगो को 7.3 बिलियन डॉलर और सूडान को 6.4 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है। अफ्रीकी सरकारें इस समय 143 बिलियन डॉलर के चीनी कर्ज में डूबी हैं।

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