ईडी ने एमनेस्टी इंडिया और पूर्व सीईओ आकार पटेल पर की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली

प्रवर्तन निदेशालय ने एमनेस्टी इंडिया और उसके पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) आकार पटेल पर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा विनिमय कानून के उल्लंघन के लिए हुई है। इन पर ईडी ने 61 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। ईडी ने शुक्रवार को एमनेस्टी इंडिया और उसके पूर्व मुखिया पर की गई इस कार्रवाई की जानकारी दी। जांच एजेंसी ने विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत एमनेस्टी इंडिया पर 51.72 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं इस अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के तत्कालीन प्रमुख पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

यह है आरोप
ईडी ने एक बयान में कहा कि इन दोनों को जुर्माने के संबंध में नोटिस भेजा गया है। उसने यह कदम एमनेस्टी इंडिया के बारे में मिली शिकायत की पड़ताल के बाद उठाया है। ईडी के विशेष निदेशक स्तर के फेमा अधिकारी ने इस मामले की जांच की है। प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी भारतीय इकाई एमनेस्टी इंडिया इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL) को बड़ी मात्रा में विदेशी अंशदान भेजा था। यह कारोबारी गतिविधियों की शक्ल में भेजा गया था। यह असल में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) से बचने का तरीका था।

FDI के जरिए भेजती थी पैसा
एजेंसी ने कहा कि उसने इस सूचना के आधार पर फेमा के तहत जांच शुरू की थी कि ब्रिटेन स्थित एमनेस्टी इंटरनेशनल अपनी भारतीय इकाइयों के जरिये बड़ी मात्रा में विदेशी अंशदान FDI मार्ग से भेजती रही है। शिकायत के मुताबिक, एमनेस्टी ने भारत में अपनी एनजीओ गतिविधियों को वित्त मुहैया कराने के लिए ऐसा किया। ईडी ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (AIIFT) और अन्य ट्रस्ट को एफसीआरए के तहत पूर्व-पंजीकरण या मंजूरी देने से गृह मंत्रालय के ‘इनकार’ के बावजूद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विदेशी धन भेजने के लिए एफडीआई मार्ग का इस्तेमाल किया।

जानिए ईडी ने क्या कहा
उसने कहा, “नवंबर 2013 से लेकर जून 2018 के दौरान एमनेस्टी इंडिया को विदेश से मिली राशि को कारोबार एवं प्रबंधन सलाह के साथ जनसंपर्क सेवाओं के एवज में मिले शुल्क के तौर पर दिखाया गया। लेकिन यह विदेशी अंशदाता से ली गई उधारी के अलावा कुछ नहीं है, लिहाजा यह फेमा प्रावधानों का उल्लंघन करता है।” इस मामले की जांच करने वाले फेमा अधिकारी ने एमनेस्टी इंडिया से विस्तृत जवाब मिलने के बाद यह पाया कि एआईआईपीएल ब्रिटेन की एमनेस्टी इंटरनेशनल लिमिटेड के तहत गठित एक इकाई है, जिसे भारत में सामाजिक कार्यों के मकसद से बनाया गया था।

जारी किया गया कारण बताओ नोटिस
बयान के मुताबिक, “हालांकि एआईआईपीएल ऐसी कई गतिविधियों में लिप्त रहा है जो उसके घोषित वाणिज्यिक कार्यों से मेल नहीं खाता। एफसीआर की निगाह से बचने के लिए कारोबारी गतिविधियों के नाम पर विदेशी फंड को भारत भेजने का काम किया गया है।” प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को दी गई सेवाओं के एवज में यह राशि मिलने के बारे में किए गए एमनेस्टी इंडिया के सारे दावे एवं हलफनामे ‘ठोस सबूत के अभाव में’ खारिज कर दिए गए हैं। एजेंसी ने यह नतीजा निकाला है कि एमनेस्टी इंडिया को मिली 51.72 करोड़ रुपये की राशि असल में एमनेस्टी इंटरनेशनल की तरफ से भारतीय क्षेत्र में अपने मकसद को पूरा करने के लिए दी गई है। ईडी के मुताबिक, एमनेस्टी की यह गतिविधि फेमा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करती है लिहाजा इस मामले में जुर्माने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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