शिंजो आबे: नाना की गोद में बैठ सुनी भारत की कहानी, जापानी दोस्त जो हिंदुस्तान से इश्क करता है

नई दिल्ली

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे को आज गोली मारी गई। जापानी के पूर्व पीएम आबे की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। पीएम मोदी ने अपने खास दोस्त पर हमले को लेकर दुख व्यक्त किया है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से शुरू हुआ था आबे परिवार का रिश्ता मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी तक चला। शिंजो आबे, 1957 में स्वतंत्र भारत की यात्रा करने वाले पहले जापानी प्रधान मंत्री नोबुसुके किशी के पोते हैं। आबे का भारत से नाता बचपन से जुड़ा था। आबे ने अपनी भारत यात्रा के दौरान उन कहानियों को याद किया था जो उन्होंने बचपन में अपने नाना की गोद में बैठकर भारत के बारे में सुनी थीं। शिंजो आबे का भारत को लेकर खास लगाव था। यह लगाव काशी से लेकर क्योटो तक दिखाई देता था। आबे का भारत की संस्कृति से लेकर द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जो निकटता थी वह कई मौकों पर दिखाई थी। बुलेट ट्रेन परियोजना से लेकर असैन्य परमाणु समझौते में आबे की भूमिका भारत से उनके प्रति प्यार को दर्शाती है।

जब पहली बार भारत आए थे आबे
शिंजो अबे ने अपने पहले कार्यकाल में साल 2006-2007 में भारत की यात्रा की थी। उन्होंने उस यात्रा के दौरान संसद में भी भाषण दिया था। वह सबसे अधिक बार भारत का दौरा करने वाले जापानी प्रधानमंत्री थे। शिंजो अबे ने प्रधानमंत्री के रूप में जनवरी 2014, दिसंबर 2015 और सितंबर 2017 में भारत दौरे पर आए थे। आबे साल 2014 में पहले जापानी प्रधानमंत्री थे जिन्हें भारत ने गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।

पीएम मोदी के साथ खास रिश्ता
पीएम नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व पीएम शिंजो अबे के बीच खास रिश्ता था। दोनों नेता जब भी मिलते थे तो दोनों की मुलाकात में गर्मजोशी देखते ही बनती थी। पीएम रहते हुए आबे जब भारत आए थे तो पीएम मोदी उन्हें बनारस लेकर गए थे। आबे की दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती को भारत नहीं भूला है। शिंजो जब भारत से विदा हुए थे पीएम मोदी ने उन्हें श्रीमद्भागवत गीता भेंट की थी। शिंजो आबे का भारत की संस्कृति और सभ्यता के प्रति खास स्नेह था। पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उस दौरान भी शिंजो आबे के साथ उनके संबंध काफी मधुर थे।

जब आबे ने मोदी से आधा घंटा की थी बातचीत
साल 2020 में शिंजो आबे ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पद छोड़ने की घोषणा की थी। पद से इस्तीफा देने के बाद आबे ने पीएम मोदी के साथ मुलाकात को याद किया था। उन्होंने पीएम मोदी से फोन पर आधा घंटा बात भी की थी। इस दौरान उन्होंने ‘दोस्ती और विश्वास के रिश्ते के लिए पीएम मोदी का आभार जताया था। इस पर पीएम मोदी ने भी आबे के प्रयासों की सराहना की थी और एक-दूसरे से मुलाकातों को याद किया था।

भारत जापान रिश्तों को नया चेहरा दिया
साल 2001 में भारत और जापान के बीच ग्लोबल पार्टनरशिप की नींव रखी गई थी। साल 2005 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन पर सहमति बनी। साल 2006 में पीएम शिंजो अबे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘इंडिया जापान स्ट्रटीजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए थे। 2007 में आबे और सिंह ने ‘भारत और जापान के बीच सामरिक और वैश्विक साझेदारी के लिए नए आयामों के रोडमैप’ और ‘पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा पर सहयोग में वृद्धि’ पर हस्ताक्षर किए। अगस्त 2007 में भारत की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के लंबे इतिहास पर एक नए द्विपक्षीय एशियाई गठबंधन के लिए सहमति दी थी। आबे के कार्यकाल में भारत के साथ सबसे चर्चित समझौतों में से एक फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक बनाने की पहल की थी। आबे के नेतृत्व में भारत के साथ सामरिक और आर्थिक सहयोग, सामरिक सहयोग का क्वाड मसौदा, इंडो-पैसिफिक पर अमेरिका, भारत और आस्ट्रेलिया समेत कई देशों के साथ सहयोग काफी महत्वपूर्ण था। भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) अगस्त 2011 में प्रभावी हुआ। यह भारत द्वारा संपन्न ऐसे सभी समझौतों में से एक था। इसका उद्देश्य भारत और जापान के बीच व्यापार की जाने वाली 94 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर शुल्क को समाप्त करना था।

आबे ने भारत के साथ सामरिक संबंधों को दी मजबूती
शिंजो आबे के शासनकाल में जापान और भारत के द्विपक्षीय सामरिक संबंधों को बहुत मजबूती मिली। भारत और जापान के बीच असैन्य परमाणु समझौता इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल थी। इस समझौते ने परमाणु आपूर्ति समूह के देशों तक भारत की बाधाओं को दूर कर दिया, जो भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति में मदद को आसान बनाने की राह खोली। भारत और जापान के बीच साल 2020 में रक्षा मामलों में आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान की संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते से दोनों देशो की सेनाओं के बीच पारस्परिक सहयोग और जरूरत के समय एक दूसरे के बीच आपूर्ति और सेवाओं का सुगम आदान-प्रदान की राह खुली। सामरिक क्षेत्रों के अलावा इससे आपदा प्रबंधन और बचाव में भी सहयोग बढ़ा।

हाई स्पीड रेल से लेकर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में सहयोग
मुबंई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल हो, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर हो या डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हो, जापान के सहयोग से बन रहे ये प्रोजेक्ट नए भारत की ताकत बनने वाले हैं। इन समझौते शिंजो आबे के कार्यकाल में रफ्तार पकड़ी। पीएम के रूप में शिंजो आबे की पहल के चलते भारत में बुलेट ट्रेन की राह साफ हुई। बुलेट ट्रेन को लेकर हुए भारत का जापान के साथ समझौता दोनों देशों के संबंधों के बीच नई ऊंचाई का प्रतीक था। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट विकसित भारत के एक सपने का अहम हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाने के लिए शिंजो आबे ने जो समझौता किया वह काफी महत्वपूर्ण था। शिंजो आबे ने भारत को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जरूरी राशि मुहैया कराना सुनिश्चित किया। इस समझौते में लोन को लौटाने की समय अवधि भी 25 वर्षों की जगह 50 वर्ष रखी गई।इस तरह से यह समझौता कई मायनों में भारत के पक्ष में रहा। शिंजो आबे ने भारत में स्‍वच्‍छ भारत मिशन के लिए अपनी सरकार का सहयोग देने की पेशकश की थी।

भारत ने दिया था पद्मभूषण नागरिक सम्मान
भारत ने पिछले साल ही जापानी पीएम शिंजो आबे को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने का फैसला किया था। उन्हें यह सम्मान जनसेवा के क्षेत्र में दिया गया था। जापानी रक्षा मंत्री होसोई नोरोता का साल 2001 में मिले सम्मान के बाद आबे दूसरे जापानी राजनेता थे जिन्हें यह सम्मान दिया गया।

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