क्या ईडी राहुल गांधी से 50 से अधिक घंटे पूछताछ करने से बच सकती थी?

नई दिल्ली

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नैशनल हेरल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से मैराथन पूछताछ के अपने अनुभव को साझा करते हुए हाल ही में कहा था, ‘कांग्रेस धैर्य सिखाती है, मैं 2004 से काम कर रहा हूं, यहां तक कि सचिन पायलट भी यहां बैठे हैं, धैर्य हमारे अंदर है।’ यह एक प्रतिक्रिया थी जो राहुल गांधी ने ईडी अधिकारियों को दी थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह उन्होंने सभी सवालों के जवाब दिए और पूछताछ के दौरान दिन में 10-12 घंटे धैर्यपूर्वक बैठने में कामयाब रहे, उनका धैर्य देखकर ईडी के अधिकारी हैरान रह गए थे।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से नैशनल हेरल्ड मामले में पांच दिनों में 50 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई और उस दौरान उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर जोरदार विरोध किया था। हर दिन, सांसदों और विधायकों सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कांग्रेस मुख्यालय और ईडी कार्यालय के बाहर तैनात किया गया।24, अकबर रोड स्थित ईडी कार्यालय और कांग्रेस मुख्यालय के बीच कई बिंदुओं पर अर्धसैनिक और त्वरित कार्रवाई बलों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

देश की सबसे पुरानी पार्टी ने सत्ताधारी बीजेपी पर अपने स्वयं के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने एक मनगढ़ंत और फर्जी मामले पर कार्रवाई की है और इसके लिए उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा, ‘बिना किसी सबूत के भाजपा की तरफ से यह मामला उठाया जाना उसकी विफलताओं पर सवाल उठाने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश है और उसकी निरंकुशता के खिलाफ बोलने का हमें एक और मौका मिला है।’इस हाई-वोल्टेज ‘ईडी ग्रिलिंग’ में जांच एजेंसी ने राहुल गांधी से लंबी अवधि तक पूछताछ की है, तो क्या इससे बचा जा सकता था? अगर एजेंसी राहुल गांधी को गिरफ्तार नहीं करने जा रही थी, तो उन्हें लगातार पांच दिनों तक बुलाने की क्या जरूरत थी?

क्या ये सब सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिशोध था? क्या कोई और तरीका था, जिससे एजेंसी को कांग्रेस नेता से जवाब मिल सकता था? हां, एक वैकल्पिक तरीका था।ईडी राहुल गांधी को नियमित रूप से कार्यालय में बुलाने के बजाय, उन्हें उनके प्रश्नों की एक लिखित प्रश्नावली दे सकता था। राहुल गांधी इसे आने वाले दिनों में जमा कर सकते थे और इस तरह इससे प्रवर्तन एजेंसी को कानून और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती।ऐसा ही रुख पहले भी अपनाया गया था और वह भी देश के सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक 2जी घोटाले में।

2जी स्पेक्ट्रम मामले की देखरेख कर रहे सेवानिवृत्त विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी ने मामले में शामिल लोगों को एक हजार लिखित प्रश्न भेजे थे। उन्होंने अभियोजन का सामना कर रहे लोगों से आने वाले दिनों में जवाब देने को कहा था। इसने अदालत और इसमें शामिल व्यक्तियों दोनों के लिए काम आसान कर दिया।दिलचस्प बात यह है कि ईडी ने पांच दिनों की अवधि में राहुल गांधी से सिर्फ 100 सवाल पूछे थे, यानी प्रतिदिन औसतन लगभग 20 सवाल।ईडी ने आने वाले दिनों में सोनिया गांधी को नैशनल हेरल्ड मामले में तलब किया है। अगर एजेंसी उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती है, तो वह पूछताछ को राजनीतिक रंगमंच में बदलने से बचाने के लिए कोई दूसरा रास्ता चुन सकती है।

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